अमेरिका में गोपनीय दस्तावेज मिलने का मामला:बाइडेन के घर सरकारी दस्तावेज मिलने की जांच शुरू, पुराने कार्यकाल की गतिविधियों पर नजर

12 दिन पहले
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  • अटॉर्नी जनरल ने स्पेशल काउंसिल नियुक्त किया, पूर्व सहायकों से पूछताछ

जनवरी 2017 में अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जोसफ बाइडेन सामान समेटने में लगे थे। लगातार फोन कॉल आ रहे थे। बैठकें और फेयरवैल पार्टियों चल रही थीं। यूक्रेन और स्विटजरलैंड की यात्रा हो चुकी थी। इधर, बाइडेन के विलमिंगटन स्थित घर और वाशिंगटन के निजी ऑफिस में मिले चंद गोपनीय दस्तावेजों से कई सवाल उठे हैं। यह कि क्या कुछ समेटा जा रहा था? उसे कहां ले जाया गया था? और कौन यह कर रहा था? इन सवालों की जांच के लिए नियुक्त अमेरिका के स्पेशल काउंसिल का फोकस बाइडेन के व्यस्त आखिरी दिनों पर होगा। बाइडेन अब स्वयं राष्ट्रपति हैं। उन्हें बताने में मुश्किल हो रही है कि क्या हुआ था। उनके प्रशासन ने दो माह तक संवेदनशील रिकॉर्ड मिलने के मामले को गुप्त रखा था। मीडिया रिपोर्ट में खुलासा होने के बाद उसने चुप्पी तोड़ी। प्रशासन को कई बार अपने बयान में सुधार करना पड़ा है।

शनिवार को व्हाइट हाउस ने बताया कि न्याय विभाग के कर्मचारियों को विलमिंगटन के घर में एक कमरे से पांच पेज कागजात और मिले हैं। पहले व्हाइट हाउस ने केवल एक पेज मिलने की जानकारी दी थी। अटॉर्नी जनरल मैरिक गारलैंड ने दस्तावेजों को गलत जगह रखने की जांच के लिए रॉबर्ट हर को स्पेशल काउंसिल नियुक्त किया है।

व्हाइट हाउस ने दस्तावेजों के बाइडेन के पास पहुंचने का कोई कारण नहीं बताया है। बाइडेन के लिए जनवरी 2017 का समय अनिश्चितता से भरा था। वे 44 साल में पहली बार सरकार से बाहर हो रहे थे। वे सीनेटर और उपराष्ट्रपति नहीं थे। कई माह गुजरने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला किया था। बाइडेन ने पिछले सप्ताह कहा था, मैं हैरान हूं कि कोई सरकारी दस्तावेज उस ऑफिस ले जाए गए थे। ऐसे सबूत भी नहीं मिले हैं कि बाइडेन को कागजात ले जाने की जानकारी थी।

अगर उपराष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस छोड़ते समय स्वयं दस्तावेज नहीं हटाए हैं तो स्पेशल काउंसिल पता लगाएंगे कि उनके दस्तावेजों की पैकिंग किन लोगों ने की थी। स्पेशल काउंसिल की नियुक्ति से पहले न्याय विभाग के अधिकारियों ने बाइडेन के कई सहयोगियों से पूछताछ की है। इनमें उपराष्ट्रपति रहते बाइडेन की मुख्य सहायक रही केथी चुंग शामिल हैं। पिछले सप्ताह सीमित बयान जारी करने के बाद व्हाइट हाउस ने सवालों के जवाब देने से इनकार किया है। प्रेस सचिव केरिने जीन पियरे का कहना है, पिछले दो दिनों में हमने पारदर्शिता बरती है। पहला गोपनीय दस्तावेज 2 नवंबर को मिला था। बाकी दस्तावेज 20 दिसंबर को मिले हैं। इसके बाद व्हाइट हाउस ने नेशनल आर्काइव्स और रिकॉर्ड प्रशासन को सूचना दी।

राष्ट्रपति बराक ओबामा और उपराष्ट्रपति बाइडेन के समय व्हाइट हाउस ने गुप्त दस्तावेज रखने की नियमित प्रक्रिया शुरू की थी। राष्ट्रपति जिन दस्तावेजों को देखते थे, उन्हें आर्काइव्स में भेज दिया जाता था। पद छोड़ने के बाद पूर्व राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति गुप्त दस्तावेजों सहित सरकारी रिकॉर्ड देख सकते हैं लेकिन इसकी प्रक्रिया बहुत लंबी है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई थीं
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सरकारी दस्तावेजों को कानून के अनुसार सुरक्षित रखने की बजाय यहां-वहां बिखेर देते थे। उन्होंने नियमों की परवाह नहीं की। ट्रम्प के खिलाफ अपने मार-अ-लेगो, फ्लोरिडा के आवास में संवेदनशील दस्तावेजों को जमा रखने की जांच हो रही है। उन्होंने मांगे जाने के बाद भी दस्तावेज नहीं लौटाए थे।

ट्रम्प जोर देते रहे कि उन्हें वर्गीकृत दस्तावेज रखने का अधिकार है। उन्होंने दस्तावेजों का खुलासा करने का दावा किया था। हालांकि, इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं। दस्तावेज लौटाने का उन्होंने बहुत ज्यादा विरोध किया था। इस वजह से अधिकारी उनके खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाने पर विचार कर रहे थे।

पीटर बेकर, माइकेल शीयर | वाशिंगटन
© The New York Times

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