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मुंबई पहुंचते ही अजय देवगन के पापा को हुई थी जेल, शीशे में देख खाई थी ये कसम

बॉलीवुड के 'सिंघम' यानी अजय देवगन 49 साल के हो गए हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 02, 2018, 12:33 PM IST

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    पिता वीरू देवगन और बेटे अजय देवगन

    मुंबई.बॉलीवुड के 'सिंघम' यानी अजय देवगन 49 साल के हो गए हैं। 2 अप्रैल, 1969 को दिल्ली के पंजाबी फैमिली में जन्में अजय को 'पद्मश्री' मिल चुका है। गौरतलब है कि अजय उन बेहतरीन एक्टर्स में से हैं, जिन्हें दुनिया उनकी अपीरियंस के लिए नहीं, बल्कि एक्टिंग के लिए जानती है। अजय 26 साल से इस इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। वैसे आपको बता दें सिनेमा उनकी रगों में था। इसकी वजह थे उनके पिता वीरू देवगनजब मायानगरी पहुंचते ही पिता को हुई थी जेल...

    - बॉलीवुड इंडस्ट्री के फेमस एक्शन डायरेक्टर्स में शुमार वीरू देवगन पंजाब के अमृतसर से हैं। उन्होंने 80 से ज्यादा फिल्मों में एक्शन सीन कोरियोग्राफ किए हैं।
    - इंडस्ट्री में पिता के होने के कारण बॉलीवुड में किस्मत आजमाने में भले ही अजय का सफर आसान रहा हो, लेकिन वीरू देवगन के लिए यह किसी ख्वाब को सच करने जैसा था।
    - वीरू देवगन के लिए अपने शहर से मायानगरी पहुंचने तक का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। 1957 में उनके इस सफर की शुरुआत हुई।

    और पहुंच गए जेल
    - अजय देवगन के पिता को सिनेमा से बेहद लगाव था। हीरो बनने की ख्वाहिश लिए वे अपने दो दोस्तों के साथ मुंबई के लिए निकल पड़े।
    - दिलचस्प बात यह है कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट खरीदनी पड़ती है। विरार पहुंचते ही टीटी ने तीनों को बेटिकट पाकर पकड़ लिया।
    - विरार, ठाणे पुलिस स्टेशन के अंदर में आता था। इसलिए वीरू देवगन को अगले दिन दादर ट्रेन में बिठाकर ठाणे ले जाया गया।
    - यहां मजिस्ट्रेट के सामने उन्हें पेश किया गया। जहां उन पर जुर्माना लगाया गया। चूंकि फाइन भरने के लिए उनके पास तब पैसे नहीं थे, इसलिए जेल हो गई।

    टैक्सी तक साफ किया
    - जेल से छूटने के बाद वीरू के दोस्तों ने मुंबई में ही कुछ काम देखने का सोचा। लेकिन खुद को मायानगरी में एडजस्ट नहीं कर पाने चलते अमृतसर लौट गए। लेकिन वीरू को ये मंजूर नहीं था। उन्होंने कसम खाई थी कि जब तक मुंबई में अपना नाम नहीं बना लेंगे, वापस नहीं लौटेंगे।
    - इस दौरान उन्होंने लोगों की टैक्सियां तक साफ की। साथ ही पार्ट टाइम में कारपेंटर की नौकरी भी की। इस दौरान सपना पूरा करने के लिए स्टूडियो के चक्कर भी लगाना शुरू किया। लेकिन निराशा ही हाथ लगी। उन्हें समझ में आ गया कि उनका चेहरा 'हीरो फेस' नहीं है। फिर एक दिन शीशे में देखकर कहा-'मैं न सही, पर एक दिन मेरा बेटा हीरो जरूर बनेगा।' वो और कोई नहीं, बल्कि अजय देवगन हैं।

    फिर शुरू हुआ स्टंटमैन का सफर
    - मुंबई से लौटने के बाद वीरू अमृतसर में ही वो काम करने लगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके अंकल चाहते थे कि वो टैम्पू चलाए, लेकिन उन्हें यह काम पसंद नहीं था। इस वाक्ये के कुछ दिन बाद वे वापस मायानगरी लौटे। इस बार उन्हें फिल्म ‘अनीता’ में बतौर स्टंटमैन का काम मिला। यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई।
    - इसके बाद स्टंटमैन के तौर पर उन्होंने कई फिल्में की, जिनमें उनके काम को काफी सराहा गया। लगभग 81 फिल्मों में उन्होंने एक्शन सीन को कोरियोग्राफ किया है। इनमें लाल बादशाह, प्रेमग्रंथ, दिलवाले, जिगर, शहंशाह, मिस्टर इंडिया, बॉक्सर, दोस्ताना, खून भरी मांग जैसी फिल्में शामिल हैं। 2016 में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट से नवाजा जा चुका है।

  • मुंबई पहुंचते ही अजय देवगन के पापा को हुई थी जेल, शीशे में देख खाई थी ये कसम
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    एक इवेंट के दौरान पिता के साथ अजय देवगन
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    पिता वीरू देवगन और बेटे अजय देवगन
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    एक इवेंट के दौरान पिता के साथ अजय देवगन
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