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लाइफ मैनेजमेंट:एक फ़ैसला जिसमें हम सभी के लिए छिपे हुए हैं सबक

डॉ. उज्ज्वल पाटनीएक महीने पहले
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तस्वीर प्रतीकात्मक है। - Dainik Bhaskar
तस्वीर प्रतीकात्मक है।

जब मैंने इस कहानी को सुना तो भीतर तक हिल गया। इसे न्यायपालिका के इतिहास के शानदार फैसलों में एक माना गया है। आज तक जब-जब मैंने यह कहानी सुनाई, लोगों की आंखों से टप-टप आंसू गिरे हैं। कोरोना की मार से जूझ रही इंसानियत पर जमी धूल को हटाने के लिए आज मैं फिर आपको यह कहानी सुना रहा हूं।

स्विट्ज़रलैंड में एक पंद्रह साल का लड़का एक जनरल स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। स्टोर के वकील ने कोर्ट से बड़ी सजा की मांग की ताकि वह लड़का भविष्य में चोरी से डरे।

जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा, ‘तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था?’ लड़के ने नज़रें नीची करके जवाब दिया - हां, ब्रैड और पनीर का पैकेट। तेज भूख लगी थी और मेरे पास पैसे भी नहीं थे।

जज - तुम कुछ काम क्यों नहीं करते?

लड़का - करता था एक कार वॉश में। मां की देखभाल के लिए एक दिन अचानक घर पर रुकना पड़ गया तो मुझे नौकरी से निकाल दिया गया।

जज - घर वालों से पैसे ले लेते।

लड़का - घर में सिर्फ बीमार मां हैं। मां को पता लग जाता कि नौकरी से निकाल दिया गया तो टूट जाती।

जज - तुम किसी और से मदद मांग लेते।

लड़का - सुबह घर से निकला तो तकरीबन पचास लोगों के पास गया। सबने मना कर दिया तो मजबूरी में चोरी करनी पड़ी।

जिरह ख़त्म हुई। जज ने फैसला सुनाना शुरू किया- ब्रैड की चोरी बहुत शर्मनाक जुर्म है और इस जुर्म के लिए हम सब ज़िम्मेदार हैं। आज हमारे देश के लिए एक तरह से शर्म का दिन है। इसने जितने भी लोगों से मदद मांगी, उनमें से हर एक पर 50 डॉलर का जुर्माना लगाया जाता है क्योंकि उन्होंने इस नन्हे बच्चे को ब्रेड के लिए मना करके मानवता को शर्मसार किया। स्टोर के वकील पर 100 डॉलर का जुर्माना लगाया जाता है क्योंकि इस भूखे बच्चे को खाना खिलाने की जगह वह उसका केस यहां लेकर आया और उसके लिए बड़ी सजा की मांग की। स्टोर पर एक हज़ार डॉलर का जुर्माना लगाया जाता है क्योंकि उसने एक भूखे बच्चे की कहानी जान कर भी ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए उसे पुलिस के हवाले किया। स्टोर को इस बच्चे को नौकरी भी देनी होगी। अगर चौबीस घंटे के भीतर जुर्माना जमा नहीं किया तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।

जज यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा - यहां मौजूद हर शख्स पर दस-दस डॉलर का जुर्माना लगाया जाता है क्योंकि हम सबने यह निर्मम समाज बनाया है। दस डॉलर दिए बग़ैर कोई भी यहां से बाहर नहीं निकल सकेगा। यह कहकर जज ने दस डॉलर अपनी जेब से बाहर निकालकर रख दिए। जुर्माने की पूरी राशि उस लड़के को देने का हुक्म भी सुनाया।

फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों की आंखों से आंसू बरसने लगे थे। वह लड़का बार-बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गए।

क्या हमारी अदालतें, समाज, सिस्टम इस तरह के निर्णय देने और स्वीकारने के लिए तैयार हैं?

यदि आपके आसपास के लोग बेहद तकलीफों में जी रहे हैं तो आपकी संपन्नता का कोई अर्थ नहीं है। आपके नोट महज कागज हैं, जेवरात पत्थर। आप कम कमाओ या ज्यादा, अपनी आय के कुछ हिस्से से मदद करना शुरू करें। दूसरों की मदद के लिए बुढ़ापे की प्रतीक्षा नहीं करना क्योंकि ज़िंदगी की एक दिन की भी गारंटी नहीं है। जिनके पास सिस्टम की पावर है, उन्हें अपनी पावर का उपयोग उन लोगों की भलाई में करना चाहिए, जिन पर कोई ध्यान नहीं देता।

(डॉ. उज्ज्वल पाटनी मोटिवेशनल स्पीकर, ऑथर और बिजनेसजीतो के फाउंडर हैं।)

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