रसरंग में 'मुसाफिर हूं यारो':वैली ऑफ फ्लॉवर्स: खिलते हैं 500 से भी अधिक प्रकार के फूल

नीरज मुसाफ़िर9 दिन पहले
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उत्तराखंड में कुल 6 नेशनल पार्क हैं- जिम कार्बेट, राजाजी, गोविंद, गंगोत्री, नंदा देवी और वैली ऑफ फ्लॉवर्स। इनमें से वैली ऑफ फ्लॉवर्स यानी फूलों की घाटी नेशनल पार्क सबसे अनूठा है, क्योंकि यह यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में भी है। यह स्थान अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है और साल में 7-8 महीने बर्फ से ढंका रहता है। पर्यटकों व प्रकृति प्रेमियों के लिए यह 4-5 महीने ही खुला रहता है। इस साल 1 जून से इसे खोला जा रहा है।

ऋषिकेश से 250 किमी दूर है जोशीमठ और जोशीमठ से 15 किमी दूर है गोविंदघाट। पूरा रास्ता गंगा और अलकनंदा के साथ-साथ आगे बढ़ता है। इस रास्ते में आप पंचप्रयागों के दर्शन कर सकते हैं। ये पंचप्रयाग हैं - देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और विष्णुप्रयाग। गोविंदघाट से बद्रीनाथ केवल 25 किमी दूर रह जाता है, लेकिन फूलों की घाटी का रास्ता गोविंदघाट से ही अलग हो जाता है।

गोविंदघाट से 5 किमी दूर पुलना नामक गांव आता है। सड़क यहीं तक बनी है। यहां गाड़ियां खड़ी करने के बाद आगे का रास्ता पैदल तय करना होता है। पैदल के लिए अच्छा चौड़ा रास्ता बना है। पुलना समुद्र तल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से 9 किमी आगे घांघरिया नामक स्थान है, जो समुद्र तल से 3100 मीटर ऊपर है। पुलना से घांघरिया तक की यह चढ़ाई दम निकाल देती है। लेकिन प्राकृतिक दृश्य इतने शानदार होते हैं कि थकान महसूस नहीं होती।

घांघरिया अच्छा-खासा बाजार है। यहां ठहरने के लिए अच्छे होटल भी हैं और भोजन के लिए अच्छे ढाबे व रेस्टॉरेंट भी हैं। गोविंदघाट से सुबह चलने पर घांघरिया पहुंचने तक शाम हो जाती है, इसलिए घांघरिया में रात रुकना ठीक रहता है। इससे शरीर भी ऊंचाई का अभ्यस्त हो जाता है और अगले दिन उतनी थकान नहीं होती।

गोविंदघाट से ही एक रास्ता श्री हेमकुंड साहिब के लिए भी जाता है। हेमकुंड साहिब 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक पवित्र झील है, जहां स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेकने देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। इस साल 20 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुल गए, जो अक्टूबर के अंत तक खुले रहेंगे।

गोविंदघाट से दूसरा रास्ता फूलों की घाटी की तरफ चला जाता है। यह घाटी काफी लंबी घाटी है और अपने चलने की सामर्थ्य के अनुसार आप जहां तक चाहें, वहां तक जा सकते हैं। आपको पूरे रास्ते में अनगिनत प्रजातियों के फूल देखने को मिलेंगे। यहां विभिन्न प्रकार के ऑर्किड, पॉपी, प्रिमुला, मैरीगोल्ड, बुरांश, गुलाब, गेंदा समेत 500 से ज्यादा प्रजातियों के फूल खिलते हैं। इनमें से बहुत सारे फूल दवाओं में भी काम आते हैं।

फूल खिलने का सर्वोत्तम समय जुलाई और अगस्त होता है। इस समय मानसून चरम पर होता है और पूरी घाटी फूलों से लकदक रहती है। इसी दौरान उत्तराखंड का राजकीय पुष्प ब्रह्मकमल भी खिलता है। ब्रह्मकमल के साथ दुर्लभ नीलकमल और फेनकमल भी खिलते हैं।

काकभुशुंडि ताल

यदि आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं, तो काकभुशुंडि ताल भी जा सकते हैं। गोविंदघाट से घांघरिया के रास्ते में एक स्थान आता है, जिसका नाम है भ्यूंडार। यहां से काकभुशुंडि ताल का ट्रैक जाता है। इस ट्रैक को करने में कम से कम तीन दिन लगते हैं और अपने साथ गाइड व पॉर्टर, राशन, टैंट आदि ले जाने पड़ते हैं। यह झील समुद्र तल से 4400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हिमालय की दुर्गम झीलों में इसकी गिनती होती है।

कब जाएं?

1 जून से फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुल जाएगी, लेकिन यहां जाने का सर्वोत्तम समय है जुलाई और अगस्त। इन्हीं महीनों में यहां सबसे ज्यादा फूल खिलते हैं।

कैसे जाएं?

ऋषिकेश से गोविंदघाट के लिए बसें व टैक्सियां आसानी से मिल जाती हैं। गोविंदघाट से फूलों की घाटी के लिए पैदल यात्रा आरंभ की जा सकती है। यदि आप पैदल नहीं चलना चाहते, तो घांघरिया तक आपको कुली व खच्चर भी मिल जाएंगे। फूलों की घाटी में खच्चरों को ले जाना प्रतिबंधित है, इसलिए आपको वहां या तो पैदल जाना पड़ेगा या कुली की सहायता लेनी पड़ेगी।

कहां ठहरें?

गोविंदघाट व घांघरिया में कई होटल हैं, जहां आसानी से कमरे मिल जाते हैं। आप अपने टैंट भी ले जा सकते हैं। इनके अलावा इन दोनों ही स्थानों पर गुरुद्वारों में भी निःशुल्क ठहर सकते हैं। घांघरिया में जून के महीने में भी खूब सर्दी व बारिश होती है, इसलिए गर्म कपड़े व रेनकोट ले जाना न भूलें।