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भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर:भारत में मौतों की वास्तविक संख्या पांच गुना अधिक ; वायरस के नए स्वरूप ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाई

4 दिन पहले
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  • मौतों की संख्या छिपाने के पीछे केंद्र सरकार का राज्यों पर दबाव
  • महामारी-दूसरी लहर के भयावह फैलाव और संक्रमण की सही स्थिति नहीं बताई जा रही है

भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर तेजी से भयानक संकट में बदल रही है। अस्पताल भर चुके हैं, ऑक्सीजन सप्लाई कम पड़ रही है, हताश लोग डॉक्टरों का इंतजार करते हुए मौत को गले लगा रहे हैं। मृतकों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से बहुत अधिक है। विश्व के लगभग आधे नए केस भारत में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है, यह संख्या विचलित करती है, फिर भी वायरस के फैलाव की सही स्थिति नहीं दिखाती है। इधर, साइंटिस्ट चिंतित हैं कि भारत में फैला वायरस के नए स्वरूप अधिक घातक हो सकते हैं। वैक्सीन का ज्यादा प्रतिरोध कर सकते हैं।

पिछले कुछ सप्ताहों से आए उफान में वायरस के नए स्वरूप की भूमिका हो सकती है। अहमदाबाद, सूरत, भोपाल, लखनऊ, कानपुर,मिर्जापुर, दुर्ग सहित देश के विभिन्न स्थानों में श्मशान घाटों में लोगों से हुई बातचीत से पता लगता है कि मौतों की सही संख्या सरकारी आंकड़ों से बहुत ज्यादा है। कुल मौतों का आंकड़ा दो लाख के नजदीक पहुंचने की सरकारी जानकारी संदिग्ध है। विश्लेषकों का कहना है कि राजनेता और प्रशासक बड़ी संख्या में मौतों की अनदेखी करते हैं या गिनती कम कर रहे हैं। व्यथित परिजन भी शर्म के मारे कोरोना से मौतों की जानकारी छिपाते हैं।

भारत की स्थिति पर गहराई से नजर रखने वाली मिशिगन यूनिवर्सिटी की महामारी विशेषज्ञ भ्रमर मुखर्जी का कहना है, यह पूरी तरह से आंकड़ों का संहार है। हमने जितने मॉडल बनाए हैं, उसके अाधार पर हमारा विश्वास है कि बताई जा रही संख्या से दो से लेकर पांच गुना तक अधिक मौतें हुई हैं। कुछ माह पहले भारत में स्थिति अच्छी थी। यह सोचकर कि बुरे दिन बीत गए अधिकारियों और सामान्य नागरिकों ने सावधानी बरतना छोड़ दिया। अब देश के कई इलाकों में सामूहिक अंतिम संस्कार हो रहे हैं। विश्व का प्रमुख वैक्सीन निर्माता होने के बावजूद लगभग 10 प्रतिशत भारतीयों को पहली डोज लगी है।

वैक्सीनों के बेअसर होने की आशंका बढ़ रही

डॉक्टर चिंतित हैं कि डबल म्यूटेंट- बी.1.617 वायरस के कारण यह लहर चल रही है। इसमें कोरोना वायरस की दो अन्य अति संक्रामक किस्मों में पाए गए जेनेटिक बदलाव मिले हैं। एक स्वरूप तो इस वर्ष के प्रारंभ में कैलिफोर्निया, अमेरिका में तबाही मचाने वाले उच्च संक्रामक वेरिएंट में मिला है। ऐसा ही स्वरूप दक्षिण अफ्रीकी म्यूटेंट में पाया गया है। ये वैक्सीनों के प्रति अधिक प्रतिरोधक हैं। फिर भी साइंटिस्ट आगाह करते हैं, अभी नहीं कहा जा सकता कि भारत में उभरे नए वेरिएंट कितने घातक हैं। तेजी से फैलने और काबू में कम आने वाले नए स्वरूपों के नतीजे दुनिया के लिए बदतर हो सकते हैं। साइंटिस्ट चिंतित हैं कि जिन देशों में वैक्सीनेशन पर्याप्त मात्रा में हो चुका है, वहां लोग बेफिक्र हो गए हैं। कोरोना वायरस ऐसे तरीके से रूप बदल सकता है कि वर्तमान वैक्सीन बेअसर हो जाएं।

पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत की आबादी अधिक युवा है। विशेषज्ञ कहते हैं, संभवत: इस कारण से भारत में प्रति दस लाख पर मौतों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। फिर भी ,मृतक संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक्सेस मॉर्टेलिटी स्टडी के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देशों में कोविड-19 से मौतें कम बताई गई हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, भारत में किसी सामान्य वर्ष में भी केवल बीस प्रतिशत मौतों की चिकित्सकीय जांच होती है। बड़ी संख्या में लोगों के मरने का कारण दर्ज नहीं होता है। मिशिगन यूनिवर्सिटी की डा. मुखर्जी कहती हैं, कुछ परिवार नहीं चाहते कि सच सामने आए। कुछ लोग कोविड-19 के कड़े सरकारी प्रोटोकॉल से परे जाकर अंत्येष्टि करते हैं। इसलिए वे छिपाते हैं कि उनके परिजन की मौत कोरोना से हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है, मौतें छिपाने के पीछे राजनीतिक एजेंडा भी हो सकता है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार का राज्य सरकारों पर मौतें कम बताने का दबाव होगा। डॉ. मुखर्जी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा बेरोजगारी में बढ़ोतरी के आंकड़ों को दबाने का उदाहरण देती हैं। वे कहती हैं, कोविड-19 के मामले में स्थिति बेहतर बताने के लिए राज्य सरकारों पर केंद्र सरकार का बहुत अधिक दबाव है।

जेफ्री जेंटलमैन, समीर यासिर, हरिकुमार, सुहासिनी राज

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