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अमेरिका पर वैक्सीन संबंधित दबाव:मीडिया पर सलमान रूशदी, ग्रेटा थनबर्ग सहित कई लोगों की राष्ट्रपति बाइडेन से अपील

4 दिन पहले
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  • अमेरिका पर भारत को वैक्सीन के कच्चे माल की सप्लाई का दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन की सरकार पर भारत को कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई से प्रतिबंध हटाने का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका में वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट के तहत पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने निर्यात पर पाबंदी लगाई थी। बाइडेन ने इसे जारी रखा है। इधर, विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने निर्यात प्रतिबंध पर सवालों के जवाब में कहा कि अमेरिका सबसे पहले अमेरिकी जनता को वैक्सीन लगाने के प्रयासों में जुटा है।

प्राइस ने यह टिप्पणी गुरुवार को की है। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य नेताओं के साथ बाइडेन जलवायु परिवर्तन पर शिखर वार्ता कर रहे थे। इस मौके पर अमेरिका ने कहा कि बढ़ते तापमान की मुश्किलों से निपटने के लिए अमेरिका भारत और अन्य देशों की मदद करेगा। वैक्सीन सप्लाई पर अमेरिका का रुख और जलवायु परिवर्तन की कूटनीति में बहुत अंतर है। देश के सबसे ज्यादा प्रभावित शहर मुंबई के राजनेता मिलिंद देवड़ा ने सोशल मीडिया पर लिखा, वैक्सीन जमा करके और वैक्सीन बनाने के लिए जरूरी सामान के निर्यात को रोककर अमेरिका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत-अमेरिका भागीदारी को नुकसान पहुंचा रहा है। वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट की भारतीय शाखा के डायरेक्टर उलका केलकर ने लिखा है, यह दयनीय है। क्या जलवायु संकट के बीच अमेरिका का नेतृत्व ऐेसा ही होना चाहिए।

वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला पहले ही बाइडेन से कच्चे माल के निर्यात पर बंदिश हटाने की अपील कर चुके हैं। बाइडेन ने पिछले सप्ताह कहा था कि अमेरिका ने कुछ वैक्सीन कनाडा और मेक्सिको भेजी है। कुछ और वैक्सीन भेजने का विचार है। उन्होंने कहा, हम देखेंगे कि जिन वैक्सीनों का हम उपयोग नहीं कर रहे हैं, उनका क्या किया जाए। भारत में वैक्सीन की कमी और बढ़ती मौतों के साथ सोशल मीडिया पर बाइडेन के लिए अपीलें हो रही है। लेखक सलमान रूशदी, लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आशीष झा ने लिखा है कि अमेरिका के पास वैक्सीन की लाखों डोज का उपयोग नहीं हो रहा है। इन्हें दूसरे देशों को भेजा जाए। जलवायु परिवर्तन पर अभियान चला रही स्वीडन की एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने लिखा, वैश्विक समुदाय को फौरन जरूरी सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

भारत से सप्लाई रूकी, अफ्रीका में वैक्सीनेशन रूकने की नौबत

भारत में कोरोना वायरस के कहर से दुनिया में वैक्सीनेशन के प्रयासों को धक्का लगा है। अफ्रीका में यह सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है। अधिकतर देश वैक्सीन के लिए सीरम इंस्टीट्यूट पर निर्भर हैं। लेकिन, भारत सरकार द्वारा वैक्सीन निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से अफ्रीका में पहले ही धीमी गति से चल रहे वैक्सीनेशन के जल्द ही रुकने की नौबत आ सकती है। भारत से सप्लाई में बाधा से पहले ही अफ्रीका महाद्वीप में सबसे धीमी रफ्तार से वैक्सीन लगाई जा रही है। अफ्रीकी देशों को तीन करोड़ 60 लाख डोज मिल चुकी हैं लेकिन अब तक केवल एक करोड़ 50 लाख वैक्सीन लगी हैं।

निर्यात रोकने से पहले भारत 70 देशों को छह करोड़ से अधिक डोज भेज चुका था। कोवैक्स प्रोग्राम के तहत गरीब और मध्यम आय वर्ग के देशों को डोज भेजी जा रही हैं। ड्यूक ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन सेंटर की असिस्टेंट डायरेक्टर एंड्रिया टेलर ने एक ई-मेल में लिखा है, भारत से निर्यात पर रोक के कारण कोवैक्स प्रोग्राम प्रभावित हुआ है।

सोमिनी सेनगुप्ता

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