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अमेरिका में भारी-भरकम बिलों का बोझ:वायरस ने पिता की जान ले ली, उसके बाद इलाज का सात करोड़ रु का बिल आया

23 दिन पहले
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  • अमेरिकी संसद ने नियम बनाए फिर भी भारी-भरकम बिल नहीं रुक रहे

कोरोना वायरस का इलाज कराने वाली एक महिला अपने मेडिकल बिल हरे, लाल और भूरे रंग की फाइल में ढेरों दस्तावेजों के साथ सहेजती हैं। एक व्यक्ति के पिता का निधन पिछले दिनों वायरस से हो गया था। वे इलाज के वास्ते लिए कर्ज का हिसाब एक्सेल शीट पर रखते हैं।

457 कतारों में पिता के सात करोड़ 29 लाख रुपए के मेडिकल बिल हैं। ये वे लोग हैं, जो कोविड-19 के इलाज का भारी बोझ ढो रहे हैं। कई लोगों ने वकीलों के माध्यम से अपने मेडिकल बिलों को चुनौती दे रखी है।

मिलवाउकी की मनोविज्ञानी जेनिफर मिलर कहती हैं, लोग सोचते हैं कि कोरोना वायरस मरीजों को मेडिकल बिलों से राहत देने के लिए सरकारी प्रावधान हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।

अमेरिकी संसद ने सरकार से सहायता राशि लेने वाले डॉक्टरों और अस्पतालों पर मरीजों से बहुत अधिक बिल लेने पर रोक लगा दी है। नियमों के तहत बीमा कंपनी द्वारा दी जाने वाली रकम से अधिक बिल न वसूलने का प्रावधान है। एक दर्जन से अधिक मरीजों ने बताया कि बिल संतुलित रखने के बीमा कंपनियों और संसद के प्रावधानों का कोई अर्थ नहीं है।

कुछ अस्पताल अधिक बिलिंग पर पाबंदी का पालन नहीं कर रहे हैं। हेल्थ रिसर्च फर्म एवलेरे के प्रमुख क्रिस लोन के अनुसार महामारी शुरू होने के बाद अमेरिका ने अस्पतालों में कोरोना वायरस के इलाज पर 2.18 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

अस्पताल में भर्ती हर मरीज का औसत खर्च 17 लाख रुपए आया। बीमा कंपनियों द्वारा अलग-अलग कारण बताकर बिल रद्द कर दिए जाते हैं। शुभम चंद्रा को अपने पिता के सैकड़ों मेडिकल बिलों के पैसे का इंतजाम करने के लिए न्यूयॉर्क में अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी है।

उनके पिता की अस्पताल में सात माह भर्ती रहने के बाद मौत हो गई। उनके पिता के दो करोड़ रुपए से अधिक के 97 बिल बीमा कंपनी ने नामंजूर कर दिए हैं।

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