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रसरंग में होम इंटीरियर:घर के इंटीरियर में कितना मायने रखती है लाइटिंग?

कीर्ति श्रीवास्तव9 दिन पहले
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लाइटिंग घर में केवल रोशनी करने का जरिया भर नहीं है, बल्कि यह इंटीरियर डिजाइनिंग का मुख्य हिस्सा भी होती है। एक अच्छा इंटीरियर डिजाइनर अपने प्लान में लाइटिंग को भी रखता है। हालांकि अधिकांश लोग या तो सीलिंग में लगने वाली कंसील्ड लाइटिंग के बारे में जानते हैं या फिर उनके वॉट के बारे में। लेकिन लाइटिंग के ऐसे कई आयाम हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती, जैसे कि लाइट्स के ल्यूमेन या केल्विन के बारे में। ज्यादातर लोग सिर्फ फाल्स सीलिंग में लगने वाली एलईडी लगाकर ही संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि लाइटिंग इंटीरियर या आर्किटेक्चर में कलर स्कीम भी बहुत मायने रखती है।

लाइटिंग लेयर्स :
जब आप लाइटिंग को कुछ कॉम्बिनेशन करके सेट बनाएंगे तो आपको एक ही कमरे में कई तरह के मूड के हिसाब से लाइट सेट करने की फ्लैक्सिबिलिटी मिलेगी। जैसे कि एक सेट एलईडी लाइट का हो सकता है, दूसरा सेट कुछ सीओबी लाइट्स का हो सकता है। तीसरा सेट आर्किटेक्चर लाइट्स का हो सकता है। इसमें आप लाइट के कलर्स को ध्यान में रखकर या कलर को मिक्स करके भी कुछ लाइटिंग लेयर्स प्लान कर सकते हैं। लाइटिंग डिजाइन के लिए यह मैजिक ट्रिक है।

आर्किटेक्चर लाइटिंग :
आर्किटेक्चर लाइट्स उन्हें कहा जाता है जो दीवार, बने हुए स्ट्रक्चर या फिर बनाए गए किसी भी डिजाइन या फर्नीचर के साथ प्लान की गई हो। जैसे कि किसी डोम के किनारे पर चारों तरफ लगी हुई लाइट्स, फर्नीचर में लगी हुई लाइट्स, डिजाइन में आ रहे किसी शेल्फ के अंदर लगी हुई लाइट्स या फिर आउटडोर में एलिवेशन डिजाइन की लाइट। इन्हें आप जितना डिटेल में स्मार्टली या आर्टिस्टिकली प्लान करेंगे, यह पूरे स्पेस में उतने ही शानदार इफेक्ट पैदा कर सकती है।

ल्यूमेंस और केल्विन क्यों पता होने चाहिए? लाइटिंग की तकनीक बदल गई है। अब एलईडी लाइट इस्तेमाल हो रही है, पर आज भी हम ज्यादातर चर्चा वॉट की ही करते हैं जो प्रॉपर लाइटिंग डिजाइन करने के लिए सटीक तरीका नहीं है। किसी लाइट का कलर टोन सफेद होगा, पीला होगा या कुछ नीला, यह केल्विन से पता चलता है। कोई लाइट कितनी मात्रा में लाइट देगी, इसकी जानकारी ल्यूमेंस से होती है। इसका मतलब यह है कि घर में किस तरह की लाइट्स जरूरी है, इसके लिए ल्यूमेन और केल्विन के बारे में बेसिक जानकारी होनी जरूरी है।

केल्विन : रेसिडेंशियल जगहों में उपयोग करने के लिए 2700 से 3200 केल्विन की लाइट ली जा सकती है, जो लगभग वार्म व्हाइट लाइट देगी। 3500 केल्विन के ऊपर की लाइट काफी सफेद रोशनी देगी, जो ज्यादातर कमर्शियल जगहों जैसे शोरूम या हॉस्पिटल में उपयोग की जाती है। 7000 केल्विन के ऊपर की लाइट नीलापन लिए हुए होगी या इसकी शार्पनेस या ब्राइटनेस काफी ज्यादा होगी।

ल्यूमेंस : करीब 3000 ल्यूमेंस की रोशनी रात के समय अच्छे से देखने के लिए पर्याप्त होती है। किचन के वर्किंग एरिया में करीब 7000 से 8000 ल्यूमेन लाइट होनी चाहिए। डाइनिंग एरिया में 3000 से 4000 ल्यूमेन, लिविंग एरिया में 1000 से 2000 ल्यूमेन और बेडरूम में 1000-2000 ल्यूमेन की लाइट्स लेना बेहतर होगा। हालांकि ये केवल कुछ उदाहरण भर हैं। लाइट का चयन करते वक्त कमरे का आकार या उपयोग हो रहे मटैरियल का ध्यान रखना भी जरूरी है।

- कीर्ति श्रीवास्तव, इंटीरियर डिज़ाइनर

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