रसरंग में मायथोलॉजी:भारतीय दर्शनशास्त्र के दो मूलभूत सिद्धांतों का प्रतीक है सर्प

देवदत्त पटनायक2 महीने पहले
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कर्नाटक के सुब्रमण्या में स्थित कुक्के श्री सु्ब्रमण्या मंदिर में स्थापित नागदेवता की स्वर्ण प्रतिमा। दक्षिण के प्रमुख नाग मंदिरों में यह विशेष स्थान रखता है। - Dainik Bhaskar
कर्नाटक के सुब्रमण्या में स्थित कुक्के श्री सु्ब्रमण्या मंदिर में स्थापित नागदेवता की स्वर्ण प्रतिमा। दक्षिण के प्रमुख नाग मंदिरों में यह विशेष स्थान रखता है।

अगर बाइबिल को देखें तो वहां सांप शैतान का प्रतीक है। चूंकि उसके शरीर पर पपड़ियां होती हैं और वह अपने पेट के बल पर रेंगता है, इसलिए उसके साथ एक नकारात्मक भावना जुड़ जाती है। वह प्रलोभन का प्रतीक है, ऐसा कुछ जिसके कारण आप गॉड द्वारा निर्धारित श्रेष्ठ मार्ग से भटक जाते हैं।

लेकिन भारतीय परंपरा में सांप एक अलग ही रूप लेता है। पुराणशास्त्र में फणधारी सांप अर्थात नाग एक महत्वपूर्ण प्राणी है। वह उपजाऊपन और ज्ञान से जुड़ा है। जो लोग अच्छी फसल और बच्चे चाहते हैं, वे नागों की पूजा करते हैं। पूरे साल में नाग पंचमी का दिन नागों को पूजने का सबसे महत्वपूर्ण दिन है।

नाग भोगवती नामक भूमिगत क्षेत्र के निवासी हैं। भोग का अर्थ है सुख और वती का अर्थ है भूमि। इससे स्पष्ट है कि सांपों की भूमि में सुख है। भोगवती में प्रवेश आम तौर पर एक दीमक की नीड से किया जाता है। कहते हैं कि वह सोने और रत्नों से बनी है। शायद इसी बात से लोककथाएं उभरीं जिनमें खजाने की रक्षा आम तौर पर फणधारी नाग करते थे। वासुकी नागों के राजा हैं। ऐसी कई लोककथाएं हैं जिनमें वासुकी मानव महिलाओं से प्यार करते हैं या मानव महिलाएं उनसे प्यार करती हैं। इस बात ने मानव लोक और नाग लोक, दोनों में समस्याओं को जन्म दिया।

कुछ कथाओं के अनुसार वासुकी की एक बहन है जिसका नाम मनसा है। बंगाल में सर्पदंश से सुरक्षित रहने के लिए लोग मनसा देवी की पूजा करते हैं। उनके पति जरत्करू एक ऋषि थे। उन दोनों के मिलन से अस्तिका नामक पुत्र ने जन्म लिया जो आधा नाग और आधा मानव था। महाकाव्य महाभारत में अस्तिका एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नाग कभी खांडवप्रस्थ नामक घने जंगल में रहा करते थे, जिसे बाद में पांडवों को दिया गया। इस जंगल को जलाकर नष्ट कर दिया गया और वहां इंद्रप्रस्थ शहर स्थापित किया गया। अपने निवासस्थान को नष्ट करने के लिए नागों ने पांडवों को कभी माफ़ नहीं किया। इसलिए कई वर्षों बाद एक नाग ने अर्जुन के पोते परीक्षित की जान ले ली।

महाभारत की इस कहानी के कारण लोग मानने लगे हैं कि नागों की याददाश्त बहुत अच्छी होती है। आज भी यह मान्यता है कि यदि आप किसी नाग को मारोगे तो उसका नर या मादा साथी आपको या आपके किसी वंशज को मार देगा। कई हिंदी फ़िल्मों में भी यह बात दोहराई गई है। मारे जाने के बाद अक्सर नागों का अंतिम संस्कार किया जाता है, ताकि उनका कोई निशान न बच जाए। माना जाता है कि इससे अन्य नागों द्वारा मानवों के साथ बदला लिए जाने की संभावना खत्म हो जाती है।

लोककथाओं के अनुसार उत्तर भारत में स्थित खांडव वन के विनाश के बाद नाग दक्षिण की ओर आए। इसलिए पूरे दक्षिण भारत में नाग मंदिर पाए जाते हैं। केरल में ऐसे मंदिर पाए जाते हैं जिनकी देखभाल पुजारिनों के परंपरागत परिवार करते हैं। मान्यता है कि उनके पास गुप्त सर्प विद्या है। कर्नाटक में नागमंडल अनुष्ठान किया जाता है, जिसमें कुंडलित नाग का चित्र फर्श पर निकाला जाता है और अनुष्ठान के अंत में मिटा दिया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से दुष्ट आत्माएं दूर होती हैं और सौभाग्य बढ़ता है।

हालांकि भारत में सांपों के कई प्रकार पाए जाते हैं, लेकिन भुजंग की सबसे ज़्यादा पूजा की जाती है। इसका कारण भुजंग का फण है। अपने फण से भुजंग स्थिर और गतिमान रूप में आसानी से पहचाना जा सकता है। फण केवल तभी उठाया जाता है, जब भुजंग स्थिर और कुंडलित होता है।

कला में स्थिरता को हमेशा फणधारी सांप द्वारा दर्शाया जाता है। गतिशीलता को आम तौर पर दो मैथुन करते सांपों के माध्यम से दर्शाया जाता है क्योंकि हिले बिना कोई सांप मैथुन नहीं कर सकता। इस प्रकार सांप को अपने दो रूपों में (फण उठाए और मैथुन करते हुए) भारतीय दर्शनशास्त्र के दो मूलभूत सिद्धांतों अर्थात स्थिरता और गतिशीलता का प्रतीक माना जा सकता है। पहले रूप में वह आत्मा का प्रतीक है और दूसरे रूप में वह तत्त्व का प्रतीक है। पहला रूप देवत्व के विश्व का प्रतीक है, जबकि दूसरा रूप सांसारिक रोज़मर्रा के विश्व का प्रतीक है।

- देवदत्त पटनायक, प्राचीन भारतीय धर्मशास्त्रों के आख्यानकर्ता और लेखक

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