रसरंग में मायथोलॉजी:मनसा देवी : शिव की तीसरी पुत्री जिन्होंने हलाहल से पिता को बचाया था

देवदत्त पटनायक6 दिन पहले
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हरियाणा के पंचकुला स्थित मनसा देवी मंदिर में स्थित देवी की भव्य प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
हरियाणा के पंचकुला स्थित मनसा देवी मंदिर में स्थित देवी की भव्य प्रतिमा।

कुछ साल पहले टीवी धारावाहिक 'देवों के देव महादेव' में अशोक सुंदरी की उपस्थिति ने कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया था। शिव के प्रसिद्ध बेटों - गणेश और कार्तिकेय - के बारे में तो सभी ने सुना ही है, लेकिन उनकी बेटियां इतनी प्रसिद्ध नहीं रही हैं।

शिव पुराण का मुख्य उद्देश्य संन्यासी से गृहस्थ जीवन में शिव के क्रमिक परिवर्तन का वर्णन करना है। इस परिवर्तन का तात्पर्य है उनका पिता बनकर पितृत्व की ज़िम्मेदारी लेना। वैरागी के रूप में शिव दुनिया से तटस्थ हैं। लेकिन शिव को संसार में सहभागी बनाने का देवी दृढ़ संकल्प करती हैं। इसमें विष्णु और अन्य सभी देवता उनकी मदद करते हैं। तमिल मंदिर विद्या में विष्णु देवी के भाई हैं और ब्रह्मा उनके पिता। सब चाहते हैं कि यह तपस्वी अपनी गृहस्थी स्थापित करें। केवल तभी विश्व को उनके ज्ञान और विशाल शक्तियों का लाभ होगा। इसलिए बच्चों का जन्म लेना भी आवश्यक है। इस प्रकार दो बेटों का जन्म होता है। दोनों लोकप्रिय बेटे मानवता की सबसे मौलिक ज़रूरतों को पूरा करते हैं। गणेश भोजन से जुड़े हैं जो हमें भुखमरी के डर से निपटने में मदद करते हैं। कार्तिकेय लड़ाई से जुड़े हैं जिससे हम शिकारियों से अपनी रक्षा करते हैं। इस प्रकार अपने दो बेटों के माध्यम से शिव हमारा पोषण और हमारी रक्षा दोनों करते हैं।

लोक परंपराओं में शिव की बेटियों के संदर्भ मिलते हैं। अशोक सुंदरी की कहानी गुजरात और आसपास के इलाकों की व्रत-कथाओं में पाई जाती है। पार्वती एक सहचरी चाहती थीं और इसलिए उन्होंने एक पेड़ से अशोक सुंदरी का निर्माण किया। पार्वती का ‘शोक’ दूर करने के कारण उन्हें अशोक कहा गया। चूंकि वे ख़ूबसूरत थीं, इसलिए उन्हें सुंदरी कहा गया। जब गणेश का सिर काट दिया गया था, तब वे डर से कांपती हुई नमक की एक बोरी के पीछे छिप गई थीं। इससे पार्वती बड़ी क्रोधित हुई थीं। बाद में शिव ने उन्हें शांत किया था। इसलिए अशोक सुंदरी नमक के साथ भी जुड़ी हुई हैं, जिसके बिना जीवन नीरस है।

तमिलनाडु के शिव मंदिरों में कहीं-कहीं प्रकाश की देवी 'ज्योति' की प्रतिमाएं पाई जाती हैं। एक मिथक के अनुसार वे शिव के प्रभामंडल से उभरीं और वे उनकी कृपा की शारीरिक अभिव्यक्ति हैं। दूसरे मिथक के अनुसार उन्होंने देवी पार्वती के माथे की एक चिंगारी से जन्म लिया। उनके शरीर से देवी एक भाला बनाकर उसे कार्तिकेय (मुरुगन) को भेंट देती हैं। इसी भाले से कार्तिकेय सुरपद्मन नामक असुर को वश में करते हैं।

इसी प्रकार शिव की तीसरी पुत्री का नाम मनसा देवी है। लोककथाओं के अनुसार चंडी के नाम से जानी जानेवाली पार्वती को मनसा पसंद नहीं है। वे मनसा से ईर्ष्या भी करती हैं। समुद्र मंथन से निकले हलाहल से मनसा ही शिव को बचाती हैं और ऐसा करके वे अपने आप को शिव की बेटी के रूप में स्थापित करती हैं।

घरेलू झगड़ों से तंग आकर शिव मनसा को छोड़ देते हैं, लेकिन उन्हें नेता नामक साथी देने के बाद। बाद में जब मनसा का विवाह होता है, तब चंडी उन्हें कहती हैं कि वे अपने पति जरत्कारू से शयनकक्ष में मिलते समय सांपों के आभूषण पहनकर जाएं। जरत्कारू डरकर भाग जाते हैं। अपने पिता और पति दोनों द्वारा त्याग दिए जाने के कारण दुखी मनसा एक क्रोध से भरी देवी बन जाती हैं। इसलिए सर्पदंश से होने वाली मृत्यु से बचने के लिए उन्हें मनाना ज़रूरी है।

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