रसरंग में 'मुसाफिर हो यारो':बारहमाही जलप्रपात, ऐसा लगता मानो पर्वत से दूध बह रहा हो

नीरज मुसाफिर20 दिन पहले
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गोवा को समुद्र, बीच और पार्टी डेस्टिनेशन ही माना जाता है। अधिकांश यात्री गोवा जाकर समुद्र देखकर ही लौट आते हैं। लेकिन 3700 वर्ग किलोमीटर में फैले इस राज्य में केवल समुद्र और बीच ही नहीं हैं, बल्कि घने जंगल, पर्वत और ऊंचे जलप्रपात भी हैं। गोवा की पूर्वी सीमा पर पश्चिमी घाट के पर्वत हैं। समुद्र से आने वाली नम हवाएं इन पर्वतों से टकराती हैं, तो खूब बारिश करती हैं। नतीजतन यहां खूब घने जंगल हैं। इतने घने जंगल कि कई जगहों पर तो सूरज की किरणें भी धरती तक नहीं पहुंच पातीं। इन जंगलों में भी सबसे देखने के लिए सबसे दिलकश जगह है दूधसागर जलप्रपात।

बारहों महीने बहने वाला यह जलप्रपात भगवान महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंदर स्थित है। दक्षिण-पश्चिम रेलवे की मड़गांव-हुबली लाइन इसी जलप्रपात के नीचे से गुजरती है। जब यहां से कोई ट्रेन निकलती है, तो दृश्य देखने लायक होता है। फिल्म ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में भी इस जलप्रपात को दिखाया गया था।

दूधसागर जलप्रपात पहुंचने के लिए सबसे पहले पहुंचना होता है कुलेम। मड़गांव से कुलेम की दूरी 35 किलोमीटर है और पहुंचने का सर्वोत्तम तरीका है रेल। कुलेम से जलप्रपात की दूरी 12 किलोमीटर है। रास्ता चूंकि सेंचुरी के अंदर से होकर गुजरता है, इसलिए अपने साथ एक गाइड ले जाना अच्छा रहता है। कुलेम में गाइड आसानी से मिल जाते हैं, जो वन विभाग से परमिशन की भी व्यवस्था करा देते हैं। कुछ रास्ता रेलवे लाइन के साथ-साथ जाता है और कुछ रास्ता जंगल की पगडंडी से होकर जाता है। पूरा रास्ता रोमांच से भरपूर है।

कुलेम से ट्रेन में बैठकर भी दूधसागर जाया जा सकता है। जलप्रपात से एक किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन भी बना हुआ है। यहां किसी भी ट्रेन का ऑफिशियल स्टॉपेज नहीं है, लेकिन टेक्नीकल कारणों से लगभग सभी ट्रेनें यहां रुकती हैं। यदि आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो ट्रेनों के आने-जाने के समय की जानकारी लेकर ही जाएं। क्योंकि यहां कोई नेटवर्क नहीं है और ठहरने की भी कोई व्यवस्था नहीं है।

यहां और क्या देखें?

भगवान महावीर वाइल्डलाइफ सेंचुरी : यह गोवा-कर्नाटक की सीमा पर स्थित है। आर्द्र जलवायु होने के कारण यहां घनी जैव-विविधता मौजूद है। अनगिनत तरह के पेड़-पौधों के साथ-साथ जंगली जानवर भी यहां खूब पाए जाते हैं, जिनमें तेंदुआ, अनेक तरह के बंदर, लंगूर, उड़ने वाली गिलहरी, गौर, सांभर, चीतल, जंगली सुअर प्रमुख हैं।

सलोलिम डैम : कुलेम से 25 किलोमीटर दक्षिण में सलोलिम डैम स्थित है। यह बांध सलोलिम नदी पर बना है और 24 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां से एक तरफ गोवा के मैदानी भाग को देखा जा सकता है और दूसरी तरफ पश्चिमी घाट के ऊंचे पर्वतों का भी आनंद लिया जा सकता है।

बुदबुद कुंड : सलोलिम डैम से 25 किलोमीटर दूर स्थित है बुदबुद कुंड (बबलिंग पोंड)। भगवान कृष्ण के मंदिर प्रांगण में यह कुंड स्थित है। इसकी विशेषता है कि यदि आप इसके किनारे बैठकर ताली बजाएंगे तो पानी में बुलबुले निकलते हैं। मंदिर व कुंड अत्यधिक शांत वातावरण में स्थित हैं और यहां किसी भी तरह का अनावश्यक शोर नहीं सुनाई देता।

कैसे पहुंचें?

गोवा का मुख्य रेलवे स्टेशन मड़गांव है और देश के प्रमुख शहरों से सीधे ट्रेन सेवा से जुड़ा है। मड़गांव से मोलम और मोलम से कुलेम के लिए बसें मिल जाती हैं। लेकिन सर्वोत्तम तरीका है ट्रेन से जाना। यदि आप दूधसागर के अलावा सलोलिम डैम और बुदबुद कुंड भी जाना चाहते हैं, तो मड़गांव से किराये पर बाइक भी मिल जाती हैं और टैक्सी भी आसानी से मिल जाती हैं। यदि आपके पास समय हो तो शाम को साउथ गोवा के पलोलम और कोलवा बीच पर भी समय बिताया जा सकता है।

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