ताइवान के द्वीपों पर 30 ड्रोन्स मंडराते देखे गए:चेतावनी के बतौर गोलियां दागीं आखिरकार सैनिकों ने चीन के एक ड्रोन को समुद्र में मार गिराया

14 दिन पहले
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पहले तो ताइवानी सैनिकों ने चीन से उड़कर आए ड्रोन्स की अनदेखी की। उसके बाद इनकी उड़ानों की संख्या बढ़ने पर चेतावनी के बतौर गोलियां दागीं। आखिरकार सैनिकों ने एक ड्रोन को समुद्र में मार गिराया। पिछले माह चीन के दक्षिणी समुद्र तट के पास ताइवान के दो द्वीपों पर 30 ड्रोन्स मंडराते देखे गए। इन पर हथियार नहीं थे। ड्रोन्स असैनिक या अज्ञात थे लेकिन इनका निशाना साफ तौर पर पहाड़ी इलाकों में तैनात ताइवानी सैनिक थे।

ड्रोन्स की लगातार उड़ानों से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। चीन ने ताइवान की खाड़ी में लड़ाकू जेट विमानों और युद्धक जहाजों की आवाजाही बढ़ाई है। ताइवान नेशनल पॉलिसी फाउंडेशन में विश्लेषक चिएह चुंग का कहना है, चीन जानबूझकर तनाव बढ़ाने के लिए एेसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। वैसे, यह अनुमान लगाना ठीक नहीं है कि असैनिक ड्रोन का सैनिक उद्देश्यों से कोई मतलब नहीं है।

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया युद्धक विमानों के अतिरिक्त चीनी सेना ने पिछले सप्ताह ताइवान के नजदीक चार ड्रोन भेजे हैं। चीन ने गुरुवार को लड़ाकू ड्रोन टीबी-001 भेजा। दो टोही ड्रोन शुक्रवार, शनिवार को भेजे गए। चीनी ड्रोन्स की उड़ानों से ताइवान सरकार पर सख्त जवाब देने का दबाव पड़ रहा है। यह युद्ध की मनोवैज्ञानिक रणनीति भी है।

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के पूर्व अधिकारी ड्रू थॉमसन कहते हैं, ताइवान की सेना चीन के लड़ाकू विमानों से निपटने में सक्षम है लेकिन उसे ऐसी रणनीति का सामना करने का अनुभव नहीं है। ताइवानी सेना 20 वीं सदी के युद्ध के लिए तैयार है लेकिन उसे 21 वीं सदी का युद्ध लड़ने के लिए बदलाव करना होगा।

प्रोपेगंडा का नया स्रोत
असैनिक ड्रोन ताइवान की छवि खराब करने के लक्ष्य से घरेलू प्रोपेगंडा का नया स्रोत हैं। चीन के सोशल मीडिया पर एक ड्रोन द्वारा लिए गए दो ताइवानी सैनिकों के फोटो दिखाए गए हैं। वे असहाय और आश्चर्यचकित नजर आ रहे हैं। कुछ तस्वीरों में चीन के शहर शियामेन की ऊंची इमारतें और ताइवानी सैनिकों की असहाय स्थिति दिखाई गई हैं।

जेन पेरेज एमी, चांग चिएन
© The New York Times

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