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30 दिन छुट्‌टी, इसलिए 58 साल के जज ने 16 घंटे तक सुने 135 केस, तड़के 3:30 बजे तक खुला कोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट में 156 साल में पहली बार एेसा, सुबह 11 बजे सुनवाई शुरू होने के बाद सिर्फ 20 मिनट का लिया ब्रेक।

Dainik Bhaskar

May 06, 2018, 12:48 AM IST
जस्टिस शाहरुख जस्टिस शाहरुख

मुुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस शाहरुख जे कथावाला शुक्रवार सुबह से शनिवार तड़के तक लगातार 16 घंटे कोर्टरूम में सुनवाई करते रहे। तड़के 3:30 बजे तक खुले रहे उनके कोर्ट नंबर 20 में वकीलों और याचिकाकर्ताओं की भीड़ लगी रही।


दरअसल, गर्मी की छुटि्टयाें के चलते हाईकोर्ट 3 जून तक बंद रहेगा। शुक्रवार को आखिरी वर्किंग डे था। जस्टिस कथावाला छुट्‌टी पर जाने से पहले अपने समक्ष लगे ज्यादा से ज्यादा केस निपटाना चाहते थे। इसलिए साथी जजों के जाने के 10 घंटे बाद तक वह कोर्ट में बैठे रहे। उन्होंने 135 केस सुने। इनमें से 70 अनिवार्य थे।


58 साल के जस्टिस कथावाला ने इस दौरान सिर्फ 20 मिनट का ब्रेक लिया। उन्होंने बिना थके हर तर्क ध्यान से सुनकर आदेश पारित किए। कोर्ट के एक कर्मचारी के अनुसार इतनी लंबी सुनवाई के बाद लंबित काम निपटाने के लिए शनिवार सुबह वह तय वक्त पर चैंबर में पहुंच गए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट के 156 साल के इतिहास में पहला मौका है, जब तड़के 3.30 बजे तक कोर्ट खुला हो। यहां 30-40 साल से वकालत कर रहे लाेगों ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ कभी देखा-सुना नहीं है।

हफ्तेभर से रात को सुन रहे थे मामले

जस्टिस कथावाला अार्बिट्रेशन, इंटलेक्चुअल प्राॅपर्टी राइट्स और कॉमर्शियल मामलों की सुनवाई करते हैं। हाईकोर्ट की छुट्‌टी से पहले पेंडेंसी कम करने के लिए वह पिछले एक हफ्ते से आधी रात तक रुककर सुनवाई कर रहे थे। दो हफ्ते पहले भी उन्होंने अपने चैंबर में आधी रात तक एक केस की सुनवाई की थी। आमतौर पर हाईकोर्ट में सुनवाई सुबह 11 बजे शुरू होती है, लेकिन जस्टिस कथावाला 10 बजे ही कोर्टरूम में पहुंच जाते हैं।

देश के पूर्व चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की 150वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में कहा था कि सभी जज छुटि्टयों में पांच दिन काम करें। हर जज 25-30 केस निपटाएगा तो हजारों पेंडिंग केस कम हो जाएंगे।

पेंडेंसी: 3.10 करोड़ केस लंबित

- 60 हजार से ज्यादा केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं
- 40 लाख केस देश के 24 हाईकोर्ट में पेंडिंग हैं
- 2.74 करोड़ मुकदमे निचली अदालतों में लंबित हैं

वेकेंसी: 24 हाईकोर्ट में 38% पद

- सुप्रीम कोर्ट में जजों के 31 पद हैं, लेकिन सात खाली हैं।
- 24 हाईकोर्ट में 1079 जजों के पद मंजूर हैं, लेकिन 38 फीसदी यानी 413 खाली हैं।
- निचली अदालतों में भी जजों के 5,925 पद खाली हैं।

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