पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

पाकिस्तान डायरी:अच्छा आलोचक होने का हक़ किसे है?

ज़ाहिदा हिना6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
मिर्ज़ा ग़ालिब एक ऐसे शायर हैं जिनकी तमाम शायरी आलोचना-समालोचना से परे है। - Dainik Bhaskar
मिर्ज़ा ग़ालिब एक ऐसे शायर हैं जिनकी तमाम शायरी आलोचना-समालोचना से परे है।

अच्छा आलोचक कौन हो सकता है? पहले कहा जाता था कि सबसे अच्छा आलोचक तो पाठक ही हो सकता है। लेकिन पाठक की अपनी सीमाएं होती हैं। फिर किसी विद्वान ने कभी कहा कि एक शायर ही अच्छा आलोचक हो सकता है या फिर तालीम देने वाला। हकीकत यह भी है कि आलोचक किसी को बनाया नहीं जा सकता। यह कुछ कुछ वैसा ही मामला है कि शायर किसी को बनाया नहीं जा सकता। हां, अगर कोई पहले से शायर है तो उसकी अच्छी-बुरी बातें बताकर उसकी शायरी में चार चांद जरूर लगाए जा सकते हैं।

एक आलोचक के लिए यह बहुत ही ज़रूरी है कि उसकी सोच कलाकार की सोच से भी आगे की हो। उसे किसी फन की तारीफ करने से मुहब्बत तो हो, लेकिन उसके पास इस तारीफ के लिए सही आैर तकनीकी वजह भी होनी चाहिए। ख्याल रखें कि वह अपनी सलाह पर नाज़ करें, लेकिन आलोचना में किसी का हक़ ना मारें। इस बात का भी ख्याल रखा जाए कि तयशुदा उसूलों की रौशनी में ही किसी किताब, ग़ज़ल या शेर की आलोचना करने की इजाज़त दी जा सकती है। इसे आसानी से समझने के लिए हम ऐसा भी कह सकते हैं कि शेर की आलोचना के लिए ग़ालिब की तनक़ीद (आलोचना) सही मानी जाएगी और ग़ुलाम हुसैन साजिद की आलोचना ग़लत मानी जाएगी। यह बात सिर्फ समझाने के लिए कही जा रही है क्याेंकि ग़ुलाम हुुसैन की शायरी में वह जज़्बा, बयान में ख़ूबसूरती और वह ख़ुद पसंदी नहीं है जो ग़ालिब की पहचान है। आप यह पूछ सकते हैं कि यहां नामाें का इंतख़ाब क्यों जरूरी था भला? यह इसलिए जरूरी था, क्योंकि इसी से लोगों को उसूली और वाक़ेआती तौर पर किसी नतीजे पर पहंुचने में आसानी होगी।

इस सिलसिले में मैं यहां एक बात और भी कहना चाहूंगी। पाकिस्तान के आलोचकों को पश्चिमी अदब से भी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। पाकिस्तान में आलोचना का जो स्तर है, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरता है, इसलिए हमें यह मानने और स्वीकारने में कमी नहीं रखनी चाहिए कि आलोचना के मामले में पाकिस्तानी कमतर हैं।

शायरी के मैदान में किसी शख़्स को महज़ इसलिए शेर-ओ-शायरी का आलोचक नहीं माना जा सकता कि उनका अंदाज़े बयान अलग है। दरअसल, हमारे यहां ऐसे भी कई आलोचक रहे हैं जिनकी अपनी शायरी में एक भी शेर ऐसा नहीं निकल सका जो उन्हें ऐसा कोई भी अख़्तियार ज़रूरी तौर पर दे सके।

लेकिन हमारे यहां के कई आलोचक आलोचना करने वाली ख़ूबियों से परे हैं। हां, उनमें वे ख़ूबियां जरूर हैं, जिनसे कुछ शायर काफ़ी मालामाल हैं। इसलिए हमारे यहां के आलोचक शेर-ओ-शायरी की व्याख्या करने में इंसाफ नहीं कर सकते और ना कर रहे हैं।

(ज़ाहिदा हिना पाकिस्तान की जानी-मानी वरिष्ठ पत्रकार, लेखिका और स्तंभकार हैं।)

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- इस समय ग्रह स्थितियां आपके स्वाभिमान और आत्म बल को बढ़ाने में भरपूर योगदान दे रहे हैं। काम के प्रति समर्पण आपको नई उपलब्धियां हासिल करवाएगा। तथा कर्म और पुरुषार्थ के माध्यम से आप बेहतरीन सफलता...

और पढ़ें

Open Dainik Bhaskar in...
  • Dainik Bhaskar App
  • BrowserBrowser