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दास्तां-ए-हिमालय:जहां आज हिमालय है, वहां कभी था विशालकाय समुद्र

डॉ. सुब्रत शर्मा8 दिन पहले
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हिमालय हजारों सालों से दक्षिण एशिया के लोगों के लिए काफी मायने रखता आया है। यहां की संस्कृति, पौराणिक मान्यताओं और साहित्य में हिमालय एक तरह से रचा-बसा है। हिमालय संस्कृत के दो शब्दों- 'हिम' (बर्फ) और 'आलय' (स्थल) से मिलकर बना है - बर्फ का स्थल यानी हिमालय। प्राचीन काल में जहां हिमालय ने हमारे साधु-संन्यासियों को अपनी तपोभूमि बनाने के लिए आकर्षित किया तो आज के जमाने में पर्वतारोही एक चुनौती के रूप में इसे सैल्यूट करते हैं।

हिमालय की खूबसूरती उसकी विविधता में हैं। यहां ऊंची-ऊंची चोटियां, कई किमी लंबे ग्लैशियर, अथाह गहराई लिए झीलें और ताजे पानी की नदियां, जटिल भूगर्भिक (जियोलॉजिक) संरचनाएं और अद्वितीय जीव-जंतु व पेड़-पौधे इसे प्राकृतिक तौर पर चमत्कारी बनाते हैं। लेकिन बीते कुछ दशकों के दौरान हुए जलवायु परिवर्तन ने करोड़ों साल पुराने हिमालय को भी 'हिलाकर' रख दिया है। जलवायु परिवर्तन के लिए निश्चित तौर पर मानवीय औद्योगिक गतिविधियां जिम्मेदार हैं और अब धीरे-धीरे पूरी मानवीयता पर इसका असर भी दिखने लगा है। समय के साथ यह असर और भी गंभीर होता जाएगा। इसलिए हिमालय को बचाना जरूरी है। आज जानते हैं इस विशायलकाय पर्वत शृंखला के कुछ अनजाने या कम जाने पक्षों को :

कैसे हुआ हिमालय का निर्माण?

जहां आज हिमालय है, वहां कभी टेथिस नाम का सागर हुआ करता था। यह जुरासिक काल (करीब 20 से 14.5 करोड़ साल पहले) की बात है। यह टेथिस एक विशालकाय, लेकिन उथला सागर था। यह दो विशाल भूखंडों से घिरा हुआ था। एक तरफ यूरोशिया था तो दूसरी ओर गोंडवानालैंड (इंडियन प्लेट)। ये दोनों भूखंड करोड़ों सालों में एक-दूसरे की ओर गति करते गए। इससे टेथिस सागर के पानी में गाद जमा होने लगी और पानी धीरे-धीरे कम होता चला गया। दो विरोधी दिशाओ से पड़ने वाले दबाव के कारण सागर में जमी मिट्टी, गाद आदि की परत भी ऊपर की ओर खिसकती चली गई। यह क्रिया निरंतर चलती रही और करीब ढाई करोड़ साल पहले इसी क्रिया के परिणामस्वरूप हिमालय का निर्माण हुआ। हिमालय के पहले यहां समुद्र था, इसकी पुष्टि उस तथ्य से भी होती है जिसके अनुसार माउंट एवरेस्ट की चोटी समुद्री चूना पत्थर से बनी है।

हर साल 5 मिमी ऊपर उठ जाता है हिमालय :

इंडियन प्लेट आज भी 65 मिमी की गति से गतिशील है। इसी के फलस्वरूप हर साल हिमालय की ऊंचाई औसतन पांच मिमी बढ़ जाती है। 1954 में सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की जो ऊंचाई 8848 मीटर थी, उसमें अब 0.86 मीटर का इजाफा हो गया है।

कितना विशाल है हिमालय?

हिमालय कुल मिलाकर 5,95,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। इसकी लंबाई को देखें तो यह पश्चिम में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से लेकर पूर्व में तिब्बत तक करीब 2500 किलोमीटर तक विस्तारित है। इसकी चौड़ाई को देखें तो यह दक्षिण से उत्तर के बीच विभिन्न जगहों पर 200 से 400 किमी है।

6 देशों में उपस्थिति :

हिमालय पर्वत शृंखला 6 देशों - भारत, नेपाल, भूटान, तिब्बत (चीन), अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक फैली हुई है। नेपाल और भूटान तो हिमालय क्षेत्र में ही बसे हुए हैं। यह दुनिया की एकमात्र ऐसी पर्वत शृंखला है जिसका विस्तार इतने देशों तक है।

दुनिया की पांचों सबसे ऊंची चोटियां हिमालय-कराकोरम में...

दुनिया में कम से कम 109 चोटियां ऐसी है जिनकी ऊंचाई समुद्र तल से ऊंचाई 7200 मीटर से ज्यादा है। इनमें से अधिकांश चोटियां हिमालय क्षेत्र में हैं। इनमें दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट भी शामिल है।

माउंट एवरेस्ट : 8848.86 मीटर

के - 2 : 8611 मीटर

कंचनजंघा : 8,586

लहोस्ते : 8,516

मकालू : 8,463

बर्फ के मामले में तीसरे स्थान पर ...

अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद सबसे ज्यादा बर्फ हिमालय पर्वत शृंखला में ही जमा है। इसीलिए इसे 'थर्ड पोल' (तीसरा ध्रुव) भी कहा जाता है। यहां कम से कम 15 हजार विशालकाय ग्लैशियर हैं जिनमें गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे ग्लेशियर शामिल हैं। गंगोत्री करीब 30 किमी लंबा और 2 से 4 किमी चौड़ा है। गंगा का उद्गम इसी से होता है। हाल के सालों में वैश्विक जलवायु परिवर्तन की वजह से ग्लैशियरों पर भी असर बढ़ा है। भूटान के हिमालय क्षेत्र में विगत वर्षों के दौरान कई ग्लैशियर झीलें बनी हैं। मानव और प्रकृति पर आने वाले दशकों में इसका गंभीर असर होगा।

हिमालय में झीलें...

हिमालय क्षेत्र में कई झीलें हैं। इनमें सबसे प्रमुख झील मानसरोवर है जो कैलाश पर्वत के पास करीब 420 वर्ग किमी में फैली है। यह समुद्र तल से 4590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। एक अहम झील पैंगोन झील भी है जो भारत-चीन दोनों देशों में स्थित है। वैसे हिमालय क्षेत्र की सबसे बड़ी झील यमद्रोक झील है जो करीब 700 वर्ग किमी में विस्तारित है। यहां की कई झीलों को संयुक्त राष्ट्र की 'रामसर साइट्स' की मान्यता मिली है।

कैसी है हिमालय की पारिस्थिति?

मौसम? : इसके बेस पर मौसम ट्रॉपिकल होता है और वह लॉन्गिट्यूडली व एल्टीट्यूडली बदलता है। जैसे-जैसे ऊंचाई पर जाते हैं, मौसम ठंडा होता जाता है। औसतन एक किमीमीटर ऊपर जाने पर तापमान में 4 से 6 डिग्री की गिरावट आती है। ट्रांस हिमालयन (जैसे लद्दाख आदि) में टूंड्रा मौसम के प्रभाव के कारण तापमान मानइस 40 तक पहुंच जाता है। हिमालय क्षेत्र में बारिश भारतीय मौसम के पैटर्न और पश्चिमी विक्षोभ से प्रभावित होती है। सालाना बारिश का औसत भी पश्चिम से पूर्व की जाने पर बढ़ता जाता है।

अद्वितीय जीव-जंतु, कई के अस्तित्व पर खतरा : हिमालय के ऊपरी भागों में स्नो लेपर्ड (बर्फीला तेंदुआ) पाया जाता है। इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसका मुख्य शिकार होते हैं पहाड़ी भेड़ 'भारल' जिसे ब्लू शिप भी कहते हैं। किसी समय यहां हिमालयन कस्तूरी मृग भी बहुतायत पाए जाते थे, लेकिन विभिन्न कारणों से अब इनकी संख्या भी काफी कम हो गई है। इसी तरह हिमालयन ताहर, ब्राउन बीअर (भूरा भालू), रेड पांडा, गीज गोल्डन लंगूर जैसे प्राणी भी अस्तित्व बचाने के संकट से जूझ रहे हैं। हिमालय कई तरह के प्रवासी पक्षियों का भी स्थल है। हिमालय क्षेत्र में अब भी निरंतर नई-नई प्रजाति के जीव-जंतुओं की खोज हो रही है।

वनस्पति : हिमालय की वनस्पितयां भारतीय उपमहाद्वीप में जलवायु एवं मानवीय समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण में बदलाव और मानवीय गतिविधियों की वजह से यहां की विशिष्ट वनस्पति भी खतरे में है या फिर वह आवास के प्रारूप बदल रही है। कई वनस्पतियां जो पहले हिमालय के निचले स्थानों में भी पाई जाती थीं, वह अब अपेक्षाकृत ऊंचाई वाले स्थानों पर ही पाई जाने लगी है। जूनिपेरस टिबेटिका 4900 मीटर ऊंचाई पर पाई जाती है। भारत के करीब 30 फीसदी वन हिमालय क्षेत्र में स्थित हैं।

क्या है भारतीय हिमालय क्षेत्र?

यह हिमालय का वह क्षेत्र है जो भारत में है। भारत के 9 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश पूरी तरह हिमालय क्षेत्र में स्थित हैं। ये हैं : हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख। असम के दो जिले और पश्चिम बंगाल का एक जिला भारतीय हिमालय क्षेत्र में स्थित है। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से को पानी की आपूर्ति इसी क्षेत्र से होती है।

(डॉ. सुब्रत शर्मा लद्दाख रीजनल सेंटर, जी.बी. पंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एनवॉयरमेंट, लेह के प्रमुख है। यह स्टोरी डॉ. शर्मा से बातचीत पर आधारित है।)

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