अमेरिका में बढ़ते हमलों के चलते हुआ इंतजाम:क्लास रूम में ताला, अलार्म, फेंसिंग देखने को मिल रही है स्कूलों में

13 दिन पहले
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  • मैदानों में सीधे प्रवेश मुश्किल, स्कूल खाली कराने के अभ्यास

एडम लेन जब आठ साल पहले हेन्स सिटी हाई स्कूल के प्रिंसिपल बने तब किसी हमलावर को स्कूल में घुसने से रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। आज स्कूल के चारों और दस फुट ऊंची फेंस है। मैदानों तक जाने के लिए अलग गेट हैं।

ऑफिस में आने के लिए लोगों को घंटी बजाना पड़ती है। स्कूल के मुख्य स्थानों में 40 कैमरे लगे हैं। स्कूलों में शूटिंग की तीन जानलेवा घटनाओं और स्कूलों के मैदानों में गोलियां चलने की वारदातों के बाद पिछले पांच साल में अमेरिका के स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था बहुत ज्यादा कड़ी हुई है। अमेरिकी शिक्षा विभाग के सर्वे के अनुसार देश के 78 प्रतिशत स्कूलों के क्लासरूम में ताले हैं। दो तिहाई सरकारी स्कूलों में मैदानों में प्रवेश पर नियंत्रण रखा गया है। 43 प्रतिशत स्कूलों में पेनिक बटन या अलार्म लगे हैं। इनका सीधा संबंध पुलिस से है। पांच वर्ष पहले 29 प्रतिशत स्कूलों में ऐसी सुविधा थी। सिक्योरिटी से जुड़ी गतिविधियां स्कूल का नियमित हिस्सा हैं। लगभग 35 प्रतिशत स्कूलों में साल में नौ या अधिक बार स्कूल खाली कराने का अभ्यास हुआ है।

6 प्रतिशत स्कूलों में हर दिन मैटल डिक्टेटर का इस्तेमाल होता है। कई स्कूलों के कैम्पस में स्वयं की पुलिस व्यवस्था है। तीन प्रतिशत स्कूलों ने शिक्षकों को हथियारबंद किया है। नवंबर में एक हजार से अधिक स्कूलों के सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। क्लास रूम में ताला लगाने और स्कूलों तक बाहरी लोगों की पहुंच सीमित करने जैसे उपाय सामान्य हैं। विशेषज्ञों का कहना है, मैटल डिक्टेटरों, कैम्पस में सशस्त्र स्टाफ जैसे उपायों का शूटिंग रोकने पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। सिक्योरिटी कैमरों या पेनिक बटन जैसे उपायों से हिंसा रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन इनसे शूटिंग नहीं रुकेगी।

विशेषज्ञ कहते हैं, कैम्पस में गन आने से पहले ही रोकथाम का तरीका सबसे अधिक प्रभावी है। नेशनल पुलिस इंस्टीट्यूट में हिंसा रोकथाम सेंटर के डायरेक्टर फ्रेंक स्ट्राब कहते हैं, चूंकि अधिक स्कूल शूटिंग वर्तमान या पूर्व छात्रों ने की हैं इसलिए उनके साथ पढ़ने वाले छात्र खतरे को सबसे पहले पहचानने की स्थिति में होते हैं। उनका कहना है, शिक्षकों, माता-पिता और अन्य लोगों को छात्रों पर नजर रखनी चाहिए। खासकर बच्चे के अलग रहने, अवसाद ग्रस्त होने या नोटबुक में गन के डूडल बनाने जैसे संकेतों पर ध्यान दिया जाए।

पिछले साल स्कूलों में शूटिंग की घटनाएं, 330 घायल
स्कूलों में सिक्योरिटी पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। फिर भी, स्कूलों में गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं। दस दिन पहले वर्जीनिया में छह साल के एक बच्चे ने गन से गोली चलाकर अपने शिक्षक को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। वह अपने घर से गन लेकर आया था। रिसर्च प्रोजेक्ट के-12 स्कूल शूटिंग डेटाबेस के मुताबिक पिछले साल स्कूल के मैदानों में 330 व्यक्ति गोलियां लगने से जख्मी हुए हैं। 2018 में यह संख्या 218 थी।

सारा मर्वोश
© The New York Times

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