अन्नू कपूर का खास कॉलम 'कुछ दिल ने कहा':शम्मी कपूर ने लिपस्टिक से मांग भर गीता बाली को बना लिया था जीवन संगिनी

अन्नू कपूर19 दिन पहले
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गीता बाली के साथ शम्मी कपूर। - Dainik Bhaskar
गीता बाली के साथ शम्मी कपूर।

शादी का पहला दर्ज किया प्रमाण 2,350 ईस्वी पूर्व मेसोपोटामिया में पाया जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार शिव-पार्वती विवाह ही प्रथम उल्लेख के रूप में वर्णित है। बाइबल की प्रथम पुस्तक GENESIS 1:27 के अनुसार यहोवा ने एक पुरुष की रचना की। उसके बाद 2:21-25 तक वर्णन है कि यहोवा (GOD) ने प्रथम पुरुष आदम की एक पसली निकालकर उससे एक स्त्री की रचना कर डाली, जिसे 2:25 में पहली बार ‘Man And His Wife’ सम्बोधन दिया गया। वैसे कुछ लोग यह भी सिद्ध करने की कोशिश में लगे हैं कि मानव शरीर की संरचना के शोध और वैज्ञानिक प्रामाणिकता अनुसार पुरुष की पसली से जो GENOTYPE उत्पन्न होगा, वो 44 XY होकर केवल पुरुष की रचना में समर्थ है, उस प्रक्रिया से स्त्री की उत्पत्ति नहीं हो सकती! लेकिन भय्या, हमें इन सारे लफड़ों में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि बेकार की कंट्रोवर्सी में क्या धरा है? अपन तो यहां फिल्मी दुनिया की शादी की चर्चा करेंगे, जहां होगा एक हीरो शम्मी कपूर और सामने होगी अपने समय की हीरोइन गीता बाली।

शम्मी कपूर
शम्मी कपूर

शम्मी कपूर ने एक इंटरव्यू में सुनाई थी अपनी प्रेम गाथा! गीता बाली से मुलाकात उनके डायरेक्टर दोस्त हरि वालिया ने फिल्म ‘कॉफी हाउस’ (1957 में रिलीज) की शूटिंग के दौरान करवाई थी। लेकिन तब दिल के दरवाजे पे मोहब्बत ने दस्तक नहीं दी थी। उसके बाद दोबारा मुलाकात हुई फिल्म ‘रंगीन रातें’ (1956 में रिलीज) की शूटिंग के दौरान जो रानीखेत में फिल्माई जा रही थी। इसमें गीता बाली का छोटा-सा कैमियो रोल था, जो उन्होंने डायरेक्टर केदार शर्मा से स्टार होने के बावजूद जिद करके मांग लिया था, सिर्फ इसलिए क्योंकि गीता बाली को पहाड़ों और वादियों से प्यार था और वो प्राकृतिक सौंदर्य में रहना चाहती थीं। गीता बाली केदार शर्मा की ही खोज थीं, सो शर्माजी इनकार नहीं कर सके। शम्मी कपूर के शब्दों में ‘हम लोग वहां रानीखेत में 20 दिन थे शूटिंग के लिए, और फिर पहाड़ी जगह, पहाड़ी गाना, वादियां, खूबसूरत लड़की, जवान लड़का... इश्क हो गया जी!’

और फिर एक दिन कुछ अद्भुत घट गया- शम्मी कपूर की टीम के साथ गीता बाली भी शिकार को निकल पड़ीं। शुक्र है इन्होंने तब कोई गैरकानूनी कृत्य नहीं किया। शम्मी कपूर शिकार के लिए एक बाघ का पीछा कर रहे थे, जो शिकारी दल को लगातार काफी समय से चकमा दे रहा था। थक-हारकर देर रात जब वापस लौटने की बारी आई तो शम्मी कपूर की जीप काफी पीछे रह गई और गीता बाली की गाड़ी बहुत आगे बढ़ गई। लेकिन जब शम्मी कपूर की गाड़ी गीता की जीप तक पहुंची तो जो मंजर सबने देखा, वो हैरत अंगेज़ था! गीता बाली अपनी जीप के बोनट पर खुले में बैठकर शम्मी कपूर को बुला रही थीं और इशारा कर रही थीं उस बाघ की ओर जो झाड़ियों से निकल रहा था। ये वही बाघ था, जिसके शिकार की तलाश में शम्मी कपूर निकले थे मगर जिसे, ये लड़की, ये रील वाली हीरोइन, रियल सिचूएशन में टाइगर के सामने निर्भय होकर घूरे जा रही थी! शायद अब शम्मी कपूर को मालूम चला कि ये बेबे उस कौम की है, जिसका उद्घोष रहा है ‘सवा लाख से एक लड़ाऊं!’ आगे उन्होंने ज़िक्र किया उस दिन का जिस दिन शम्मी कपूर को गीता बाली से अगाध प्रेम हो गया- ‘I fell in love with her madly’। वह तिथि 2 अप्रैल 1955 थी। फिर ठान ली कि ब्याह करना है तो इसी के साथ करना है। और उसके बाद लगातार गीता बाली से शादी करने को कहते रहे, गीता टालती रहीं। आगे आने वाले तीन महीनों तक ये सिलसिला जारी रहा। शम्मी शादी का कहते और गीता इनकार कर देतीं।

एक फिल्म में शम्मी कपूर और गीता बाली।
एक फिल्म में शम्मी कपूर और गीता बाली।

फिर आई 23 अगस्त 1955 की शाम! हमेशा की तरह शम्मी कपूर ने फिर शादी करने को कहा मगर आज शादी की बात सुनकर गीता ने इनकार नहीं किया, बल्कि कहा कि चलो शादी कर लेते हैं! लेकिन शादी आज ही होगी और अभी! नहीं तो कभी नहीं! शम्मी कपूर अवाक रह गए। अचानक सामने आन पड़ी इस स्थिति से कैसे निपटना है, यह समझ नहीं आया तो तुरंत अपने मित्र हरि वालिया को बुलाया। फिर भागे जॉनी वाकर के घर क्योंकि याद आ गया था कि उनके परम मित्र जॉनी वाकर ने अभिनेत्री शकीला की बहन नूर को भगाकर पिछले हफ्ते ही शादी रचाई थी। तो एक सप्ताह वाला अनुभवी बंदा था, सही दिशा दिखलाएगा। लेकिन जब वे जानी वॉकर के घर पहुंचे तो उन्होंने कहा- भाई मैं मुस्लिम हूं, मस्जिद गया और निकाह पढ़वा लिया। तुम्हें मंदिर जाना होगा जहां पंडित जी तुम्हारी शादी सम्पन्न कराएंगे। सो आनन-फानन में तीनों बान गंगा मंदिर पहुंचे, लेकिन विलंब के कारण पंडित जी ने कहा कि मंदिर के द्वार अब बंद हो चुके हैं, भोर में जागरण होगा, मंदिर खुलेगा, आ जाना शादी करवा देंगे। शम्मी और गीता निर्णय ले चुके थे, पीछे हटने का कोई इरादा नहीं था। सो शम्मी कपूर, गीता और हरि वालिया को लेकर अपने घर माटुंगा पहुंच गए। उनके माता-पिता रंगमंच प्रदर्शन के लिए भोपाल गए थे, सो इस रात गीता के साथ घर ठहरने में कोई अड़चन नहीं थी। तीनों ने भोजन के बाद सारी रात आंखों में काट दी और 24 अगस्त 1955 को प्रातः 4-5 बजे बान गंगा मंदिर की ओर प्रस्थान कर गए। पुजारी ने जब मंदिर के पाट खोले तो इन युवाओं को देखकर वो भी अचंभे में पड़ गया! शम्मी कपूर और गीता बाली का विवाह पवित्र अग्नि के फेरों के साथ सम्पन्न हुआ। जब बारी आई वधू की मांग भरने की तो सिंदूर नहीं होने पर गीता ने अपने पर्स से लिपस्टिक निकाली और उस लिपस्टिक से शम्मी ने गीता की मांग भरकर उन्हें अपनी जीवन संगिनी बना लिया। शम्मी को अपने घर वालों की तरफ से थोड़ा डर लग रहा था कि वे गीता को कैसे स्वीकार करेंगे क्योंकि एक तो गीता, शम्मी कपूर से आयु में एक वर्ष बड़ी थीं और दूसरे गीता उनके भाई राज कपूर और पिता पृथ्वी राज कपूर की हीरोइन भी रह चुकी थीं। लेकिन समस्त परिवार ने इस जोड़े का हृदय से आशीष देकर स्वागत किया। इसके बाद इस दंपती को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई 1956 में और एक लक्ष्मी भी आई 1961 में। विवाह के बाद शम्मी कपूर का फिल्मी सितारा बहुत ऊंचाइयों पर पहुंच गया। वे हिन्दी फिल्म जगत के एक अनोखे और अत्यंत सफल सितारे बन गए! 1964 के अंत में गीता बाली गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं और 21 जनवरी 1965 को इस नश्वर संसार को छोड़ चिरंतन में लीन हो गईं। पत्नी की मृत्यु की वेदना, छोटे-छोटे बच्चों का पालन-पोषण। शम्मी कपूर बीमार हो गए, टूट गए। पर घर वालों ने संभाल लिया और 4 साल बाद आग्रह किया कि शादी कर लो, कम से कम बच्चों की ख़ातिर ही कर लो। तो 1969 को शम्मी कपूर ने नीला देवी से शादी कर ली। और नीला देवी ने जिस समर्पण से बच्चों को और पति को संभाला, उसकी चर्चा फिर कभी जरूर करूंगा।

गीता बाली के देहांत के बाद शम्मी कपूर ने नीला देवी से शादी कर ली।
गीता बाली के देहांत के बाद शम्मी कपूर ने नीला देवी से शादी कर ली।

शम्मी कपूर की पुत्री कंचन ने अपने कॉलेज फॉर्म में माता के स्थान पर नाम लिखा- ‘श्रीमती नीला देवी कपूर’। जब नीला देवी ने पूछा कि गीताजी का नाम क्यों नहीं लिखा तो बेटी कंचन बोली, ‘मैं अपनी मां का आदर करती हूं, परंतु उन्हें जानती नहीं हूं। मैंने जाना तो सिर्फ आपको है, आप ही मम्मी हैं!’ याद रहें, अब शम्मी कपूर नीला देवी के पति थे और आदित्य कपूर एवं कंचन नीला देवी के बच्चे थे। हर देवकी को नमन! इस संसार की हर यशोदा को नमन! ये सारी घटनाएं फ़िल्म निर्माण के दौरान घटीं। इसलिए जो वर्ष उल्लेखित हैं, वे उपरोक्त फ़िल्मों के रिलीज के वर्ष हैं, ये कृपया ध्यान रखिएगा। जय हिन्द! वंदे मातरम!

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