ब्रिटेन में लोकल ट्रांसपोर्ट और पकड़ेगा स्पीड:लंदन में 1.70 लाख करोड़ रु लागत की हाईस्पीड ट्रेन दौड़ेगी

एक महीने पहले
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न्यूयॉर्क शहर के अस्त-व्यस्त लोकल ट्रेन सिस्टम को सुधारने की कोशिश में लगे एंडी बायफोर्ड को तत्कालीन गवर्नर एंड्रू कुओमो से विवादों के बीच विदा होना पड़ा था। अब बायफोर्ड फिर सुर्खियों में आ रहे हैं। उन्होंने, मई 2020 में लंदन के सिटी ट्रांजिट अथॉरिटी कमिश्नर की जिम्मेदारी संभाली थी। वे 24 मई को लंबे समय से लटकी पड़ी एलिजाबेथ ट्रेन लाइन को हरी झंडी दिखाएंगे ।

1.70 लाख करोड़ रुपए की लागत से निर्मित हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट पश्चिम, पूर्व और मध्य लंदन को जोड़ेगा। इसका बहुत बड़ा हिस्सा भूमिगत है। एलिजाबेथ लाइन का निर्माण 13 वर्ष से हो रहा है। कई दशक तक तो उसकी योजना फाइलों में बंद रही। बायफोर्ड ने अकेले इस प्रोजेक्ट की कायापलट नहीं की है। सबसे अधिक श्रेय मार्क वाइल्ड सहित नए मैनेजरों को है। 2018 में प्रोजेक्ट संकट में फंस गया था।

इंजीनियरों ने डिजिटल स्विचिंग सिस्टम सहित 75 हजार खामियां पाई थीं। बाइफोर्ड ने 2020 में सरकार से सात हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त लेकर काम ठप होने से रोका था। पिछले कुछ माह से खाली ट्रेन के ट्रायल रन चल रहे हैं।

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में शहरी मामलों के विशेषज्ञ टोनी ट्रेवर्स कहते हैं, एलिजाबेथ लाइन बेजोड़ है। स्टेशन बहुत बड़े हैं। उनमें चर्च के समान अधिक जगह है। प्लेटफार्मों की लंबाई अनंत लगती है। सामान्य सबवे ट्रेनों के मुकाबले ट्रेन की लंबाई दोगुनी है। भूमिगत ट्रेन की सुरंगें बनाने के लिए 30 लाख टन मिट्‌टी खोदी गई है। लिवरपूल स्टेशन की खुदाई करते समय कामगारों के सन् 1569 की सामूहिक कब्र में ढेरों कंकाल मिले थे। 100 पुरातत्वविदों की टीम ने 3300 लोगों के अवशेष निकाले थे।

विशेषज्ञ एलिजाबेथ लाइन को इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि मानते हैं। रेल लाइन में दस नए स्टेशन और 67 किलोमीटर लंबी सुरंगें हैं। यह तीन बार थेम्स नदी के नीचे से गुजरती हैं।

मार्क लेंडर

© The New York Times

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