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वॉच मैन के बेटे ने घर का खर्च चलाने की ड्राईवर की नौकरी, अब बनेगा आर्मी आफिसर

कैडेट ओम पैठाने पहले एक ओला कैब ड्राईवर थे।

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 09:47 AM IST
ओम पैठाने आर्मी की ट्रेनिंग लेते हुए ओम पैठाने आर्मी की ट्रेनिंग लेते हुए

मुंबई. पुणे के रहने वाले आर्मी कैडेट जीसी ओम पैठाने को 10 मार्च को चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी(ओटीए) की पासिंग आउट परेड के बाद इंडियन आर्मी ऑफिसर की पोस्ट पर अपोइन्ट किया जाएगा। वह ओटीए के 257 कैडेट के उस बैच का हिस्सा होंगे जो आर्मी ऑफिसर बनकर देश की सेवा करेंगे। कैडेट ओम पैठाने पहले एक ओला कैब ड्राईवर थे। कैब में बैठे एक रिटायर्ड कर्नल की बातों से इंस्पायर्ड होकर उन्होंने बाद में सीडीएस का एग्जाम दिया और उसे क्वालीफाई कर लिया। ओम पैठाने ने Dainikbhaskar.com से बातकर अपनी अनटोल्ड स्टोरी को बयां किया।

पिता करते थे वॉचमैन का काम

- ओम (25) बताते है, “मेरा जन्म महराष्ट्र के भिंड के लिम्बारुई देवी गांव में हुआ था।

- घर में दो भाई और एक बहन है। मैं उनमें सेकेण्ड नम्बर पर हूं। मां सुशीला देवी हाउस वाइफ है।

- पिता उत्तम पैठाने किसान के अलावा एक ड्राईवर थे। एक सड़क दुघर्टना में उनके दोनों पैर खराब हो गये।

-उनके उपर घर का खर्च चलाने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने नी ट्रांसप्लांट के बाद वॉचमैन की नौकरी कर ली।

-लेकिन इस नौकरी से भी परिवार का खर्च ठीक से नहीं चल पा रहा था। फैनेंसियल कंडीशन खराब थी ”।

ओम पैठाने कैडेट के साथ ओम पैठाने कैडेट के साथ

घर का खर्च चलाने के लिए चलाई कैब

 

- “मैं तब बीएससी फाइनल ईयर की पढाई कर रहा था। मैंने घर का खर्च चलाने के लिए पार्ट टाइम जॉब करने का डिसीजन लिया। उस टाइम मेरे फ्रेंड राहुल भालेराव ने कार खरीदकर उसे ओला में चलने के लिए दिया था।

- मैंने अपने फ्रेंड से बात कर ओला कैब को चलाने के लिए कहा। वो राजी हो गया। उसके बाद से मैं अपनी पढ़ाई के साथ ही पार्ट टाइम में रोज ओला कैब को चलाने लगा। मैंने दस महीने तक ओला कैब चलाई।

- मेरी कोई फिक्स सैलरी नहीं थी। महीने में 5 से 6 हजार रूपये कमा पाता था। बड़ी मुश्किल से मेरे परिवार का खर्च चलता था। मेरा मन इस काम में नहीं लगता था। मैं कोई अच्छी जॉब करना चाहता था”।

 

ओम पैठाने अपने पिता को गले लगाते हुए ओम पैठाने अपने पिता को गले लगाते हुए

लाइफ में ऐसे आया यू टर्न

 

- “ मैं रोज पुणे में ओला कैब चलाता था। एक दिन गणेश बाबू नाम के एक रिटायर्ड कर्नल ने मेरी कैब को बुक किया। गाड़ी में बैठने के कुछ देर बाद ही हम दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई।

- गणेश बाबू मेरी बातों से काफी इम्प्रेस हुए। उन्होंने मुझसें मेरी क्वालिफिकेशन पूछा। मैंने उन्हें अपनी पढ़ाई के बारे में सब कुछ बता दिया। उसके बाद उन्होंने मुझें कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) एग्जाम के बारे में बताया।

- मैं भी उनकी बातों से काफी इम्प्रेस हुआ था। मैंने बीएससी की पढ़ाई कम्प्लीट होने के बाद रिटायर्ड कर्नल के मार्गदर्शन में 2016 में सीडीएस का एग्जाम दिया। फर्स्ट अटेम्प्ट में ही मेरा उसमें सेलेक्शन हो गया।

- मैंने फोन कर रिटायर्ड कर्नल को अपने सेलेक्शन के बारे में बताया। वे बहुत ज्यादा खुश हुए। मेरी काफी हौसला आफजाई की। उन्होंने मुझें आर्मी के डिसीप्लीन के बारे में भी जानकारी दी”।

 

बुलेट चलाते हुए ओम पैठाने बुलेट चलाते हुए ओम पैठाने

अब बनेंगे आर्मी ऑफिसर


- “मैंने अप्रैल 2017 में चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में कैडेट के रूप में ट्रेनिंग लेना शुरू किया। 10 मार्च 2018 को ये ट्रेनिंग कम्प्लीट हो रही है।

- उसी दिन ओटीए में 257 कैडेट की एक पासिंग आउट परेड निकाली जाएगी। मैं भी इस परेड में शामिल रहूंगा। -परेड खत्म होने के बाद मुझें कैडेट से इंडियन आर्मी आफिसर की पोस्ट पर अपाइंट किया जाएगा”।