रसरंग में ट्रेवलॉग:केदारकांठा का रोमांचक सफ़र, अभी से करना होगा प्लान

उमेश पंत2 महीने पहले
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सांकरी गांव से खींचा गया सांकरी रैंज का शानदार दृश्य। केदारकांठा ट्रेक की शुरुआत यहीं से होती है। - Dainik Bhaskar
सांकरी गांव से खींचा गया सांकरी रैंज का शानदार दृश्य। केदारकांठा ट्रेक की शुरुआत यहीं से होती है।

प्रकृति के सौंदर्य को अपनी विराटता और विस्तार में देखने का मन हो तो केदारकांठा एक बेहतरीन विकल्प है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में 12,500 फ़ीट की ऊंचाई पर मौजूद यह चोटी देश-विदेश के घुमक्कड़ों के बीच खासी लोकप्रिय है। मनमोहक बर्फ़ीली वादियों और बर्फ़ से पटे रोमांचक रास्तों की वजह से यह भारत का सबसे मशहूर विंटर ट्रैक बन गया है। हालांकि यहां जाने के लिए आपको बुकिंग काफी पहले करवानी होगी, बल्कि अभी से प्लान करना होगा।

टोंस के किनारे ख़ूबसूरत सफ़र

देहरादून से मसूरी होते हुए टोंस और यमुना नादियों के किनारे एक खूबसूरत सड़क आपको सांकरी तक लेकर आती है। मसूरी से कुछ ही आगे बढ़ने पर केदारनाथ, नागटिब्बा, सरस्वती रेंज और बंदरपूंछ की शृंखलाएं आपको नज़र आ जाएंगी। रास्ते में आने वाली पुरौला और तिउनी की घाटियों का सौंदर्य इस सफ़र को और मज़ेदार बना देता है। तिउनी से यमुना की जगह टोंस नदी ले लेती है। पहाड़ों के बीच बहती इस शांत नदी को देखते हुए देवदार के घने जंगलों से गुज़रती सड़क का यह सफ़र दिल खुश कर देता है।

जौनसार-बावर

केदारकांठा जाने के लिए आपको जौनसार-बावर के इलाके से गुजरना होता है। यमुना और टोंस नदियों के बीच बसे इस इलाके में जौनसारी जनजाति रहती है। यमुना पार तलहटी के इलाके को जौनसार कहते हैं और बर्फ़ से ढंके पहाड़ी इलाके को बावर कहा जाता है। जौनसार के लोग अपने को पांडवों का वंशज और बावर के लोग दुर्योधन का वंशज कहते हैं। इस इलाके के कई हिस्सों में दुर्योधन की पूजा भी की जाती है। यहां पुराने समय से बहुपति विवाह की परम्परा रही है जो आज भी कायम है। हूण वास्तुकला में बना मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है।

लाख़ामंडल

इसी इलाके के पास लाखामंडल नाम की जगह पर वर्षों पूर्व हुई खुदाई में अलग-अलग आकार के हज़ारों शिवलिंग पाए गए थे। साथ ही यहां एक अनूठा मंदिर समूह भी खोजा गया जहां कार्तिकेय, गणेश, विष्णु और हनुमान के मंदिर हैं। मान्यता है कि लाखामंडल ही वो जगह है जहां दुर्योधन ने पांडवों को मारने के लिए लाक्षाग्रह बनवाया था। अगर आप केदारकांठा जाएं तो जौनसार-बावर और लाखामंडल के इलाके की अनूठी संस्कृति और मंदिरों का अनुभव आपको ज़रूर लेना चाहिए।

गोविंद वाइल्ड लाइफ़ सेंचुरी

तिउनी से आगे नेटवार नाम की जगह पर गोविंद पशु विहार की एक चौकी आती है। यहां बाहर से आने वाले लोगों को एंट्री करानी होती है। यह सेंचुरी एक नेशनल पार्क भी है जहां विलुप्त हो रहे स्नो लैपर्ड के संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट स्नो लैपर्ड की शुरुआत हुई थी। यहां से हर की दून, ओसला, सांकरी और केदारकांठा जैसे ट्रैक शुरू होते हैं। बरासू पास, रूइनसारा ताल और बरासू खांडी जैसे मनोहारी ट्रैक भी आप यहां से कर सकते हैं। पशु विहार के बीच बसे कई गावों में एक सांकरी भी है जो शांति के पल बिताने की चाह रखने वाले पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन सैरगाह है। केदारकांठा ट्रैक की शुरुआत आपको यहीं से करनी होगी।

जूड़ा का तालाब

देवदार और चीड़ के घने जंगलों के बीच क़रीब पांच किलोमीटर की ट्रैकिंग करके आप एक खूबसूरत झील तक पहुंचते है जिसे जूड़ा का तालाब कहते हैं। यह झील समुद्रतल से 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जहां तक आते-आते आमतौर पर आपको आस-पास भरपूर बर्फ़ देखने को मिलती है। बर्फ़ से ढंकी हुई वादियों के बीच रात के वक़्त कैम्पिंग करने और अलाव जलाकर बैठने का अपना अलग ही रोमांच है। धार्मिक मान्यता है कि शिव जी ने यहां पर अपनी जटाओं को खोला और उनसे जो पानी निकला, उसी से जूड़ा का तालाब बना।

केदारकांठा की बेमिसाल चोटी

जूड़ा का तालाब से क़रीब साढ़े तीन किलोमीटर का सफ़र करके आप केदारकांठा की चोटी पर पहुंचते हैं जो समुद्रतल से 3800 मीटर की ऊंचाई पर है। इस बर्फ़ीली चोटी पर पहुंचकर जब आप चारों ओर निगाह दौड़ाते हैं तो अविश्वसनीय विस्तार आपके सामने खुलता है। यहां से हिमालय की क़रीब 13 गगनचुंबी चोटियां आपको अपने एकदम सामने दिखाई देती हैं। हिमालय की तलहटी में मौजूद यमुना और टोंस नदी घाटियों के नज़ारे आपको मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

कब जाएं ?

बरसात के दिनों में पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा रहता है इसलिए इन दिनों यहां आने से बचा जा सकता है। चाहें तो सितंबर में आप प्लान कर सकते हैं। सर्दियों में आपको रास्ते भर बहुत सारी बर्फ़ देखने को मिलेगी। जूड़ा का तालाब से आपको बर्फ़ से पटे रास्तों पर ही चलना होगा। इसलिए पूरी तैयारी के साथ आना बेहतर रहता है। वहां जाने की तैयारी अभी से कर लेंगे तो बेहतर रहेगा।

कैसे पहुंचें ?

सांकरी तक पहुंचने के लिए आप देहरादून से टैक्सी या स्थानीय बस ले सकते हैं। देहरादून से यहां पहुंचने में क़रीब 7 घंटे लगते हैं। सांकरी से एक दिन में जूड़ा का तालाब और अगले दिन केदारकांठा समिट कर आप कुल चार दिनों में सांकरी वापस लौट सकते हैं। अगर आप दिल्ली जैसी जगहों से जा रहे हैं तो इस यात्रा के लिए कम से कम छः दिन का वक़्त अपने पास ज़रूर रखें।

कहां रहें?

सांकरी में रहने के लिए आपको होटल मिल जाएंगे लेकिन आगे की यात्रा में कैंपिंग ही करनी होगी। जूड़ा का तालाब और केदारकांठा बेसकैंप में आपको रहने के लिए टैंट मिल जाएंगे जिनकी बुकिंग एडवांस में करनी होगी। गर्मियों में सामान्यतौर पर यहां 6 डिग्री से 20 डिग्री के बीच तापमान रहता है लेकिन सर्दियों में यहां पर न्यूनतम तापमान माइनस में चला जाता है।

- उमेश पंत, ट्रेवलॉग राइटर, पर्यटन पर दो पुस्तकें लिख चुके हैं।

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