रसरंग में किस्सागोई:जब इन मूंछों पर पाकिस्तानी राष्ट्रपति भी हो गए थे फिदा!

रशीद किदवई14 दिन पहले
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हजारीलाल रघुवंशी - Dainik Bhaskar
हजारीलाल रघुवंशी

क्या किसी देश का राष्ट्रपति किसी व्यक्ति की मूंछों पर इतना फिदा हो सकता है? बिल्कुल। कुछ साल पहले ऐसा हो भी चुका है।

ये मूंछें थीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मप्र विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष हजारीलाल रघुवंशी की और इन मूंछों से प्रभावित होने वाले राष्ट्रपति थे जनरल परवेज मुशर्रफ। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति तो उनकी मूंछों से इतने ज्यादा प्रभावित हो गए थे कि उन्होंने मजाक-मजाक में कह दिया था कि आप हमारी सेना में क्यों नहीं आ जाते। हजारीलाल रघुवंशी आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन जब भी मूंछों की चर्चा होती है तो उन्हें जानने वाले उनकी मूंछों को याद करना कभी नहीं भूलते। रघुवंशी का 9 अप्रैल 2020 को निधन हो गया था।

यह पूरा किस्सा आज से करीब 15 साल पुराना है। बात 2007 की है, जब उनकी सदाबहार मूंछें पूरे पाकिस्तान मीडिया में सुर्खियां बन गई थीं। इसी साल इस्लामाबाद में 25 से 27 मार्च के दौरान कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट एसोसिएशन का समारोह आयोजित हुआ था। इस समारोह में सभी कॉमनवेल्थ देशों के पीठासीन अधिकारियों ने शिरकत की थी। मप्र विधानसभा में उपाध्यक्ष होने के नाते भारतीय प्रतिनिधिमंडल में हजारीलाल रघुवंशी भी शामिल हुए थे।

उस समय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ से मुलाकात की थी। उन्हें देखते ही मुशर्रफ एक बार के लिए ठिठक से गए। फिर उन्होंने बहुत गंभीरता के साथ कहा, 'जनाब, आप मध्य प्रदेश विधानसभा में क्या कर रहे हैं? आप पाकिस्तानी सेना में क्यों नहीं आ जाते?' हालांकि इसके बाद लगे ठहाकों से साफ हो गया था कि यह शुद्ध मजाक था, जो उनकी मूंछों की तारीफ में किया गया था।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल मप्र विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष (अब स्वर्गीय) ईश्वरदास रोहानी, जो विधानसभा में अपनी त्वरित टिप्पणियों के लिए जाने जाते थे, ने भी चुटकी लेते हुए कहा था, 'मेरा मानना है कि मूंछों की इससे बड़ी तारीफ नहीं हो सकती।'

अपनी मूंछों को लेकर रघुवंशी का भी कहना था, 'मूंछें बुद्धिमत्ता और रहस्य को जितने बेहतर तरीके से पेश कर सकती हैं, उतना शरीर का कोई और दूसरा अंग नहीं।' इसी मौके पर रघुवंशी, मुशर्रफ को भोपाल आने का न्यौता देना नहीं भूले।

रघुवंशी ने बताया था कि 1948 के बाद से उन्होंने अपनी मूंछें केवल दो बार ही साफ की थीं, जब उनके माता-पिता का देहावसान हुआ था। आज के दौर में जबकि ज्यादातर लोग क्लीन शेव रहना पसंद करते हैं, तब रघुवंशी कहते थे, 'मूंछें शान की बात है, शर्म की नहीं।' हालांकि उनकी इस बात को उनके परिवार में ही समर्थन नहीं मिला। न उनके बेटे ने मूंछ रखी और न ही पोते ने और इसका उन्हें हमेशा मलाल भी रहा। यहां तक कि बेटे या पोते को मूंछें रखने के वास्ते मनाने के लिए उन्होंने हर तरीका आजमाया। उनसे बात करना तक बंद कर दी। पर वे नहीं माने।

पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि 80 वर्ष की आयु तक भी रघुवंशी एक दिन में 100 तक उठक-बैठक करते थे और नाश्ते में घी में तर पांच पराठे खा जाते थे।

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