तालिबान के कारण महिलाओं के सपने बिखरे:अफगान महिलाओं में उम्मीद जगाने वाली फैशन इंडस्ट्री में दहशत;हजारों लोगों ने काम बंद किया

2 महीने पहले
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  • तालिबान का असर-पुरानी कशीदाकारी से बने परिधान विदेशों में पेश करने की योजनाएं ठप

30 साल के आंत्रप्रेन्योर हसीब रहीमी और उनकी छोटी बहन डिजाइनर रहिबा रहीमी ने 2021 के लिए बड़ी योजनाएं बनाई थीं। यह उनके पांच साल पुराने फैशन ब्रांड लमान को विदेशों में पेश करने का साल हो सकता था। उन्होंने 2019 में मिलान में फैशन शो किया। उनके परिधान ओस्लो, दुबई में भी दस्तक दे चुके हैं।

भाई-बहन ने 500 कारीगरों का नेटवर्क जोड़ा है। उनमें से 50 कंपनी के मुख्यालय काबुल में हैं। इनकी अगुआई एक महिला करती हैं। लेकिन, काबुल में 15 अगस्त को तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने अपने स्टाफ को कारोबार बंद करने की सूचना दे दी।

तालिबान के सत्ता में आने से कामकाजी महिलाओं के सपने बिखर गए हैं। हजारों महिला कारीगरों ने काम बंद कर दिया है।

अफगानिस्तान की परंपरागत कशीदाकारी और आधुिनक स्टाइल के मेल से बने परिधान कई देशों में पहचान बना रहे हैं। इस उद्योग से हजारों महिलाएं जुड़ी हैं। ओस्लो, नार्वे में पढ़े रहीमी ने फोन पर बताया कि अब सब कुछ खत्म हो गया है।

अफगानिस्तान में फैशन की दुनिया से स्टाइल, ट्रेंड या धन की बजाय उम्मीद अधिक जुड़ी है। शिक्षा और पेशेवर माहौल से दूर महिलाओं के लिए फैशन आत्म निर्भर होने का एक रास्ता है। रहिबा रहीमी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि फैशन एक तरह से औरतों को अपने खोल से बाहर निकलकर समाज को अपनी उपस्थिति बताने का मौका देता है।

मध्य एशिया का पेरिस था अफगानिस्तान

अफगानिस्तान में पिछले दस वर्ष में एनजीओ और प्राइवेट उद्यमियों ने फैशन को आगे बढ़ने के रास्ते के रूप में चुना है। इसलिए कि कई महिलाएं परिवार की देखभाल के बीच घर से काम कर सकती हैं। सिल्क रोड के मध्य स्थित अफगानिस्तान का इतिहास और विरासत परिधानों एवं कशीदाकारी से जुड़ी है।

उसे मध्य एशिया का पेरिस कहा जाता था। देश में 1930 से 1970 के बीच स्थिरता की अवधि में अफगान कोट पश्चिमी देशों का मुख्य फैशन बन गया था। 1969 में लाइफस्टाइल मैग्जीन वोग ने अफगान एडवेंचर नामक फैशन शो किया था।

अर्थव्यवस्था में कारीगरों की हिस्सेदारी के लिए काम कर रही स्वयंसेवी संस्था नेस्ट 2015 से अफगानिस्तान में काम कर रही है। उसके साथ देश में 6700 कारीगर जुड़े हैं। इनमें 89 प्रतिशत महिलाएं हैं। 2001 में तालिबान के पतन के बाद देश में हाथ की कारीगरी के कई कारोबार पनपे हैं।

संयुक्त राष्ट्र और विश्व व्यापार संगठन की एजेंसी अंतरराष्ट्रीय ट्रेड कमीशन के एक कार्यक्रम एथिकल फैशन इनिशिएटिव के संस्थापक सिमोन सिप्रियानी ने केसरिया सिल्क का उत्पादन शुरू किया है। संस्था के 3500 कर्मचारियों में 60 प्रतिशत महिलाएं हैं।

2019 में एथिकल ने डच डिजाइनर जीन डे क्रून को जोड़कर जाजी विंटेज परिधान बाजार में उतारे हैं। मिलान में हुए एक शो में लमान सहित चार ब्रांड पेश किए गए। ये सभी महिलाओं की देन हैं।

जर्मनी में बस चुकी अफगान बहनों हिला और वना लमार की योजना अफगानी डिजाइन की सेवार ज्वेलरी ब्रांड शुरू करने की है। लमान के समान यह पहल भी रूक गई है। हिला ने बताया कि उन्हें रोज कई महिलाओं के संदेश मिलते हैं कि देश छोड़ने में उनकी मदद की जाए। परिधान और कारीगरी उद्योग में कार्यरत सभी स्त्रियां भयभीत हैं। एथिकल ने अफगानिस्तान से संबंधित सभी वेब पेज और उनके लिंक हटा दिए हैं।

नेस्ट की फाउंडर वान बर्जेन बताती हैं, हमारी कई महिला कारीगरों ने दहशत के मारे अपने नाम का कहीं जिक्र न करने के लिए कहा है। कई प्रतिष्ठानों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट बंद कर दिए हैं। तालिबानी दंड के भय से अधिकतर महिलाएं काम पर नहीं आ रही है।

वैसे, पुरुष कर्मचारियों ने काम शुरू कर दिया हैै। 24 अगस्त को तालिबान ने एक बयान में कहा था कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए घर में ही रहना चाहिए।

वनीसा फ्रीडमैन

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