रसरंग में टॉकिंग पॉइंट:बीते 30 साल से आज तक क्यों प्रासंगिक बनी हुई हैं तब्बू?

भावना सोमाया15 दिन पहले
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तब्बू 90 के दशक की इकलौती ऐसी हीरोइन हैं जो 2020 में भी उतनी ही प्रासंगिक बनी हुई हैं, जितनी अपने कॅरियर के शुरुआती दिनों में थीं। जबकि उनकी समकालीन अधिकांश हीरोइनें जैसे काजोल, करिश्मा कपूर, मोनिशा कोइराला, उर्मिला मातोंडकर और शिल्पा शेट्टी समय के साथ परिदृश्य से ओझल हो गईं, तब्बू का प्रभाव जारी है। हर बार जब भी आप उन्हें स्क्रीन पर देखते हैं तो आपको आश्चर्य होता है कि आखिर क्या चीज़ उन्हें इतना खास क्या बनाती है? निश्चित रूप से उनकी प्रतिभा, लेकिन उनका व्यक्तित्व भी।

एक समय था जब वे सभी पुरस्कार जीत रही थीं और सभी को लग रहा था कि ये पुरस्कार उनके सिर चढ़ जाएंगे। लेकिन तब्बू पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इस बारे में वे कहती हैं, 'मैं तालियों को कभी गंभीरता से नहीं लेती, क्योंकि मेरा मानना है कि शो बिजनेस में कुछ भी स्थायी नहीं है। मेरी पहली फिल्म 'प्रेम' को स्क्रीन पर आने में पांच साल लग गए और तब तक इंडस्ट्री ने मुझे एक तरह से भुला ही दिया था। जब मुझे अपना पहला डांस सीक्वेंस शूट करना था तो मेरा आत्मविश्वास बहुत ही कम था। मैं तमाम कोशिशों के बावजूद अपने डांस स्टेप्स सही नहीं रख पा रही थी। कोरियोग्राफर सरोज खान पूरी यूनिट के सामने मुझ पर चिल्ला उठीं। यह एक दु:स्वप्न था।'

तो आखिर आपने स्वयं को इतने अच्छे डांसर के रूप में कैसे तैयार किया? यह पूछे जाने पर तब्बू ने कहा, 'इस बारे में तो मुझे भी नहीं पता। मुझे लगता है कि अब भी मैं अच्छी डांसर नहीं हूं, कुछ-कुछ अजीब-सी हूं। और मेरे निर्देशक कहते हैं कि चूंकि मैं अजीब-सी हूं, इसीलिए वे मुझे पसंद करते हैं। मैं जानती हूं कि प्रियदर्शन ने मुझे सज़ा-ए-काला पानी के लिए इसीलिए साइन किया था क्योंकि मैं बड़ी दिखती हूं और एक मलयाली के चरित्र में अच्छे से ढल सकती हूं। वे हमें हर सुबह 3 बजे जगा देते थे और 5.30 बजे तक पहला शॉट शूट होता था। हर दिन मुझे मलयालम में लंबी-लंबी लाइनें सीखनी पड़ती थीं। एक दिन एक मुश्किल सीन के लिए 15 टेक के बाद भी मैं सही नहीं कर सकी। इससे हर कोई अधीर हो उठा और इसलिए मैं फूट-फूट कर रो पड़ी।'

क्या आप व्यक्तिगत संकट के दौरान भी स्वयं को उतना ही असुरक्षित महसूस करती हैं, जितना कि कॅरियर के समय? इस सवाल पर तब्बू थोड़ी देर के लिए सोचती हैं और फिर कहती हैं, 'नहीं, क्योंकि आपके कॅरियर की तुलना में व्यक्तिगत जीवन में बहुत कुछ दांव पर लगा होता है। वहां मैं हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहती हूं कि मेरी प्रतिक्रिया का मेरे चाहने वालों पर कैसे असर होगा।'

कॅरियर में जो आपसी संघर्ष हैं, क्या उनका समाधान अपने आप हो जाता है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'नहीं, हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। सभी अभिनेताओं का अपना एक रक्षा तंत्र होता है और वे चुनौतियों से बचना सीख जाते हैं। एक बहुत ही गंभीर फिल्म की शूटिंग के बाद मैं डेविड धवन के साथ शूटिंग करने के लिए उत्सुक होती हूं क्योंकि यह एक पेड हॉलिडे की तरह है। कभी-कभी आप भावनात्मक कारणों से फिल्में करते हैं, जैसे कि जब अशोक कौल ने मुझसे कहा कि वे हैदराबाद शहर पर एक एनिमेशन फिल्म बना रहे हैं, तो मुझे लगा कि मुझे भी इसका हिस्सा बनना चाहिए क्योंकि यह मेरे अपने गृहनगर के बारे में है।'

आप इतने लंबे समय के बाद भी फिल्म इंडस्ट्री में बनी हुई हैं, जबकि आपके समकालीन अन्य सभी लोग पैकअप कर चुके हैं। आपकी इस सफलता का राज क्या है? इस सवाल पर तब्बू कहती हैं, 'इसका कोई राज नहीं है। मैंने अपनी समकालीनों की तरह ही मसाला फिल्में कीं, मैंने भी वही गलतियां कीं जो मेरी समकालीनों ने की, लेकिन सौभाग्य से मैं कुछ बेहतरीन भूमिकाएं और बेहतरीन फिल्में पाने में सफल रही। हॉलीवुड में हर कोई खुद को रिचार्ज करने के लिए ब्रेक लेता है। भगवान का शुक्र है कि अब हमारे यहां भी ऐसा हो रहा है।'

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