प्रोपेगंडा फैलाने का माध्यम बना सोशल मीडिया:यहूदियों और अश्वेतों के खिलाफ घृणा फैलाने की मुहिम पर कोई रोक नहीं

2 महीने पहले
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  • सोशल मीडिया प्लेटफार्म यहूदियों और अश्वेतों के खिलाफ आक्रामक पोस्ट पर निगरानी करने में विफल

दो रिपोर्ट में बताया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म यहूदियों और अश्वेतों के खिलाफ आक्रामक पोस्ट पर निगरानी करने में विफल रहे हैं। इंस्टाग्राम पर मध्ययुग की एक पेंटिंग पर लिखे शब्दों में कहा गया है कि बच्चों की मौत के लिए यहूदी जिम्मेदार हैं।

टि्वटर पर विश्व के नेताओं की फोटो शॉप इमेज के ऊपर हैशटैग#यहूदी वर्ल्ड ऑर्डर लिखा है। यूट्यूब पर जलते वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के वीडियो की पृष्ठभूमि में कहा जा रहा है कि सेंटर पर बीस साल पहले हुए आतंकवादी हमले के लिए यहूदी दोषी हैं। ये सब उदाहरण सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा प्रतिबंधित यहूदी विरोधी कंटेंट के हैं।

स्वयंसेवी संगठन काउंटरिंग डिजिटल हेट सेंटर द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों को इनकी जानकारी देने के बाद भी कंटेंट बना हुआ है। कंपनियों ने छह में से केवल एक शिकायत पर कार्रवाई की है। एंटी डिफेमेशन लीग की रिपोर्ट में भी यह जानकारी दी गई है।

सेंटर का कहना है, अपने ही नियमों को लागू करने में नाकामी की वजह से फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म रंगभेद, नस्लवाद और यहूदियों के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने के लिए सुरक्षित स्थान बन गए हैं। आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के मामले में फेसबुक और टि्वटर सबसे अधिक पीछे हैं।

एंटी डिफेमेशमन लीग के प्रमुख अधिकारी जोनाथन ग्रीनब्लाट कहते हैं, ये कंपनियां नफरत, रंगभेद, झूठ फैलाने और प्रताड़ित करने वाला कंटेंट अपने प्लेटफार्म पर बनाए रखती हैं क्योंकि यह उनके कुछ यूजर पसंद करते हैं।

पिछले साल माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व फाउंडर बिल गेट्स दक्षिणपंथियों के निशाने पर रहे। यूट्यूब, फेसबुक और टि्वटर पर पोस्ट में उन्हें कोविड-19 फैलाने वाला मुख्य षडयंत्रकारी और वायरस की वैक्सीन से मुनाफा कमाने वाला बताया गया।

इस झूठ के बाद यह भी बताया गया कि गेट्स की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से सांठगांठ है। मीडिया कंपनी जिगनल लैब्स की रिसर्च के अनुसार जून 2020 से जून 2021 तक गेट्स के चीन सरकार से संबंधों का एक लाख मर्तबा जिक्र किया गया। गेट्स के संबंध में जलवायु परिवर्तन पर भी झूठे दावे किए गए।

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