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संक्रमित लोगों पर स्टडी से आए ये नतीजे:वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने वैक्सीनेटिड बुजुर्गों के संक्रमित होने की आशंका बढ़ाई

12 दिन पहले
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  • जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी उनके अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 29 गुना ज्यादा

कई लोग जानना चाहते हैं कि कोविड-19 वैक्सीन लगवाने के बाद क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं। क्या यात्रा सुरक्षित है? क्या भीड़ भरे आयोजनों में जाना चाहिए? क्या डेल्टा वैरिएंट की वजह से परिवार के बुजुर्गों का जोखिम बढ़ गया है?

लेकिन, इन सभी सवालों का कोई एक जवाब नहीं है। संक्रमण का खतरा हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग है। विशेषज्ञों का शुरू से कहना है, वैक्सीन गंभीर बीमारी से बहुत अधिक सुरक्षा देती है। लॉस एंजिलिस काउंटी की नई स्टडी में बताया गया है कि वैक्सीनेटिड लोगों की तुलना में वैक्सीन ना लगवाने लोगों के कोविड-19 से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 29 गुना ज्यादा है।

ब्राउन यूनिवर्सिटी पब्लिक हेल्थ स्कूल के डीन डॉ. आशीष झा का कहना जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, वे अधिक बेहतर स्थिति में हैं। लॉस एंजिलिस पब्लिक हेल्थ विभाग में संक्रामक बीमारी नियंत्रण केंद्र के डायरेक्टर डॉ, शेरोन बाल्टर और उनकी टीम की रिसर्च से सही तस्वीर उभरती है। टीम ने 1 मई से 25 जुलाई के बीच 10895 पूरी तरह वैक्सीनेटिड और वैक्सीन रहित 30801 लोगों के संक्रमण का अध्ययन किया था।

जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी थी, उनमें इंफेक्शन की दर वैक्सीनेटिड लोगों से पांच गुना अधिक पाई गई। वैक्सीनेटिड लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की दर प्रति एक लाख व्यक्तियों पर एक रही। जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी उनमें यह दर 29.4 प्रति एक लाख रही।

लगता है, डेल्टा वैरिएंट ने वैक्सीन लगवा चुके बुजुर्गों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ा दिया है। वैक्सीनेटिड लोग भी संक्रमित होकर दूसरे व्यक्ति में बीमारी फैला सकते हैं। फिर भी, कई विशेषज्ञ मानते हैं, वैक्सीनेटिड व्यक्ति से संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है।

डॉ. आशीष झा ने एक अध्ययन के हवाले से बताया कि सिंगापुर विमानतल पर वैक्सीनेटिड लोगों से संक्रमण उस समय फैला जब उनमें बीमारी के लक्षण सामने आ चुके थे। यह भी पता लगा है कि बीमार पड़ने के बाद वैक्सीनेटिड लोगों का संक्रमण जल्दी खत्म होता है।

बच्चों की सुरक्षा संभव

18 वर्ष से कम आयु के किशोरों और बच्चों की सुरक्षा का सबसे बेहतर तरीका है कि उनके आसपास रहने वाले सभी वयस्क वैक्सीनेटिड हों। अमेरिका के बीमारी नियंत्रण, रोकथाम सेंटरों की रिपोर्ट में पाया गया कि प्रायमरी स्कूल के वैक्सीन ना लगवाने और मास्कविहीन शिक्षकों ने क्लास रूम में आधे बच्चों में संक्रमण फैला दिया।

अध्ययनों से पता लगा है कि अमेरिका में स्कूल वायरस फैलाने वाले प्रमुख केंद्र नहीं हैं। कमरे के अंदर मास्क पहनने, क्लास रूम में छात्रों को बीच तीन फुट की दूरी, हाथों की नियमित धुलाई जैसी सावधानियां बरतने से फायदा है।

तारा पार्कर पोप

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