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रसरंग में टॉकिंग पाइंट:क्या माधुरी दीक्षित एक राजनेता भी बन सकती थीं?

भावना सोमाया4 दिन पहले
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माधुरी दीक्षित अपनी पहली फिल्� - Dainik Bhaskar
माधुरी दीक्षित अपनी पहली फिल्�

काफी लंबे अरसे से मीडिया मई के महीने को 'माधुरी मैजिक' के रूप में समर्पित करते आया है, क्योंकि इसी माह में माधुरी दीक्षित का जन्मदिवस भी होता है। उनकी समकालीन अन्य एक्ट्रेस जैसे श्रीदेवी अब इस दुनिया में नहीं हैं। जूही चावला कमोबेश फिल्म लाइन से बाहर हैं। लेकिन माधुरी दीक्षित ने शादी करने, मां बनने और एक पूरी नई पीढ़ी के आ जाने के बावजूद अब भी अपना वजूद कायम रखा हुआ है।

साल 1999 में जब उनकी शादी हुई तो फिल्म बिरादरी इस बात को लेकर बहुत दुविधा में थी कि एक एनआरआई के साथ शादी करने के बाद वे घर और अपने कॅरिअर के बीच संतुलन कैसे बनाकर रखेंगी। लेकिन उन्होंने इसे बहुत ही सहजता से कर दिखाया और मनोरंजन की दुनिया में अपनी उपस्थिति को फिर से जीवित कर दिया।

पिछले कुछ दशकों में बहुत कुछ बदला है और बहुत कुछ वैसा भी रहा है। माधुरी दीक्षित एक ही घर में तीन पीढ़ियों के साथ रहती हैं- अपनी मां स्नेहलता दीक्षित, पति डॉ. नेने और दो बेटों के साथ। कई फिल्में और वेब प्रोजेक्ट उनके सामने लाइन लगाए खड़े हैं। टीवी पर उनका डांस शो और यूट्यूब पर डांस अकादमी उनकी सक्रियता के जीते-जागते प्रमाण हैं।

मैंने एक बार उनसे पूछा था कि आप लोगों के सामने भी अपने आत्मविश्वास को कैसे बनाए रखती हैं? उन्होंने हंसते हुए कहा था - "जब मैं मंच पर होती हूं, तो मैं भी चिंतित हो जाती हूंं। लेकिन फिर मुस्कुराती हूं और चूंकि मैं एक अच्छी एक्टर हूं तो लोग मेरी मुस्कान पर विश्वास कर लेते हैं।'

क्या आप अपने भाषणों का पूर्वाभ्यास करती हैं? "नहीं, भाषणों को स्क्रिप्ट नहीं किया जा सकता। ऐसे भाषण तो बहुत ही खोखले होंगे। ये तो स्वत:स्फूर्त होने चाहिए, सीधे दिल से निकले हुए। तभी ये दर्शकों को छू सकते हैं।' वे हमेशा तार्किक रहीं। पुराने लोगों का मानना था कि उनके पास एक प्रभावी नेता बनने की पूरी क्षमता थी। इस बारे में माधुरी क्या सोचती हैं? यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'क्या आप राजनीति की ओर इशारा कर रही हैं? नहीं, नहीं, मेरा राजनीति की ओर बिल्कुल भी रुझान नहीं है।"

वे अपनी बात पर बिल्कुल अडिग रहीं। माधुरी को समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा कई तरह के प्रस्ताव भी दिए गए। लेकिन उन्होंने सारे प्रस्ताव ठुकरा दिए। वे मनोरंजन की दुनिया में ही रहीं और मां बनने के बाद भी सभी फिल्म निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद बनी रहीं। उनके आलोचकों का कहना रहा कि माधुरी हमेशा कूटनीतिक रहीं। वे हमेशा अपने निर्देशकों की हां में हां मिलाती रहीं और इसीलिए हमेशा पहली पसंद रहीं। माधुरी इसका जोरदार खंडन करते हुए कहती हैं, "यह बिल्कुल सच नहीं है। जब मैं किसी दृश्य को लेकर असहमत होती हूं तो अपनी बात हमेशा रखती हूं। लेकिन अगर फिल्म निर्देशक मेरी आपत्ति से सहमत नहीं है तो मैं फिर निर्णय उसी पर छोड़ देती हूं, क्योंकि आखिर जहाज का कप्तान भी तो वही है। मैं जानती हूं कि वह जहाज को किनारे लगा ही देगा।'

'मैं भाग्य में विश्वास करती हूं...'

महामारी के पहले एक इलेवेटर में मेरी अचानक माधुरी दीक्षित से मुलाकात हो गई। हम दोनों एक ही स्क्रीनिंग के लिए जा रहे थे। वे मेरी ओर देखकर धीमे से मुस्कुराईं। मैं भी उनकी ओर देखकर मुस्कुराई। मैंने उनसे पूछा, क्या वे अपनी शादी और फिल्मों की यात्रा से संतुष्ट हैं? इस पर माधुरी ने अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ कहा, 'समय अच्छा हो या बुरा, मैं हमेशा रचनात्मक रही हूं।'

पैसे के बारे में क्या ख्याल है, क्योंकि हर कोई आपकी तरह भाग्यशाली नहीं हैं? इस बारे में माधुरी का कहना था, "मैं पैसे को लेकर इतनी जुनूनी नहीं हूं। यह बात सही है कि पैसा महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से महिलाओं को सुरक्षा देता है। यह सिर के ऊपर एक छत प्रदान करता है, आपको आजादी देता है, लेकिन एक सीमा तक ही। उसके बाद यह सिर्फ कागज के टुकड़े हैं। मैं भाग्य में िवश्वास करती हूं। मैं मानती हूं कि जीवन में जो कुछ भी होता है, उसका एक अर्थ होता है।"

- भावना सोमाया , जानी-मानी फिल्म लेखिका, समीक्षक और इतिहासकार

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