वर्क प्लेस में कैसा बदलाव होगा?:भविष्य में कर्मचारी हफ्ते के 3 दिन ही ऑफिस आना चाहेंगे

16 दिन पहले
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  • एनवाईटी ने कुछ विशेषज्ञों से 2022 और उसके बाद कामकाज की दुनिया में होने वाले बदलाव के संबंध में चर्चा की। जानिए प्रमुख ट्रेंड क्या रहेंगे?

ऑफिस का ट्रेंड
दफ्तर अब आधी दुनिया ही रहेगी

कोविड से बहुत पहले ही लोग डिजिटल थकान और ऊब का सामना कर रहे थे। ज्यादातर लोग अधिक काम नहीं करना चाहते हैं। वे केवल नौकरी बनाए रखने और पेशेवर रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए जरूरी काम ही करना चाहते हैं।

वर्कर अब वर्कप्लेस पर अपनी समस्याएं उन लोगों से शेयर नहीं करना चाहते हैं जिनकी भूमिका आपको केवल ढाढस बंधाने की है। भविष्य में कर्मचारी सप्ताह में केवल तीन दिन ऑफिस आना चाहेंगे। बाकी दिन वे अपनी गोपनीय दुनिया में खो जाना चाहेंगे।
-टीना ब्राउन, पत्रकार
खान-पान
सेहतमंद फूड हैबिट्स बनी रहेंगी
बीते दो वर्षों में खान-पान उद्योग ने तेजी से नई स्थितियों के मुताबिक बदलाव किया है। कोविड-19 लॉकडाउन और नई टेक्नोलॉजी ने कामगारों को नौकरी बदलने या नया करिअर अपनाने का रास्ता दिखाया है।

दरअसल, लोग जिंदगी और करिअर में पूरी तसल्ली चाहते हैं। कुछ हासिल करने से मिलने वाले संतोष की इच्छा रखते हैं। ई-कॉमर्स ने नया बिजनेस शुरू करना आसान बनाया है। लॉकडाउन की बंदिशों और घर से काम करने के कारण फूड के संबंध में लोगों की नई आदतें बनी हैं। घर में कुकिंग के साथ सेहतमंद खान-पान की शुरुआत हुई है।

भविष्य में भोजन के साथ हमारा रिश्ता उसके बनने में इस्तेमाल होने वाली चीजों पर निर्भर करेगा। -विकी लाउ, टेट डाइनिंग रूम, हांगकांग के मालिक

नियोक्ता व कर्मचारी
नए काम की तलाश तेज होगी

कंपनियों के नियोक्ता और प्रबंधकों ने कर्मचारियों की घरेलू जिम्मेदारियों से तालमेल बैठाया है। अमेरिका में हुए सर्वे बताते हैं, आधे से अधिक अमेरिकी कामगारों की नजर नए रोजगार पर है। अधिकतर लोग अपने काम के घंटे बदलना चाहते हैं। कामगार मर्जी के मालिक बनना चाहते हैं।
-बेटी स्टीवेंसन, अमेरिकी अर्थशास्त्री और जस्टिन वोल्फर्स,आस्ट्रेलियाई अर्थशास्त्री
टेक्नोलॉजी
यह सुविधा है पर स्वर्ग नहीं...

टेक्नोलॉजी ने कहीं से भी काम करना संभव बनाया है। उसने संस्थाओं को बदला है और कई जरूरी सेवाएं मुहैया कराई हैं। लेकिन, बड़े सुधारों के बिना टेक्नोलॉजी कर्मचारियों के स्वर्ग का सृजन नहीं कर सकती है।

वर्कप्लेस पर युवा प्रतिभाओं के एक्टिविज्म से भी परिवर्तन होगा। वे फैसलों में अधिक भागीदारी चाहते हैं। यह काफी नहीं है। टेक्नोलॉजी सुविधा संपन्न बनाती है लेकिन नियम तो मनुष्य बनाते हैं।
-रोसाबेथ मॉस केंटर, प्रोफेसर हार्वर्ड बिजनेस स्कूल

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