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चिंतन:आम के खट्‌टे-मीठे स्वाद में छिपा है पूरी दुनिया का दर्शन

गुणवंत शाह16 दिन पहले
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आपने कभी चिड़िया को धूल में लोटने के बाद पंख फड़फड़ाते देखा है? इस मनोरम दृश्य को देखने के बाद भावुक हृदय का किसान अपने साथी से कहता है कि इस साल अच्छी बारिश होगी। जो साफ दिल के मालिक होते हैं, वे इस तरह के भोलेपन के साथ जीते हैं। संत तुकाराम कह गए हैं- भोलापन भक्त का भूषण है।

अंधेरे की निंदा करना एक रचनात्मक कार्य माना जाता है। अंधेरे के खिलाफ खड़े होने के लिए लोग दिवाली पर पटाखे चलाते हैं। आतिशबाजी अंधकार पर प्रहार करने में सफल तो होती है, परंतु यह सफलता अधिक नहीं टिकती। दिवाली पर जब पटाखे फूटते हैं, तब हमें अंधेरे का अट्‌टहास सुनाई देता है। अंधकार के खिलाफ जब मानव दियासलाई जलाता है, तब अंधकार कहता है- हे! मानव, अब मेरे चलने का समय आ गया है। अंधकार स्वभाव से हठीला होता है। उसका सामना कैसे किया जाए? अंधकार से बिना किसी बहस के चुपचाप एक दीया जला लो, यही उत्तम मार्ग है। एक दीया अपने आसपास के करीब दो-तीन मीटर के अंधकार को दूर कर ही देता है। अंधकार के खिलाफ खड़ा होने वाला एक दीया वास्तव में कुम्हार की अनूठी कृति है जिसे कुम्हार की प्यारी संतान कहा जा सकता है।

पेड़ों पर लटकते आमों को देखो। वे पककर किस तरह से एक सीध में नीचे गिरते हैं। गुरुत्वाकर्षण और लम्बवत को परस्पर भाई कहा जा सकता है। सर आइजक न्यूटन ने भी इसी तरह का दृश्य देखा था जिससे गुरुत्वाकर्षण का नियम बना। वैसे देखा जाए तो जो भी फलों को इस तरह से गिरते देखता है, वह कुछ समय के लिए दार्शनिक बन ही जाता है। पेड़ों पर पककर कोई आम गिरता है, तो उसे देखकर किसान समझ जाता है कि अब आमों को तोड़ने का समय आ गया है। इस वक्त जो आम होते हैं, वे न तो खट्‌टे होते हैं और न ही मीठे। उसे हम खट्टे-मीठे आम कह सकते हैं। यह संसार भी कभी न तो पूरा खट्‌टा होता है ओर न ही पूरा मीठा। सारे अनुभव खट्‌टे-मीठे ही होते हैं।

जो मनुष्य आम की प्रवृत्ति को समझ जाता है, वह शायद ब्रह्मांड के रहस्य को भी समझ सकता है। आपने कभी गिरे हुए पके आम को देखा है? प्रकृति की गोद में खेलने वाला भूमिपुत्र आम के दाग को देखते ही कह उठता है- इसे कोयल या तोते ने चोंच मार दी है। आम हम सबके लिए एक फल ही नहीं, बल्कि अमृत है। झुलसती गर्मी में यह आम दोपहर का खट्‌टा-मीठा आश्वासन है। यह मानव कितना मूर्ख है। स्वादिष्ट केरी का मेथीयुक्त अचार बना लेता है। यह अचार तभी बनता है, जब केरी पूरी तरह से गल जाती है। सोचो, क्या गुजरती होगी, उस बेचारी केरी पर। आम के बगीचे में धूल में लोटती और पंख पसारती मासूम चिड़िया को क्या पता कि अचार कैसा होता है? हम सभी इस पृथ्वी के अनजाने शहर में जीने वाले अचार प्रेमी लोग हैं। रत्नागिरी या वलसाड़ी हाफूस आम का स्वाद अनूठा होता है। आम के संसार में हाफूस जाति का आम सर्वोपरि है। केसर आम की देखभाल कम करनी होती है। राजपुरी आम का रस प्रसिद्ध है। आम में भी कई वेरायटी पाई जाती हैं। अचार के लिए मलगुब्बा आम श्रेष्ठ होता है।

नागार्जुन का 'आम विश्लेषण'

बौद्ध चिंतक नागार्जुन महान दार्शनिक थे। वे तांत्रिक साधु थे, आयुर्वेद के ज्ञाता थे। रसायनशास्त्री भी थे, इसके अलावा बागवानी कार्यों के विशेषज्ञ भी थे। उन्होंने जीवनभर शून्यवाद का प्रचार किया। उन्होंने आम के चार प्रकार बताए हैं। उनका यह विश्लेषण भी किसी दर्शन से कम नहीं है। उनके अनुसार पहले प्रकार के आम वे होते हैं, जो कच्चे होने के बाद भी पक्के दिखते हैं। दूसरे प्रकार के पक्के होते हैं, पर पक्के दिखते नहीं। तीसरे प्रकार के आम वे होते हैं, जो कच्चे होते हैं और कच्चे दिखते भी हैं। अंत में चौथे प्रकार के आम वे होते हैं, जो पक्के तो होते हैं और पक्के दिखते भी हैं। नागार्जुन की यह बात आज हमसे प्रतिदिन मिलने वाले इंसानों पर भी लागू होती है।

- गुणवंत शाह पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ लेखक, साहित्यकार और विचारक हैं।

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