पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

डिजिटल बदलाव अब दस्तक दे रहा है:नई पीढ़ी के लिए ईमेल अब तनाव है, टेक्स्टिंग ज्यादा सुविधाजनक

9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • 30 से कम उम्र के लोगों के लिए ईमेल से संवाद प्राथमिकता नहीं, दूसरे विकल्पों पर जोर

पुरानी पीढ़ी आमतौर पर नई पीढ़ी के कई ट्रेंड पर असहमति और संदेह जताती है। लेकिन, कम से कम एक मामले-ईमेल में दोनों सहमत लगते हैं। अमेरिका में जनरेशन जेड (1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग) की दिलचस्पी किसी दिन लोगों को लबालब भरे मेलबॉक्स से बचा सकती है।

कंसल्टिंंग फर्म क्रिएटिव स्ट्रेटजीस के 2020 के सर्वे में पाया गया कि प्रायमरी वर्क टूल के मामले में पीढ़ियों के बीच अंतर तो है। सर्वे के अनुसार 30 साल और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए ई-मेल सहयोग, संवाद का सबसे प्रमुख साधन है।

30 साल से कम आयु के लोगों में गूगल डॉक्स का प्रचलन सबसे अधिक है। फिर जूम और आई मैसेज हैं। लॉसएंजिलिस में वीडियो प्रोडक्शन कंपनी के मालिक 24 वर्षीय एडम सिमंस ई-मेल छोड़कर बाकी हर साधन के जरिये संवाद पसंद करते हैं। वे अपने कर्मचारियों और ग्राहकों से इंस्टाग्राम मैसेज, जूम कॉल पर संपर्क करते हैं। वे कहते हैं, ई-मेल से तनाव बढ़ता है। काम ज्यादा हो जाता है।

कंसल्टिंग कंपनी डेलॉयट के ताजा सर्वे में जनरेशन जे़ड के 46% लोगों ने पुष्टि की है कि उन्होंने 2020 में अधिकतर समय तनाव महसूस किया। 35% ने कहा कि उन्होंने तनाव और बेचैनी की वजह से काम से छुट्टी ली थी। युवाओं और टेक्नोलॉजी पर केंद्रित स्वयंसेवी संस्था की फाउंडर ग्लोरिया मोस्कोविट्ज और एरिका पेलाविन ने लिखा है कि जेनरेशन जेड समझती है कि टेक्नोलॉजी ने किस तरह उसकी दुनिया बदली है। वह नए तरीके इस्तेमाल करती है।

महामारी की ऊब के संबंध में राय मांगने पर अप्रैल में न्यूयॉर्क टाइम्स को ई-मेल के संबंध में दर्जनों मैसेज मिले थे। एक पाठक ने ई-मेल को अनंत काम बताया। एक अन्य ने लिखा जब भी ई-मेल मिला लगा कि मुझे छुरा मार दिया गया है।

महामारी में ई-मेल से मुश्किलें और अधिक बढ़ गई। कुछ व्यक्तियोंं ने ई-मेल का जवाब देने में देरी पर अपराध बोध महसूस किया। अन्य लोगों ने लिखा कि ई-मेल की बाढ़ का जवाब देने के कारण वे दूसरे काम में पिछड़ गए।

औसतन 199 ई-मेल अनरीड

कई लोग वर्षों से ई-मेल से पीछा छुड़ाने की कोशिश में लगे हैं। लेखक कैल न्यूपोर्ट लंबे समय से इनबॉक्स के अत्याचार से एकाग्रता में बाधा आने का बात कहते रहे हैं। उन्होंने ई-मेल से मुश्किलों पर किताब लिखी है- अ वर्ल्ड विदाउट ई-मेल: रिइमेजनिंग वर्क इन एन ऐज ऑफ कम्युनिकेशन ओवरलोड। 2017 में एक स्टडी में पाया गया कि औसत इनबॉक्स में 199 ई-मेल बिना पढ़े पड़े रहते हैं।

न्यूयॉर्क में आर्किटेक्ट विशाखा आप्टे ने लिखा- ई मेल भेजना ऐसा है जैसे किसी कमरे में जाने के बाद आप भूल गए कि वहां क्योंं आए हैं। क्लॉथिंग कंपनी चलाने वाले 23 साल के हैरीसन स्टीवंस का कहना है कि ई-मेल कंपोज करने की बजाय टेक्स्टिंग करना अधिक सुविधाजनक है।

कुछ लोगों को टेक्स्टिंग पेचीदा लगती है। वे संपर्क के दूसरे माध्यम अपनाते हैं।

खबरें और भी हैं...