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रसरंग में ट्रेवल:इम्फाल : ऐतिहासिक विरासतों से सजा खूबसूरत स्थल

उमेश पंत9 दिन पहले
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मेईती जनजाति के सर्प देवता पाखंबा का मंदिर। - Dainik Bhaskar
मेईती जनजाति के सर्प देवता पाखंबा का मंदिर।

अगर आप लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की भीड़-भाड़ से अलग शांत जगहों की यात्रा करना चाहते हैं तो पूर्वोत्तर भारत का शहर इम्फाल आपके लिए एकदम मुफ़ीद है। इम्फाल नदी के किनारे बसा यह शहर पूर्वोत्तर के सबसे व्यवस्थित शहरों में से एक है और मणिपुर राज्य की राजधानी है। कम ही लोग जानते होंगे कि यहां दूसरे विश्वयुद्ध की बेहद निर्णायक जंग लड़ी गई थी। इस युद्ध में शहीद हुए सेनानियों का स्मारक इम्फाल के ऐतिहासिक महत्व को तो बताता ही है, उस दौर में बमबारी से उजड़ चुका यह शहर दुबारा बसा और आज इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है।

कांगला फ़ोर्ट :

कांगला फ़ोर्ट में आप लकड़ी के बने एक ऊंचे खूबसूरत गेट से प्रवेश करते हैं। इस प्रवेश द्वार के भीतर जैसे मणिपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासतें आपका बाहें पसारे स्वागत करती हैं। यह किला एक दौर में मणिपुर साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। 1891 में इस क़िले को ब्रिटिश सरकार ने अपने अधीन ले लिया और आज़ादी के बाद यहां असम राइफ़ल्स मुख्यालय बना। 2004 से इस क़िले को आम जनता के लिए खोल दिया गया। करीब 238 एकड़ में फैले इस किले में 300 से ज़्यादा प्रतीक चिह्न हैं जो मणिपुर के गौरवशाली इतिहास से जुड़े हैं। यहां मणिपुर के शाही घरानों की स्मृति चिह्न देखने के साथ आप मेईती जनजाति के सर्प देवता पाखंबा के मंदिरों में घूम सकते हैं। कुछ आगे चलने पर एक संग्रहालय मिलता है, जहां शाही घराने और बर्तानिया हुकूमत से जुड़े अवशेष रखे गए हैं।

इमा कैथल :

इमा कैथल का अर्थ है माताओं द्वारा चलाया जाने वाला बाज़ार। क़रीब 5000 महिलाओं द्वारा संचालित होने वाले इस बाज़ार को एशिया का सबसे बड़ा महिला बाज़ार कहा जाता है। यहां की दुकानों में मणिपुर की पारंपरिक पोशाक पहनी महिलाएं मछलियों, सब्ज़ियों, मसालों, फलों से लेकर स्थानीय चाट तक का कारोबार करती नज़र आती हैं। इस बाज़ार की शुरुआत क़रीब 500 साल पहले मानी जाती है। यह बाज़ार मणिपुर में हुए ‘निपु लेन’ जैसे महिला आंदोलनों का गढ़ माना जाता है। इन महिलाओं का अपना एक संगठन भी है जो ज़रूरत पड़ने पर इन्हें लोन भी देता है।

सेंड्रा आइलैंड, लोकतक झील

इम्फाल से करीब 46 किलोमीटर का सफ़र तय करके आप एक बेहद खूबसूरत झील पर पहुंच सकते हैं। ‘सेंड्रा आइलैंड' नाम की इस जगह से आसमानी रंग की खूबसूरत लोकतक झील का विहंगम नज़ारा देखने को मिलता है। यहां हरे और पीले रंगों से सजी मोटरबोट भी हैं जिनसे आप मनोहारी लोकतक झील के सौंदर्य को और क़रीब से निहार सकते हैं। यह झील तकरीबन 300 वर्ग किलोमीटर में फैली है और मणिपुर की अकेली फ़्रेश वॉटर लेक है। इस झील में आपको हरी झाड़ियों के कई वृत्ताकार झुरमुट नज़र आते हैं जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं।

आज़ाद हिन्द फ़ौज का मुख्यालय

‘सेंड्रा आइलैंड’ से क़रीब आधे घंटे की दूरी पर मोइरांग बाज़ार है जहां बनी एक इमारत में कभी आज़ाद हिंद फ़ौज का मुख्यालय हुआ करता था। मुख्यालय के परिसर को अब एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है। यहां प्रवेश करते ही सुभाष चंद्र बोस की एक ऊंची प्रतिमा नज़र आती है। मोइरांग के इस संग्रहालय में द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानियों की ओर से शामिल आज़ाद हिंद फ़ौज से जुड़े अवशेष रखे गए हैं। इस छोटे से अहाते में आप युद्ध में इस्तेमाल हुए हथियार भी देख सकते हैं। साथ ही कुछ नक़्शे भी हैं जिनसे आज़ाद हिंद फ़ौज के यात्रा मार्ग की जानकारी मिलती है। इसके अलावा मणिपुरी राजाओं और साहित्यकारों के चित्र भी इस संग्रहालय में संजोए गए हैं।

केबुल लामझाओ, करांग आईलैंड

संग्रहालय से छह किलोमीटर का सफ़र तय करके आप केबुल लामझाऊ नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। लोकतक झील पर बने इस राष्ट्रीय उद्यान को दुनिया का सबसे बड़ा फ़्लोटिंग नेशनल पार्क का दर्जा प्राप्त है। इस पार्क के आस-पास कई छोटे-छोटे तैरते हुए और भी द्वीप हैं। इन्हीं में से एक करांग आईलैंड है। इस द्वीप से सूर्यास्त के बेहद खूबसूरत नज़ारे देखने को मिलते हैं। यहां झील में नाव की यात्रा करते हुए आप इन छोटे-छोटे द्वीपों को तैरते हुए देख सकते हैं। इन्हें स्थानीय भाषा में फुमडी कहा जाता है।

उत्तर भारत के लोग जिस तरह गंगा को पूजते हैं, ठीक उसी तरह पूर्वोत्तर की मितेई जनजाति इस झील की पूजा करती है।

कैसे पहुंचे :

आप हवाई जहाज़ से इम्फाल पहुंच सकते हैं। नज़दीकी हवाई अड्डा मुख्य शहर से आठ किलोमीटर दूर है जहां से इम्फ़ाल के लिए टैक्सी ली जा सकती है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन दीमापुर है जो यहां से क़रीब 260 किलोमीटर दूर है। दीमापुर से डीलक्स बस या शेयरिंग टैक्सी लेकर भी आप इम्फाल आ सकते हैं।

कहां रहें :

इम्फाल में रहने के लिए होटलों की कमी नहीं हैं। यहां कुछ धर्मशालाएं भी हैं, जहां सस्ते में रहने का इंतज़ाम हो सकता है। इन धर्मशालाओं में भी डीलक्स कमरे से लेकर डोर्मिट्री तक उपलब्ध हैं।

- उमेश पंत, ट्रेवलॉग राइटर, पर्यटन पर दो पुस्तकें लिख चुके हैं।

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