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रसरंग में कवर स्टोरी:कैसे चढ़ रहा है कला का बाजार

अजीत कुमार4 दिन पहले
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हाल ही में एक डिजिटल पेंटिंग के 516 करोड़ रुपए में बिकने की घटना ने कलाकारों और निवेशकों दोनों को अचरज में डाल दिया है। कला के बाजार से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करती इस बार की कवर स्टोरी...

हाल ही में आई खबर हर किसी के लिए चौकाने वाली थी। खबर के अनुसार दो भारतीयों विग्नेश सुंदरासन और आनंद वेंकटेश्वरन ने 6.93 करोड़ डॉलर (516 करोड़ रुपए) का एक डिजिटल कोलॉज खरीदा है। यह कोलॉज बिपल नामक एक डिजिटल आर्टिस्ट ने बनाया था। विग्नेश और आनंद दोनों कोई कला के पुजारी नहीं हैं, बल्कि शुद्ध निवेशक हैं। कला का बाजार एकदम नई चीज नहीं है, लेकिन इस घटना ने सभी का ध्यान तेजी से बढ़ते इस ट्रेंड की ओर खींचा है। इन दोनों ने जो पीस खरीदा है, उसे तकनीकी तौर पर एनएफटी यानी नॉन फंजीबल टोकन कहते हैं। यह कुछ-कुछ वैसा ही है, जैसा क्रिप्टोकरेंसी में होता है।

जाहिर सी बात है, बदलती दुनिया में कला अब केवल आपके ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने की चीज नहीं रह गई है। कलाकृतियों में निवेश, चाहे फिर वे मूर्त रूप में हो या डिजिटल रूप में, का ट्रेंड चल पड़ा है। सोना, बांड्स, इक्विटी की तरह ही अब पेंटिंग्स, मूर्तियां और डिजिटल आर्ट भी निवेश का पोर्टफोलियो मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं।

क्या यह शेयर बाजार से जुड़ा है?

कला में निवेश का शेयर बाजार से कोई लेना-देना नहीं होता। शेयर बाजार कई कारकों से संचालित होता है। हो सकता है किसी वजह से शेयरों में किया गया आपका निवेश औंधे मुंह गिर जाए, लेकिन कला में किया गया निवेश इससे अप्रभावित रहता है। यह आर्ट गैलरीज के द्वारा संचालित होता है।

क्या कोई भी कर सकता है निवेश?

हां, लेकिन कला में निवेश वही लोग करते हैं जिनके पास निवेश के लिए अतिरिक्त पैसा होता है या जिन्हें तत्काल लिक्विड की जरूरत नहीं होती। इसका कारण यह है कि आवश्यकता पड़ने पर आप इसे तत्काल नकदी में नहीं बदल सकते। उसके लिए आपको उचित खरीदार की प्रतीक्षा करनी होगी। कई कला निवेशक तो यह निवेश आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखकर करते हैं। इसीलिए इसे दीर्घकालिक निवेश माना जाता है।

किश्तों में भी निवेश संभव है?

कलाकृतियां तो बहुत महंगी होती है। तो इनमें एक सामान्य व्यक्ति कैसे निवेश कर सकता है? यदि आप कला में निवेश करना चाहते हैं और आपके पास एकमुश्त बहुत सारा पैसा नहीं है तो भी आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। दुनिया की कई जानी-मानी गैलरीज अब अपना आर्ट वर्क आसान किश्तों पर भी देती हैं। यानी टेलीविजन या रेफ्रीजरेटर की तरह कलाकृतियों को किश्तों में भी खरीद सकते हैं।

क्या साझेदारी में निवेश संभव है?

मास्टरवर्क्स जैसी वेबसाइट अरबों डॉलर मूल्य वाली पेंटिंग में आंशिक निवेश की सुविधा देती हैं। ऐसी वेबसाइटों पर आप अन्य निवेशकों के साथ मिलकर किसी उच्च मूल्य वाली कलाकृति में निवेश करते हैं और उसका रिटर्न सभी में बांट दिया जाता है। वेबसाइट पर आप कला निवेश पर मिलने वाले रिटर्न के रुझान भी देख सकते हैं। सातची और मैसेनास आदि भी ऐसी ही वेबसाइट हैं जहां आप कलाकृतियों में आंशिक निवेश कर सकते हैं। समझने के लिए मान सकते हैं कि यह कुछ-कुछ म्यूचुअल फंड्स जैसा होता है।

कलाकार के कॅरियर से है नाता?

किसी भी निवेश की सफलता इस बात में है कि भविष्य में उसके मूल्य में वृद्धि हो। यह एक सामान्य सिद्धांत है। जैसे किसी कंपनी की सफलता के साथ ही शेयरों और बॉन्ड्स का मूल्य बढ़ता है, वैसे ही आपने जिस कलाकार की कलाकृति में निवेश किया है, यदि भविष्य में उसका करियर जोर पकड़ता है तो आपकी कलाकृति की कीमत भी बढ़ेगी।

महामारी के बीच आर्ट का बाज़ार गुलज़ार...

सितंबर 2020 में एक तरफ कोविड के कारण पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ था, उसी दौरान 25 सितंबर 2020 को न्यूयॉर्क के क्रिस्ट्रीज नीलामीघर में कलाकृतियों की नीलामी रखी गई। कुल नीलामी हुई 8.28 करोड़ डॉलर (करीब 617 करोड़ रुपए) की। यह एक साल पहले की तुलना में 100 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी थी। इस ऑनलाइन नीलामी में 41 देशों के कला निवेशकों ने भाग लिया था।

करोड़ों में बिकती हैं भारतीय कलाकारों की पेंटिंग्स

- साल 1961 में वीएस गायतोंडे द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग इसी साल 11 मार्च को हुई एक नीलामी में 39.98 करोड़ रुपए में बिकी है। यह अब तक का भारतीय पेंटिंग्स की नीलामी का रिकॉर्ड है। पिछले साल गायतोंडे द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग 32 करोड़ रुपए में नीलाम की गई थी।

- सैयद हैदर रजा द्वारा 1972 में बनाई गई पेंटिंग 'तपोवन' को 2018 में न्यूयॉर्क में क्रिस्टीज निलामी घर ने 29.04 करोड़ रुपए में बेचा था। यह उस समय विश्व रिकॉर्ड था।

- सितंबर 2020 में भूपेन खाकहार द्वारा 1971 में चित्रित रेड फोर्ट पोर्ट्रेट को 19.17 करोड़ रुपए में नीलाम किया गया था।

- 2015 में न्यूयॉर्क की नीलामी में अमृता शेर-गिल की द लिटिल गर्ल इन ब्लू को 18.6 करोड़ रुपए में नीलाम किया गया था।
48 करोड़ रु. की मूर्ति

साल 2020 में गांधारी शैली की एक प्राचीन मूर्ति 'बुद्ध शाक्यमुनि' को क्रिस्टीज नीलामी घ ने 48.3 करोड़ रुपए में बेचा था। यह किसी कलाकृति की नीलामी का एक विश्व रिकॉर्ड है।

कौन हैं बीपल?

इनका असली नाम है माइक विंकलमैन। 39 वर्षीय विंकलमैन अमेरिकी हैं जो हाल ही में 516 करोड़ रुपए में अपने डिजिटल कोलॉज की नीलामी के कारण चर्चा में आए हैं। कम्यूटर साइंस में ग्रेजुएट विंकलमैन पिछले डेढ़ दशक से डिजिटल पेंटिंग्स बना रहे हैं। उनका यह पीस पिछले 13 साल में उनके द्वारा बनाई गई 5000 डिलिटल पेंटिंग्स का कोलॉज है।

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प्रयाग शुक्ल, जाने-माने कला समीक्षक

करोड़ों में क्यों होती हैं कुछ पेंटिंग्स की कीमत?

यह सवाल कई लोगों के मन में उठता है कि कुछ कलाकृतियां करोड़ों-अरबों रुपए तक में कैसे बिक जाती हैं? आखिर ऐसा क्या होता है कि कोई कलाकृति इतनी मूल्यवान बन जाती है? इसका एक कारण तो यह है कि जो कृति किसी कलाकार ने एक बार बना दी है, ठीक वैसी ही फिर नहीं बनेगी और जब वह कलाकार इस दुनिया में नहीं रहेगा/रहेगी, तो ‘उस जैसी’ कृति की भी संभावना वैसे भी समाप्त हो जाएगी। कृतियों की कीमत समय के साथ बढ़ती रहती है। मुझे दिल्ली की एक गैलरी में कुछ वर्ष पहले एक महिला मिली थी, जिन्होंने बताया था कि मकबूल फ़िदा हुसैन की एक पेंटिंग उन्होंने बारह सौ रुपए में खरीदी थी और कई वर्षों बाद उसे बेचने पर उन्हें तीन करोड़ मिले थे।

आखिरकार ये कीमतें तय कैसे होती हैं? जाहिर है कि सबसे पहले तो उसे कला-समाज ही तय करता है कि अमुक कलाकार ‘अच्छा’ या ‘बहुत अच्छा’ है, उसके जैसा और कोई दूसरा नहीं। और यह ‘कला समाज’ बनता किनसे है? स्वयं कलाकारों, कला-समीक्षकों, गैलरियों, संग्रहालयों, कला-संग्राहकों, पारखियों, नीलामी-घरों आदि से। इस मूल्यांकन में कभी-कभी बहुत देर भी हो जाती है, जैसी कि वान गॉग के मामले में हुई। उनके भाई थियो मानते थे कि वान गॉग एक ‘बहुत बड़ा कलाकार’ है, पर तब का कला समाज नहीं। धीरे-धीरे उसमें भूल-सुधार हुआ और अब वान गॉग की चित्राकृति ‘सनफ्लॉवर’ दुनिया की सबसे महंगी पेंटिंग्स में से एक है।

किसी कलाकृति का बहुत अच्छा होना, असाधारण होना, उसका पुराना होना और उसका लगातार गुणगान होना भी उसकी कीमतों में बढ़ोतरी करते हैं। किसी कलाकार की जो पेंटिंग अभी करोड़ों में बिकी है, वह पहले लाखों में खरीदी गई होगी। हो सकता है कि अब जिसके पास गई है, वह उसे कुछ वर्षों बाद और बड़ी कीमत में बेचने का अवसर पा जाए! हां, यहां पैसा उसे ही मिलता है, जिसके पास अमुक कलाकृति होती है। जिसने बनाई है, उसे तो एक बार कृति को बेच देने के बाद फिर कोई राशि नहीं मिलती। लोग ऐसे कलाकारों की खोज में रहते हैं, जो अभी युवा हैं, पर भविष्य में उनसे उम्मीद की जा सकती हैं।

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