इंटरनेट पर पोस्ट करने से बेहतर है चैटिंग:वेब का सबसे पुराना फंक्शन कई संभावनाओं से भरपूर है

15 दिन पहले
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सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों पर बहस के बीच इंटरनेट पर सबसे पहले एक-दूसरे से संपर्क के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला तरीका चैटिंग था। 1988 में इंटरनेट रिले चैट (आईआरसी) का पहला वर्जन व्यापक रूप से उपलब्ध कराया गया।

जल्द ही यह लोगों के ग्रुप में संवाद का स्वाभाविक माध्यम बन गया। रियल टाइम में टाइपिंग होने लगी। इसके बाद कंप्यू सर्व और एओएल सहित अन्य मुख्य सर्विस प्रदाताओं ने चैट को अपना लिया। ई-मेल सेवाओं ने भी एेसा किया।

नैपस्टार एक चैट एप था। प्रारंभिक सोशल नेटवर्क में माईस्पेस जैसे चैट फीचर्स थे। कई खिलाड़ियों वाली गेमिंग भी ग्रुप चैट पर निर्भर है। अंत में स्मार्टफोन चैटिंग मशीन बन गए। 2010 के दशक में आए बड़े सोशल मीडिया एप ने पोस्टिंग, शेयरिंग सहित कई नए फीचर पेश किए हैं लेकिन वे चैट फीचरों या चैट जैसी डीएम सेवाओं के आसपास बने हैं। लाइव स्ट्रीमिंग भी चैट जैसी है। 50 साल से कम आयु के अधिकतर लोगों के लिए चैटिंग फोन पर बात करने के समान है।

सोशल मीडिया की कई समस्याएं चैट में नहीं बल्कि फीड और पोस्ट में हैं। ये बहुत उत्तेजक और बोरिंग होते हैं। हमें गलत जानकारी की ओर ले जाते हैं। हमें सेलेब्रिटी के गलत पक्ष को अपनाने पर विवश करते हैं। यह अलग-थलग करने वाला अनुभव है। चैटिंग के साथ कई फायदे हैं। यह किसी टेबल पर बैठकर बात करने और पैदल घूमने के समान है। चाहे खुशी हो या दुख- चैटिंग हमें सवालों के साथ नहीं छोड़ती है। इसकी तुलना फीड से कीजिए। हर पोस्ट यूजर के खास और अदृश्य पहलू से अवगत कराती है।

फीड्स का बोलबाला होने से पहले हम चैटिंग करते थे। फीड चले जाएंगे तब भी हम चैटिंग करते रहेंगे। इंटरनेट पर अपने अनुभव को खुशनुमा बनाने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम चैटिंग ज्यादा करें और पोस्टिंग कम करें। ऑनलाइन संपर्क के नए सोच-विचार में चैटिंग की मुख्य भूमिका है। युवा लोग खासकर गेमर डिस्कॉर्ड एप से परिचित होंगे। इसका वायस चैट फीचर पॉपुलर है।

संवाद का बनावटी तरीका

किसी फीड पर पोस्टिंग करना निकट मित्रों या परिवार के सदस्यों से संवाद का बनावटी और अजीब तरीका है। वे भी उसी आडिएंस के साथ जुड़ जाते हैं। यह सोशल मीडिया की खासियत है। जबकि चैटिंग करना पोस्टिंग से अलग है। वह दोनों पक्षों के मौजूद होने पर उसी समय होती है। आपको चैट में शामिल होने और अलग होने की आजादी है।

जॉन हरमन
© The New York Times

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