इंफेक्शस डिसीज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन:नए वैरिएंट से संक्रमित वायरस की 43 गुना तक ज्यादा बूंदें फैला रहे हैं

6 दिन पहले
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अल्फा और डेल्टा जैसे कोरोना वायरस के नए वैरिएंट बहुत संक्रामक हैं और मूल वायरस से अधिक लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। दो नए अध्ययनों के अनुसार हवा में तेज गति से बढ़ने के कारण वायरस का प्रसार अधिक हो रहा है। इसलिए भीड़ भरे स्थानों में तंग और कसी फिटिंग के मास्क जरूरी हो गए हैं। वायरस के नए स्वरूप अधिक मजबूत हैं। पिछले साल महामारी पर काबू पाने के प्रयासों के तहत बंद जगह में कोरोना के प्रसार को रोकने की रणनीति अपनाई गई थी। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और सार्वजनिक स्थानों में बेहतर वेंटिलेशन पर गर्म बहस छिड़ी थी।

अब अधिकतर रिसर्चर सहमत हैं कि कोरोना वायरस फर्श पर जल्द गिरने वाली बड़ी बूंदों और बंद कमरों में लंबी दूरी तक जाने वाले एरोसोल्स- छोटी बूंदों से सीधे फेफड़ों में जाता है। यहां सबसे ज्यादा नुकसान होता है। नए अध्ययन इस बुनियादी विचार को नहीं बदलते हैं। लेकिन, वे संकेत देते हैं कि कुछ स्थितियों में बेहतर क्वालिटी के मास्क जरूरी हैं। राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक बीमारी इंस्टीट्यूट में वायरोलॉजिस्ट विंसेंट मुंस्टर का कहना है, वायरस अब अधिक तेजी से फैल रहा है। डॉ.मुंस्टर की टीम ने बताया कि छोटे एरोसोल्स बड़ी बूंदों की तुलना में लंबी दूरी तक जाते हैं और अल्फा वैरिएंट से एरोसोल ट्रांसमिशन के मार्फत नए इंफेक्शन होने की अधिक आशंका है। दूसरी स्टडी में पाया गया कि अल्फा से संक्रमित व्यक्तियों ने पुराने वैरिएंट से संक्रमित लोगों के मुकाबले 43 गुना अधिक छोटी बूंदें बाहर छोड़ी। इस माह क्रिटिकल इंफेक्शस डिसीज जर्नल में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार ढीली फिटिंग के कपड़े और सर्जिकल मास्क वायरस के आधे एरोसोल्स को रोकते हैं। रिसर्च से जुड़े मेरीलैंड यूनिवर्सिटी में एरोसोल विशेषज्ञ डॉन मिल्टन कहते हैं, भीड़ भरे स्थानों में लोगों को अधिक सुरक्षा देने वाले मास्क पहनना चाहिए।

अपूर्वा मंडावली
© The New York Times

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