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मायथोलॉजी:किन कमियों के कारण अर्जुन को जाना पड़ा था नर्क?

6 दिन पहलेलेखक: देवदत्त पटनायक
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कर्नाटक के हलेबिडू स्थित होयसलेश्वर मंदिर में मछली की आंख का भेदन करती अर्जुन की प्रतिमा। यह मंदिर करीब 800 साल पुराना माना जाता है। - Dainik Bhaskar
कर्नाटक के हलेबिडू स्थित होयसलेश्वर मंदिर में मछली की आंख का भेदन करती अर्जुन की प्रतिमा। यह मंदिर करीब 800 साल पुराना माना जाता है।

आम तौर पर अर्जुन को महाभारत का नायक माना जाता है। गीता में कृष्ण अर्जुन को सब्यसाची (वह जो समान निपुणता से दाएं और बाएं दोनों हाथों का इस्तेमाल कर सकता है) और धनंजय (समृद्धि का निर्माण करने वाला) जैसे शानदार नामों से संबोधित करते हैं। लेकिन स्वयं महाभारत अर्जुन की इतनी प्रशंसा नहीं करता। ये रहे महाभारत के कुछ ऐसे क्षण जहां अर्जुन कमजोर पड़े :

- एकलव्य नामक युवक के तीरंदाजी में कौशल से अर्जुन बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्हें शांत करने के लिए उनके गुरु द्रोणाचार्य छल से एकलव्य को ‘दक्षिणा’ में अपना दाहिना अंगूठा काटकर देने को मजबूर करते हैं।

- कर्ण के तीरंदाज़ी के कौशल से अर्जुन इतना क्रोधित होते हैं कि वे हमेशा कर्ण को ‘सूतपुत्र’ (सारथी का पुत्र) कहकर उनका मज़ाक उड़ाते हैं।

- अर्जुन पत्नी द्रौपदी को तीरंदाज़ी की स्पर्धा में अपने लिए जीतते हैं, लेकिन मां कुंती के कहने पर वे उसे भाइयों के साथ बांटने में संकोच नहीं करते।

- दूर देशों के सफ़र में अर्जुन चित्रांगदा जैसी स्त्रियों से विवाह करते हैं। लेकिन अपनी पहली पत्नी द्रौपदी के डर की वजह से अर्जुन दूसरी पत्नियों को घर लाने की हिम्मत नहीं करते। लेकिन स्वयं कृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह कर उसे घर ले आने के लिए उन्हें कृष्ण का थोड़ा-सा प्रोत्साहन ही काफ़ी होता है। हालांकि इसके बावजूद वे सुभद्रा को द्रौपदी से मिलाने का साहस नहीं रखते।

- जब अर्जुन के बड़े भाई युधिष्ठिर कौरवों के साथ जुए में अपना राज्य और द्रौपदी को भी दांव पर लगा देते हैं तब अर्जुन उन्हें रोक नहीं पाते।

- जुआ खेलते वक़्त जब कौरव द्रौपदी का चीरहरण करने की कोशिश करते हैं, तब अर्जुन नहीं, बल्कि कृष्ण द्रौपदी की मदद करते हैं।

- जब पांडव दासों के भेस में मत्स्य राज्य में एक साल बिताते हैं, तब अर्जुन द्रौपदी को कीचक के यौन उत्पीड़न से सुरक्षित रखने से इनकार कर देेते हैं।

- किन्नर नर्तक बृहन्नला के भेस में अर्जुन संपूर्ण कौरव सेना को अकेले ही हराते हैं और मत्स्य के राज्य व उसके राजकुमार उत्तर को बचाते हैं। लेकिन कुरुक्षेत्र के युद्ध में वे ऐसा नहीं कर पाते।

- कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू होने के पहले वे हिम्मत हार जाते हैं। अंतत: कृष्ण को उन्हें गीता का ज्ञान देने का मौका मिलता है। हालांकि वे दोनों पहले से मित्र थे, लेकिन इससे पहले कृष्ण ने अपने विचार अर्जुन को नहीं बताए थे, क्योंकि अर्जुन ज्ञान प्राप्त करने के लिए तैयार नहीं थे।

- गीता सुनने के बाद भी अर्जुन भीष्म, जयद्रथ, कर्ण को तब तक मार नहीं पाते, जब तक कृष्ण अपने ज्ञान या अपनी युक्ति का इस्तेमाल कर उनकी मदद नहीं करते।

- कुरुक्षेत्र के युद्ध में वे एक भी कौरव का वध नहीं करते, भीम ही सभी कौरवों को मारते हैं। युद्ध के बीच जब युधिष्ठिर अर्जुन के गाण्डीव का अपमान कर बैठते हैं, तब उनका अपने बड़े भाई के साथ झगड़ा होता है। तब कृष्ण को दोनों के बीच सुलह करनी पड़ती है।

निधन के बाद अर्जुन को नर्क में जगह मिलती है, क्योंकि वे घमंडी रहे और दूसरे तीरंदाज़ों को तुच्छ समझते रहे।

(देवदत्त पटनायक प्राचीन भारतीय धर्मशास्त्रों के आख्यानकर्ता और लेखक हैं।)

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