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आतंकी हमला:काबुल में आतंकवादी हमलों से दहशत, लोगों में सरकार के खिलाफ असंतोष और गुस्से का माहौल

6 महीने पहले
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  • एक सप्ताह में 24 मौतों से लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ा
  • दोहा शांति वार्ता से विवाद सुलझने की उम्मीद कम होने लगी

काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में कई आतंकवादी हमलों से लोगों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। बीते सप्ताह एक मशहूर पत्रकार, एक मेयर के पिता और काबुल यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों सहित 24 लोगों की बम हमलों में मौत हो गई। लोगों में सरकार के खिलाफ असंतोष और गुस्सा बढ़ रहा है। उधर, दोहा, कतर मे अफगान सरकार और तालिबानी नेताओं के बीच बातचीत बंद पड़ी है। इससे लोगों में समस्या के शांतिपूर्ण हल की उम्मीद कम हो रही है।

हिंसा की सबसे ताजा घटना शनिवार को हुई है। अफगानिस्तान के 24 घंटे चलने वाले पहले न्यूज चैनल टोलो न्यूज के पूर्व एंकर यामा सियावाश और दो अन्य लोग मैग्नेटिक बम के हमले में मारे गए। अज्ञात हमलों में इस बम का उपयोग किया जा रहा है। सियावाश के पूर्व सहयोगी परवेज शामल कहते हैं, सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। हर दिन स्थिति बिगड़ रही है। दो दिन पहले अफगानिस्तान की पहली महिला मेयर जरीफा गफारी के पिता कर्नल अब्दुल वासी गफारी की काबुल में हत्या कर दी गई। सेना ने उनकी हत्या की आशंका जताई थी।

तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। हालांकि, वह अक्सर भय फैलाने और अफगान सरकार को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसे हमले करती है जिनकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है। काबुल यूनिवर्सिटी पर हुए हमले की जिम्मेदारी आईएस ने ली थी। लेकिन अफगान सरकार के अधिकारियों ने तालिबान पर 22 लोगों की हत्या का आरोप लगाया है। फरवरी में अमेरिका से हुए समझौते में सभी पक्षों के बीच हिंसा कम करने पर सहमति बनी थी।

काबुल में अपराध और हिंसा बढ़ने के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने वरिष्ठ उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालहे को राजधानी में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। सालेह ने कुछ अपराधियों के पोस्टर शहर में लगाने की शुरुआत की थी। ये फोटो सोशल मीडिया से लिए गए थे। पोस्टरों कथित अपराधों का ब्योरा था। ऐसे दो फोटो लगा दिए गए जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया था। इस अभियान की जनता पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। लोगों ने काबुल में कुछ सरकारी अधिकारियों के फोटो लगाकर उन्हें अपराधी घोषित कर दिया।

अक्टूबर में 212 मौतें

काबुल में स्थिति गंभीर है। अज्ञात हमलावरों द्वारा की जा रही हत्याओं से दहशत का माहौल है। ग्रामीण इलाकों में तालिबान और सरकार के बीच लड़ाई चलने से जनजीवन प्रभावित है। सितंबर 2019 के बाद अक्टूबर का महीना अफगान नागरिकों के लिए सबसे अधिक जानलेवा रहा है। इस माह 212 लोगों की मौत हो चुकी है।

- (थॉमस गिबन्स, फातिमा फैजी)

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