रसरंग में कवर स्टोरी:अंटार्कटिका से ऑस्ट्रेलिया तक... 3 दिन में घूमे 7 महाद्वीप !

निमेश शर्मा13 दिन पहले
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यात्रा की शुरुआत के समय किंग जॉर्ज आइलैंड, अंटार्कटिका में डॉ. अली ईरानी और सुजॉय मित्रा। - Dainik Bhaskar
यात्रा की शुरुआत के समय किंग जॉर्ज आइलैंड, अंटार्कटिका में डॉ. अली ईरानी और सुजॉय मित्रा।
  • दो भारतीयों डॉ. अली ईरानी और सुजॉय मित्रा ने सात महाद्वीपों की यात्रा मात्र 73 घंटों में पूरी की है। यह एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है... भास्कर से बातचीत में दोनों ने अपनी यात्रा को इस तरह बयां किया। पढ़िए असंभव-सी लगने वाली यात्रा का रोमांच...

दुनिया को नापने की कोशिशें यूं तो इब्नेबतूता के जमाने से होती आ रही हैं। दुनिया कितनी बड़ी है? पूरी दुनिया का कम से कम कितने समय में चक्कर लगाया जा सकता है, वो भी सातों महाद्वीपों से गुजरकर? यह सवाल आदिकाल से ही, जब यह भी नहीं पता था कि दुनिया में सात महाद्वीप हैं, तभी से इंसान के दिमाग में रह-रहकर उठता रहा है। दुनिया की थाह पाने की कोशिश करना ही वो वजह थी, जिसने कोलंबस को भी भारत के भ्रम में अमेरिका पहुंचा दिया। पेशे से फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अली ईरानी और ट्रैवलर सुजॉय मित्रा ने हाल ही में 73 घंटे, 5 मिनट और 4 सेकंड (करीब तीन दिन) में सातों महाद्वीप घूमने का रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले का रिकॉर्ड 86 घंटे 14 मिनट का था, जिसे यूएई की डॉ. ख्वाला अल रोमेथी ने 2020 में बनाया था। डॉ. अली और सुजॉय ने बताया- रिकार्ड प्रमाणित हो सके, इसलिए जेब में जीपीएस डिवाइस रखना जरूरी था। इतना ही नहीं, गिनीज बुक की शर्त यह भी थी कि हर महाद्वीप में एक स्मारक की यात्रा जरूर की जाए, वो भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए। हमसे कहा गया...जहां जाएं, वहां गवाही के लिए दो लोगों के हस्ताक्षर जरूर करवाएं। बता दें...गिनीज प्रोटोकॉल के तहत विटनेस के हस्ताक्षर जरूरी हैं। हम जहां भी जाते, सबसे पहले हस्ताक्षर के लिए लोगों को समझाना पड़ता। चूंकि, लोग जानकारियां साझा नहीं करना चाहते...ऐसे में हस्ताक्षर करने से मना कर देते। हम पूरी कहानी सुनाते...तब जाकर कहीं-कहीं कोई कहता- लाओ बताओ...कहां करने हैं साइन। सुजॉय ने बताया- सिर्फ यही नहीं, हर 24 घंटे में दस मिनट का वीडियो बनाकर भी गिनीज बुक को भेजना पड़ता था। हमारी यात्रा की शुरुआत अंटार्कटिका के किंग जार्ज आइलैंड से हुई। यहां से होते हुए हम साउथ अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, नॉर्थ अमेरिका और ओशिनिया (ऑस्ट्रेलिया) से होकर गुजरे। यात्रा का अंत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुआ। बहरहाल, रिकॉर्ड के लिए तो अली और सुजॉय की यह विश्व यात्रा करीब 24 हजार मील की थी। हालांकि यात्रा के शुरुआती केन्द्र यानी अंटार्कटिका और यात्रा की समाप्ति के बाद भारत लौटने की वजह से अली और मित्रा को करीब दाेगुना ट्रैवल करना पड़ा। यानी तीन दिन में रिकॉर्ड...कुल आठ दिन यात्राओं में खर्च हुए। रिकॉर्ड बनाने के लिए अलग-अलग समय में नौ फ्लाइट्स ली गईं। सुजॉय कहते हैं कि गिनीज का नियम है कि यात्राएं शेड्यूल फ्लाइट्स से ही होनी चाहिए। इसमें चार्टर प्लेन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए इस यात्रा के लिए सबसे जरूरी तैयारी यह भी थी कि तय सीमा में ही इमिग्रेशन, वीजा से जुड़ी अनिवार्यताएं पूरी कर ली जाएं। अलग-अलग देशों के नियमों के हिसाब से इस पूरी प्रक्रिया की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर दी गई थी।

चार बार यात्रा का रूट बदला

- डॉ. अली ने बताया, अगर कोविड न आया होता तो...यह रिकॉर्ड शायद दो साल पहले बन चुका होता, पहले तो कोविड की वजह से अंटार्कटिका क्रूज कैंसल हो गया। इसके बाद एलिटेलिया एयरलाइंस के जरिए हमें रोम से होकर गुजरना था...लेकिन एन वक्त से पहले एयरलाइन दिवालिया हो गई। टिकट के जो पैसे थे...वो भी इसी के साथ डूब गए। किसी जमाने में एलिटेलिया इटली की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी हुआ करती थी।

- एक साल बाद हम लोगों ने फिर से रिकॉर्ड बनाने की सोची, लेकिन वीजा का मामला फंस गया। हमें नॉर्थ अमेरिका के किसी एक देश से होकर गुजरना था। लेकिन वीजा नहीं मिल रहा था। मैक्सिको वीजा दे नहीं रहा था और अमेरिका तो एप्लीकेशन तक नहीं ले रहा था। इसी तरह कनाडा में वीजा के लिए पांच महीने की वेटिंग थी। शेंगन देशों में भी वीजा के लिए चार-पांच महीनों तक इंतजार करना पड़ा। शेंगन देश 27 यूरोपियन देशों का वह समूह है, जिन्होंने अपने इंटरनल बॉर्डर्स खत्म कर लिए हैं।

- भविष्य में और कहां जाएंगे? कैसा रिकॉर्ड बनाएंगे? यह पूछने पर डॉ. अली ने कहा- कोई ना कोई रिकॉर्ड तो तोड़ने की तैयारी करेंगे ही। वहीं अब तक 178 देश घूम चुके सुजॉय कहते हैं कि अगले तीन महीनों में उनका यह आंकड़ा 198 देशों का हो जाएगा।

गिनीज बुक... एक झगड़े के बाद रिकॉर्ड बुक बनाने का आइडिया आया था

गिनीज बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स के आज लंदन, न्यूयॉर्क, बीजिंग, टोक्यो और दुबई में दफ्तर हैं। इसकी शुरुआत 1954 में ह्यूज बीवर (ब्रिटिश-अफ्रीकन नागरिक) ने की थी। गिनीज बुक का आइडिया एक पब में हुए झगड़े के बाद आया था। झगड़ा इस बात को लेकर शुरू हुआ था कि यूरोप में सबसे तेज उड़ने वाला जंगली पक्षी कौन-सा है। चूंकि, उस समय तक कोई रेफरेंस बुक नहीं थी। ऐसे में बीवर ने दो जुड़वां भाइयों नॉरिस और रॉस को बुक ऑफ फैक्ट्स तैयार करने को कहा। इसका शुरुआती दफ्तर दो कमरों के एक जिम्नेजियम से शुरू हुआ था। जब किताब बनकर आई तो इसे नाम मिला- गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स।

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