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तानाशाह चीन के कारनामे:दमन के बूते वायरस की सही खबरों को दबाया;17 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया

एक महीने पहले
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  • सरकारी प्रोपेगंडा मशीनरी ने त्रासदी से फायदा उठाया और जनमत को सरकार के पक्ष में मोड़ा

पिछले साल इसी सप्ताह चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी कई दशक में अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रही थी। कोरोना वायरस ने वुहान शहर को झकझोर दिया था। कुछ दिनों के अंदर महामारी को छिपाने के सरकारी प्रयासों की पोल खुल गई। जनता का गुस्सा ऑनलाइन फूट पड़ा था। उदार और खुले विचार रखने वाले चीनियों को उम्मीद थी कि त्रासदी चीनियों को सरकार के खिलाफ एकजुट करेगी। संभवत:यह मौका था जब दुनिया की सबसे ताकतवर प्रोपेगंडा मशीन ध्वस्त हो जाती। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ है। पिछले साल की स्मृतियां धुंधली पड़ चुकी हैं। महामारी के संबंध में सही खबरें देने वाले लेखकों, पत्रकारों और ब्लॉगरों को जेल भेज दिया गया। कई लोग तो गायब हैं। पुलिस ने 17 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था।

त्रासदी ने दिखाया है कि चीन ने जनता के सुनने, देखने और विचार करने की क्षमता पर काबू पा लिया है। सरकार ने दर्शाया है, खराब हालत में भी वह जनता को अपने साथ कर सकती है। चीन के सोशल मीडिया से बड़ी संख्या में बीमारी के प्रकोप से संबंधित पोस्ट, लेख, फोटो और वीडियो हटा लिए गए हैं। वायरस फैलने की चेतावनी देने वाले डॉ. वेन लियांग की वायरस से मौत के बाद कई चीनियों ने ऑनलाइन विद्रोह कर दिया था। उस समय अधेड़ आयु के एक चीनी बुद्धिजीवी ने ऑनलाइन बताया, उसके अनुमान के अनुसार अब उदार और स्वतंत्र चीनियों की संख्या कुल आबादी की 5 से 10 प्रतिशत से बढ़कर 30 से 40 प्रतिशत हो जाएगी। वहीं एक राजनीति विज्ञानी का कहना था, स्वतंत्र चीनी इंटरनेट यूजर की संख्या बढ़ने की बजाय कम हो जाएगी। उन्होंने, भविष्यवाणी की थी, चीनी जनता तीन माह बाद कम्युनिस्ट सरकार के नेतृत्व में बीमारी पर शानदार जीत का जश्न मनाएगी।

सही तस्वीर छिपाने के लिए हर स्तर पर कड़ी सेंसरशिप लगाई

महामारी के शुरुआती दिनों में चीनी सरकार ने स्थानीय स्तर पर भी कड़ी सेंसरशिप का सहारा लिया। लोगों की हर पोस्ट को पढ़ा और सुना गया। इसके बाद असंतोष जताने वालों को खामोश कर दिया गया। पुलिस ने 17 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। इन लोगों पर महामारी के संबंध में झूठी खबरें गढ़ने और फैलाने का आरोप था। 11 सप्ताह बाद वुहान में लॉकडाउन खत्म हो गया। दुनिया में कई वेबसाइट पर वुहान के भीड़ भरे स्वीमिंग पूल के फोटो दिखने लगे थे। चीन वायरस संक्रमण और मौतों पर नियंत्रण के मामले सफल उदाहरण के रूप में उभरा। दूसरी ओर अमेरिका सहित अन्य देशों में मौतें और संक्रमण के आंकड़े आसमान छू रहे थे।

सरकार हमेशा अपनी गंभीर गलतियों पर परदा डालती है

चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने लोगों को सिखाया है कि यदि खबरों और सूचनाओं को सख्ती से नहीं दबाया गया तो देश पर शासन करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार ने अपनी गंभीर गलतियों को कड़ाई से छिपाया है। इसके उदाहरण ग्रेट लीफ फारवर्ड, सांस्कृतिक क्रांति जैसे अभियान और तिएनआनमान चौक हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोगों ने जान गंवाई थी। सांस्कृतिक क्रांति के दौरान पीड़ित लोगों ने उपन्यासों की शक्ल में अपने संस्मरण लिखे थे। सरकार ने जल्द ही इन किताबों पर पाबंदी लगा दी।

राष्ट्रपति शी जिन पिंग के नेतृत्व में सरकार बहुत अधिक असहिष्णु हो गई है। 2020 में वुहान स्थित महिला लेखक फेंग फेंग को चीनी इंटरनेट पर सबसे अधिक कोसा गया। उनका कसूर केवल इतना था कि उन्होंने ऑनलाइन डायरी में अपने लॉकडाउन के अनुभव लिखे थे। लोगों ने ऑनलाइन उन्हें झूठा, देशद्रोही, खलनायक और साम्राज्यवादी कुत्ता तक कहा। अमेरिका में उनकी डायरी के अंग्रेजी अनुवाद के बाद उन पर सरकार और चीनी जनता को दुनिया में बदनाम करने का आरोप लगाया गया। चीन में कोई भी प्रकाशक उनकी किताबें छापने के लिए तैयार नहीं है। वुहान में एक स्वयंसेवी समूह की यी बताती है, बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई लेकिन किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई।

ली युआन

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