पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

रसरंग की कवर स्टोरी:ख़तरे में सुंदरबन?

16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
सुंदरबन का एक लैंडस्कैप ( फोटो : देबमल्या रॉय चौधरी) - Dainik Bhaskar
सुंदरबन का एक लैंडस्कैप ( फोटो : देबमल्या रॉय चौधरी)

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से सुंदरबन की इकोलॉजी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसी रिपोर्ट के बहाने जानते हैं कैसा है सुंदरबन, कैसी है इसकी इकोलॉजी और अर्थव्यवस्था के लिए यह इतना अहम क्यों है? और इसके अस्तित्व पर क्या हैं खतरे?

सुंदरबन में अधिकतम औसत तापमान में इजाफा हुआ है। बंगाल की खाड़ी के समुद्री तापमान में 0.019 डिग्री सेंटीग्रेड की हर साल बढ़ोतरी हो रही है। सुंदरबन में भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा अनुमानों के अनुसार 2050 तक सुंदरबन के तापमान में एक डिग्री सेंटीग्रेड तक की बढ़ोतरी होगी। इसके परिणाम स्वरूप समुद्र ज्यादा कार्बन डाईऑक्साइड शोषित कर रहा है। ज्यादा कार्बन सोखने से जलीय जंतुओं की फिजियोलॉजी पर असर पड़ेगा। खासकर कार्बोनेट केमिस्ट्री में बदलाव से जलीय प्राणियों की खाद्य शृंखला पर भी असर पड़ेगा। इन बदलावों से सुंदरबन के सम्पन्न मत्स्य संसाधन भी गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।

तापमान में बढ़ोतरी के कारण समुद्री सतह में भी उठाव हो रहा है। मौसमी घटनाओं में बदलाव खासकर अधिक से अधिक तेज तूफानों के कारण लवणता बढ़ेगी जिससे जैव विविधता को खतरा पैदा होगा। इससे डेल्टा के निचले स्थान रहने के योग्य नहीं रह जाएंगे। समुद्री सतह में उठाव और मौसम में बदलावों का असर मैंग्रोव केवनों पर भी पड़ेगा। इसके परिणाम स्वरूप क्षेत्र में लवणता बढ़ने से मैंग्रोव की उत्पादकता कम होगी। इससे जंगल धीरे-धीरे सिमटते चले जाएंगे और अंत में ये खत्म भी हो सकते हैं।

आर्थिक गतिविधियों का भी असर...

सुंदरबन में सभी सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लिए जैव-विविधता मुख्य आधार है जिनका विभिन्न आजीविकाओं जैसे मत्स्य पालन, कृषि और वानिकी से सीधा संबंध है। सुंदरबन से किसी भी जैव-स्रोत के खत्म होने का असर इन सभी पर पड़ेगा। और भी कई कारकों जैसे बढ़ती जनसंख्या, गरीबी के कारण भी इसके संसाधनों का दोहन बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में होने वाली कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का काफी इस्तेमाल हो रहा है। कीटनाशकों के कारण क्षेत्र की जैव-विविधता पर भी असर पड़ रहा है।

सुंदरबन की क्या है अहमियत?

इसका पारिस्थितिकी तंत्र कई तरह की जमीनी और जलीय प्रजातियों के लिए शरणगाह रहा है। यह कई तरह के स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा रहा है। यह दुनिया के प्राचीनतम माने जाने वाले हॉर्स शू केकड़े के लिए प्रजनन स्थल है जो एशिया पैसिफिक क्षेत्र से सफर करके सुंदरबन तक आते हैं। सुंदरबन के जंगलों मंे हो रही कमी के कारण कई स्थानीय प्रजातियां या तो खत्म हो गईं या उनकी संख्या में कमी हो गईं। इनमें से इन पांच प्रजातियों के नाम प्रमुखता से लिए जा सकते हैं : पानी वाली भैंस, दलदली हिरण, जावां गैंडा, घड़ियाल और चित्रा कछुआ। जिन प्राणियों के अस्तित्व पर संकट है, उनके लिए सुंदरबन का महत्व और भी बढ़ जाता है।

ख़तरों का कब से हुआ आगाज?

1770 के दशक में और खासकर 1790 के दशक में ब्रिटिश काल के दौरान राज्य, जमींदारों और किसानों ने सुंदरबन की सीमाओं को और पीछे ढकेल दिया ताकि अधिक से अधिक जमीन खेती के लिए मुहैया हो सके और अधिक राजस्व मिल सके। हालांकि उस समय डेल्टा पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा। लेकिन 1870 तक आते-आते ब्रिटिश उपनिवेशकों ने डेल्टा के निचले क्षेत्रों में लोगों को बसाने के काम में तेजी दिखानी शुरू की ताकि सुंदरबन के जंगलों में पड़ी उर्वरा जमीन से अधिक से अधिक राजस्व हासिल किया जा सके। 1873 से 1904 तक जंगलों को साफ कर लोगों को बसाने की गति और भी तेज हो गई। इस अवधि में खेती में बढ़ोतरी के चलते सुंदरबन का पूरा क्षेत्र (जंगल मिलाकर) 19510 वर्ग किमी से घटकर 16902 वर्ग किमी हो गया। यानी इसमें 2608 वर्ग किमी तक की कमी हो गई जो लगभग 13.3 फीसदी थी।

कब आई जागरूकता?

19वीं सदी में सुंदरबन के इकोसिस्टम पर जबरदस्त हमले होने शुरू हुए। यही वह समय था, जब खेती के अलावा भी सुंदरबन की अहमियत को महसूस किया जाने लगा था। इसका प्रारंभिक श्रेय भारत के पहले इंस्पेक्टर जरनल ऑफ फॉरेस्ट डॉ. डाइट्रिच ब्रांडिस और तत्कालीन कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट डॉ. विलियम सिलिच को दिया जा सकता है जिन्होंने वैज्ञानिक फॉरेस्ट्री पर जोर दिया। उनके प्रयासों की वजह से ही सरकार में बैठे लोगों को महसूस हुआ कि जंगलों की रक्षा करना फायदेमंद ही होगा। अंतत: 1874 में सुंदरबन को वैज्ञानिक प्रबंधन के अंतर्गत आया गया। इससे सुंदरबन के बचे हुए जंगलों के विनाश को रोकने में मदद मिली। 1875 में सुंदरबन को वन प्रबंधन के तहत लाया गया। इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1878 के तहत सुंदरबन के जंगलों के कुछ हिस्से सुरक्षित या संरक्षित वनों की श्रेणी मंे लाए गए ताकि जमीन के बाजार की ताकत का मुकाबला किया जा सके।

10 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है सुंदरबन...

सुंुदरबन के जंगल 10 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में भारत और बांग्लादेश में फैले हुए हैं। इनमें से लगभग 60 फीसदी हिस्सा दक्षिण-पश्चिम बांग्लादेश मंे जबकि 40 फीसदी हिस्सा भारत के बंगाल में स्थित है। भारत में यह दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना में स्थित है।

- इसके इकोसिस्टम में 55 फीसदी जंगल और 45 फीसदी जलभराव वाला क्षेत्र शामिल है।

- भारत के सुंदरबन इलाके में मैंग्रोव के जंगल लगभग 4267 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं।

- टाइगर रिजर्व एरिया के करीब 1,330.12 वर्ग किमी क्षेत्र को साल 1984 में कोर एरिया और नेशनल पार्क घोषित किया गया।

- टाइगर रिजर्व एरिया के कोर एरिया के 124.40 वर्ग किमी क्षेत्र को यूनेस्को ने विश्व विरासत सूची में शामिल किया है।

1,107,090 अरब रु. का फायदा पहुंचाएंगे सुंदरबन के जंगल...

सुंदरबन की पारिस्थितिकी सेवाओं की वजह से इसका आर्थिक मूल्य कितना है, इसका मूल्यांकन करने के प्रयास किए गए हैं। हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार सुंदरवन टाइगर रिजर्व से मिलने वाले आर्थिक फायदे 12.8 अरब रुपए सालाना आंके गए हैं। हालांकि भविष्य में ये सुंदरबन कितने फायदेमंद होंगे, इसके लिए भी एक अध्ययन किया गया गया है। भारत स्थित सुंदरबन मैंग्रोव के जंगलों का मूल्यांकन बताता है कि इसके पारिस्थितिकी सेवाओं के फायदे करीब 1,107,090 अरब रुपए के होंगे (2050 से 2100 के बीच एक अनुमान के अनुसार)। यह फायदे कॉर्बन को रोकने, मत्स्य उत्पादन, तूफानों से रक्षा करने और पर्यटन को मिलाकर है।

-13 लाख लोगों की प्रत्यक्ष रूप से मदद करता है सुंदरबन का पारिस्थितिकी तंत्र। मत्स्य पालन, केकड़ों का शिकार और शहद का संग्रहण करने वालों की आजीविका में सुंदरबन मदद करता है।

- 6.7 अरब रुपए (2009 के डॉलर-रुपए एक्सचेंज रेट के अनुसार) की क्षति पहुंच रही है सुंदरबन के इकोसिस्टम और जैव विविधता को पहुंचने वाली पर्यावरणीय क्षति के कारण।

सुंदरबन की दुर्लभ वनस्पतियां व जीव-जंतु :

- सुंदरवन में खासकर मैंग्रोव के जंगल हैं। मैंग्रोव के जंगल भी कई तरह के हैं। इनमें प्रमुख हैं : एविसिन निआल्बा, सी. टैगल, फोनिक्स पालुडोसा, रिजो फॉरेस्प। सुंदरबन के इकोसिस्टम पर दो बार आने वाले ज्वार का भी असर रहता है। ज्वार के कारण वहां की वनस्पतियों पर भी असर पड़ता है। इस क्षेत्र में कम से कम 40 प्रकार के माइक्रोब्स, 270 प्रकार के शैवाल, 128 तरह के फायटो-प्लैंटॉन्स आदि पाए जाते हैं।

- बंगाल टाइगर यहां का प्रमुख प्राणी है। फिशिंग कैट, जंगल कैट, लैपर्ड कैट भी यहां प्रमुखता से मिलती हैं। उदबिलाव (स्मूद इंडियन ओटर), छोटे पंजे वाले उदबिलाव (स्मॉल क्लॉड अोटर) भी नजर आ जाते हैं। जलीय प्राणियों में जो अक्सर ज्वारीय पानी में दिखाई देते हैं, में शामिल हैं - इंडो पैसिफिक हम्प बैक्ड डॉलफिन, इरावाडी डॉलफिन आदि।

सुंदरबन को बचाने के क्या हुए प्रयास ... :

सुंदरबन क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के असर को लेकर काफी प्रभावित रहा है जो स्थानीय लोगों की सुरक्षा और आजीविका के लिए बड़ा खतरा है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने सुंदरबन लैंडस्कैप में 1973 में अपने प्रयास शुरू किए थे। हम तीन विषयों - जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलता और ऊर्जा तक पहुंच पर फोकस कर रहे हैं। इसके लिए टिकाऊ आजीविका, स्वच्छ व सतत ऊर्जा और मनुष्य-जंगली प्राणियों के बीच संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित किया गया है। डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-इंडिया समुदायों और अनुसंधान संस्थाओं के साथ चर्चा करके जलवायु अनुकूल कृषि एवं मत्स्यपालन क्रियाकलापों को क्रियान्वित कर रहा है। इससे कृषि के कारण सुंदरबन को होने वाले खतरे कम हुए हैं। डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-इंडिया विकास योजनाओं में जलवायु परिवर्तन अनुकूल क्रियाकलापों को लागू करने के लिए स्थानीय निकायों को भी मदद कर रहा है।

(देबमल्या रॉय चौधरी, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया )

स्रोत : मैंग्रोव ऑफ सुंदरबन्स ( जेड हुसैन एवं जी. आचार्य), ए रिवाइज्ड सर्वे ऑफ फॉरेस्ट टाइप्स ऑफ इंडिया (एचजी चैम्पियन एवं एसके सेठ), सरवाइविंग इन द सुंदरबन्स : थ्रेट्स एंड रिस्पॉन्स (ए.ए. डांडा) आदि।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आपकी मेहनत और परिश्रम से कोई महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होने वाला है। कोई शुभ समाचार मिलने से घर-परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। धार्मिक कार्यों के प्रति भी रुझान बढ़ेगा। नेगेटिव- परंतु सफलता पा...

    और पढ़ें