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कोरोना का नए सिरे से अध्ययन:वैक्सीन के सामने वायरस का नया स्ट्रेन ज्यादा प्रतिरोधी

एलिस पार्क7 दिन पहले
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  • ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में मिले नए स्ट्रेन ने स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच गंभीर चिंता फैलाई

ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का व्यवहार अब भी पूरी तरह सामने नहीं आया है। स्पष्ट नहीं है कि क्या नई नस्ल से लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ेंगे या अधिक मौतें होंगी। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका में मिला अलग स्ट्रेन वैक्सीन के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी हो सकता है। इस स्ट्रेन में ऐेसे बदलाव हुए हैं जो वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। वैज्ञानिक नए स्ट्रेन का व्यवहार समझने के लिए संक्रमित मरीजों के अधिक सैम्पल की जांच कर रहे हैं। वैसे, अब तक मिले संकेत स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता फैलाने के लिए काफी हैं।

नए स्ट्रेन के संबंध में दुनियाभर में सतर्कता बरती जा रही है। 40 से अधिक देश ब्रिटेन पर यात्रा प्रतिबंध लगा चुके हैं। वायरस के जेनेटिक डेटाबेस जीआईएसएआईडी के अनुसार कोविड-19 वायरस में अब तक लगभग 12 हजार बदलाव (म्यूटेशन) हो चुके हैं। इनमें से कुछ म्यूटेशन लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। पिछले साल चीन में कोरोना वायरस की पहचान होने के कुछ माह बाद डी614जी नामक नए स्ट्रेन ने पुराने स्ट्रेन की जगह ली थी।

यह नया वायरस यूरोप, अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में फैला। इस स्ट्रेन से संक्रमित लोगों के खून के नमूनों से पता लगा है कि वायरस को शरीर का इम्यून सिस्टम बेकार कर सकता है। मतलब यह कि दुनियाभर में बन रही वर्तमान वैक्सीन इस स्ट्रेन से लोगों को सुरक्षा दे सकती हैं। नार्थ केरोलिना यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर राल्फ बेरिक कहते हैं, वायरस की इस किस्म से वैक्सीन की सुरक्षा मिल सकती है।

ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में पाया गया एन 501 वाई नामक नया स्ट्रेन अलग है। शोधकर्ताओं का विश्वास है, यह लोगों के बीच अधिक आसानी से फैल सकता है। बेरिक का कहना है, इस समय दुनिया की ज्यादातर आबादी कोविड-19 वायरस से संक्रमित नहीं हुई है। इसलिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाने की बेहतर क्षमता रखने वाले स्ट्रेन अपना जेनेटिक कोड फैला सकते हैं। वैक्सीन लगने और ज्यादा लोगों के वायरस से सुरक्षित होने पर स्थिति बदल जाएगी। फिलहाल, वायरस में बदलाव के ज्यादा अनुकूल अवसर हैं। लेकिन अधिक आबादी के सुरक्षित होने से वायरस में बदलाव की प्रक्रिया प्रभावित होगी।

लिहाजा, कहा नहीं जा सकता कि वायरस किस दिशा में जाएगा। वायरस में होने वाले ये परिवर्तन उसे वर्तमान में उपलब्ध वैक्सीनों के लिए प्रतिरोधी बनाने की क्षमता पैदा कर सकते हैं। वायरस में केवल एक किस्म का बदलाव उसे एंटीबॉडीज का प्रतिरोधी नहीं बनाता है। दो या तीन बदलाव ऐसा कर सकते हैं। बेरिक कहते हैं, सबसे बड़ी चिंता की बात है कि कोविड-19 वायरस की दो या तीन किस्मों में बदलाव हो चुके हैं।

वायरस में नए परिवर्तन पर लगातार नजर रखी जा रही

कोरोना वायरस में हो रहे बदलाव की स्थितियों पर नजर रखने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन में अधिकतम संक्रमित लोगों के सैम्पल की जांच की जा रही है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि कोविड-19 वायरस पर लगातार नजर रखकर उसके अधिक खतरनाक और जानलेवा परिवर्तनों को समझा जा सकता है। अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक बीमारी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. एंथोनी फॉसी का कहना है, उनकी टीमें वायरस की नई किस्मों का अध्ययन कर रही हैं ताकि बीमारी पर उनके प्रभाव को समझा जा सके। यह पता लग सकेगा कि नई किस्में मौजूदा वैक्सीनों को बेअसर कर पाएंगी या नहीं।

वैक्सीन में जल्दी संभव है बदलाव

अच्छी खबर यह है कि वायरस के नए स्ट्रेन यदि वर्तमान वैक्सीनों के सामने प्रतिरोधी पाए जाते हैं तो फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना कंपनियां लंबी प्रक्रिया और रिसर्च के बिना नई डोज तैयार कर सकेंगी। दोनों वैक्सीन एमआरएनए टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। डॉ. फॉसी का कहना है, एमआरएनए टेक्नोलॉजी लचीली है। उसे बदलना संभव है।

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