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संजय दत्त की समय पूर्व रिहाई मामले में कोई अनियमितता नहीं बरती गई- बॉम्बे हाईकोर्ट

पेरोल और अन्य छुट्टियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका निस्तारित की जाती है।

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 08:35 AM IST
court not found anomalies in sanjay dutt  jail release

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में अभिनेता संजय दत्त को मिली पांच साल की कैद की सजा पूरी होने से आठ महीने पहले ही जेल से निकल जाने देने में उसे राज्य सरकार की कोई गलती नहीं मिली। जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस भारती डांगरे की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार गृह विभाग के वैध दस्तावेजों की मदद से इस मामले में अपने निष्पक्षता के दावे की पुष्टि करने में सफल रही है।

पीठ ने कहा, ऐसी स्थिति में कोर्ट संजय दत्त को सजा में छूट और पुणे की येरवडा जेल में सजा काटने के दौरान उन्हें बार-बार दिए गए पेरोल और अन्य छुट्टियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका निस्तारित की जाती है।

पीठ ने कहा, ‘हमें राज्य सरकार के गृह विभाग द्वारा सौंपे गए रिकॉर्ड और उसके स्पष्टीकरण में कहीं कोई अंतर्विरोध नहीं मिला। विवेकाधिकार का कोई उल्लंघन सामने नहीं आया।’ जनहित याचिका में दावा किया गया है कि ऐसे कई कैदी हैं, जिन्होंने अनुकरणीय आचरण का परिचय दिया लेकिन संजय एकमात्र ऐसे थे, जिनका जेल प्रशासन ने पक्ष लिया। राज्य सरकार ने इस आरोप से इनकार किया।

अच्छे आचरण से सजा कम की थी राज्य सरकार ने
संजय दत्त को 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में एके-56 राइफल रखने और उसे नष्ट करने को लेकर दोषी ठहराया गया था। उन्होंने जेल में बतौर विचाराधीन कैदी एक साल चार महीने और सजायाफ्ता कैदी के तौर पर ढाई साल गुजारे। इस ढाई साल के दौरान वह पैरोल और अन्य छुट्टी पर पांच महीने से अधिक समय जेल से बाहर रहे। वह आठ महीने पहले ही अच्छे आचरण के कारण 25 फरवरी, 2016 को हमेशा के लिए जेल से बाहर आ गए क्योंकि राज्य सरकार ने उनकी सजा कम कर दी थी।

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