पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

टॉकिंग पाइंट:मिर्ज़ापुर - एक लोकप्रिय वेब सीरीज़ में छिपे हैं कई सबक!

भावना सोमाया3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
' मिर्ज़ापुर' के एक दृश्य में कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी)। - Dainik Bhaskar
' मिर्ज़ापुर' के एक दृश्य में कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी)।

निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने एक बार कहा था कि ‘डी कंपनी’ एक कॉरपोरेट कंपनी की तरह काम करती है। अंतर है तो केवल व्यवसाय का। वेब सीरीज ‘मिर्ज़ापुर’ वैसे तो कोई प्रेरक कहानी नहीं है, नकारात्मक घटनाओं से भरी हुई है। लेकिन इस सीरीज में प्रबंधन की ऐसी कई बातें छिपी हुई हैं, जो कॉरपोरेट संस्थानों में लागू हो सकती हैं :

सर्वश्रेष्ठ को काम पर रखो

गुड्‌डू और बबलू की अपराध की कोई पृष्ठभूमि नहीं रहती है, लेकिन इसके बावजूद कालीन भैया उन्हें केवल इसलिए काम पर रखते हैं क्योंकि उन दोनों में उसे नए काम को करने का जज्बा नजर आता है। आजकल अनेक कॉरपोरेट कंपनियां उन लोगों को काम पर रख रही हैं, जिनमें उन्हें एक तरह की जुनून दिखाई देता है, फिर उनकी अकादमिक योग्यता, अनुभव या उम्र चाहे कुछ भी हो।

नई चीजें सीखना, पुरानी चीजें भूलना

जब लड़कों को एक काम में सफलता मिलती है तो कालीन भैया उन्हें दूसरा और भी बड़ा काम देता है। गुड्डू और बबलू हर नया काम सीखते जाते हैं। वे दोनों जानते हैं कि अगर उन पर कोई संकट आता है तो कालीन भैया आंच नहीं आने देगा। सभी कॉरपोरेट कंपनियों में भी कर्मचारियों को नई चीजें सीखनी और पुरानी चीजें भूलनी पड़ती हैं। कुछ तो फटाफट सीख लेते हैं, लेकिन कुछ हार मान लेते हैं और कुछ गड़बड़ियां कर देते हैं। यही वह समय होता है, जब वरिष्ठजनों को आगे आना होता है।

पुरस्कार और टीम भावना

जब कालीन भैया से गुड्‌डू एक मोपेड दिलाने का आग्रह करता है तो वह उसे रॉयल इनफील्ड देता है, वह भी ‘किंग ऑफ मिर्ज़ापुर’ लिखकर। इस ईनाम से वह और भी कड़ी मेहनत करने को प्रेरित होता है। इसी तरह आज अच्छी कंपनी का सीईओ अपने कर्मचारियों के मनोरंजन के लिए अलग से बजट रखता है क्योंकि वह जानता है कि जब सभी लोग मिलकर साथ मजे करेंगे तो मिलकर काम भी सर्वश्रेष्ठ ही करेंगे।

वरिष्ठजनों की कभी भी अवहेलना मत करो

इसमें एक दृश्य ऐसा भी आता है जब गुड्‌डू अपने आका की अनुमति के बगैर ही अपने प्रतिद्वंद्वी की हत्या करने का निर्णय ले लेता है। इससे उनके संबंधों में दरार आनी शुरू हो जाती है। सभी संस्थानों में कार्य करने वाले लोगों के लिए इसमें यह सबक छिपा है कि आप भले ही खुद को कितना ही होशियार क्यों न समझते हो, प्रोटोकॉल का उल्लंघन करना गलत है।

विश्वस्त-पुराने कर्मचारियों को जाने मत दो

गुड्‌डू और बबलू एक समय पर कालीन भैया के सबसे विश्वस्त आदमी हुआ करते थे, लेकिन फिर ऐसा मौका आता है कि यह समीकरण बिगड़ जाता है और वे अलग हो जाते हैं। इसी तरह एक संस्थान में वर्षों से काम करने वाला कर्मचारी उस संस्थान की विचारधारा से जुड़कर उसकी सम्पत्ति बन जाता है। एक समझदार बॉस या समझदार नियोक्ता जानता है कि उस अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारी को अपने साथ बनाए रखने के क्या फायदे हैं।

अपने प्रतिस्पर्धी को कभी भी कम मत आंको

कालीन भैया के पास अब प्रतिस्पर्धी बन चुके गुड्‌डू और बबलू को खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन वह उनकी ताकत को कम करके आंकता है और वही उसकी सबसे बड़ी गलती होती है। इसमें यह सबक सीखा जा सकता है कि जब आप बिजनेस कर रहे हैं तो अपने से छोटे व्यापारी को भी कमतर हर्गिज न समझें।

(भावना सोमाया जानी-मानी फिल्म लेखिका, समीक्षक और फिल्म इतिहासकार हैं।)

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज मार्केटिंग अथवा मीडिया से संबंधित कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है, जो आपकी आर्थिक स्थिति के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। किसी भी फोन कॉल को नजरअंदाज ना करें। आपके अधिकतर काम सहज और आरामद...

    और पढ़ें