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माेदी लहर का दावा, पर उपचुनाव से डर रही बीजेपी

कुछ लोकसभा सीटों पर उपचुनाव में जाने से कतरा रही भाजपा, महाराष्ट्र की गोंदिया-भंडारा सीट भी इनमें शामिल

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:18 AM IST

नई दिल्ली. भाजपा भले ही देश मंे मोदी लहर कायम रहने का दावा कर रही है, परंतु खाली हुई कुछ लोकसभा सीटों पर उपचुनाव में जाने से वह कतरा रही है। महाराष्ट्र की गोंदिया-भंडारा लोकसभा सीट भी इनमें शामिल है, जहां के सांसद नाना पटोले ने पिछले वर्ष 8 दिसंबर को किसानों के मसले पर संसद व भाजपा की सदस्यता छोड़ने की घोषणा की थी। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उनका इस्तीफा 14 दिसंबर को स्वीकार कर लिया था। बावजूद इसके अब तक इस सीट पर उपचुनाव की तिथि सामने नहीं आई है।

गोरखपुर के साथ गोंदिया-भंडारा में चुनाव क्यों नहीं

दिलचस्प यह कि चुनाव आयोग उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा खाली की गई गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर 11 मार्च को उपचुनाव करा रहा है। लेकिन गोंदिया-भंडारा सीट अभी आयोग की नजर में नहीं आई है। बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष ने नाना पटोले का इस्तीफा योगी आदित्यनाथ और केशवप्रसाद मौर्य के इस्तीफे से पहले स्वीकार किया था। नाना का इस्तीफा 14 दिसंबर 2017 को स्वीकार हुआ था। योगी और मौर्य का इस्तीफा स्वीकार करने की घोषणा चार दिन बाद 18 दिसंबर को की गई थी।

सूत्र बताते हैं कि राजस्थान सहित कुछ राज्यों मंे हुए उपचुनाव के नतीजे जिस तरह भाजपा के प्रतिकूल रहे हैं, उसके बाद सत्ताधारी दल एक साथ सभी सीटों पर उपचुनाव में जाने से डर रहा है। भाजपा की रणनीति रिक्त लोकसभा सीटों पर किस्तों में उपचुनाव कराने की है, ताकि भाजपा उम्मीदवार हारता भी है तो उसे मीडिया में ज्यादा तबज्जो नहीं मिले। खास बात यह कि चुनाव आयोग भी भाजपा की सोच के साथ किस्तों में उपचुनाव कराने को राजी है।

संभावित हार से सहमा सत्ताधारी दल
सूत्र बताते हैं कि गोंदिया-भंडारा सीट को लेकर भाजपा में कहीं ज्यादा बेचैनी है। पार्टी का मानना है कि यदि इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार हारता है तो इसका सीधा संदेश यह जाएगा कि किसानों व पिछड़े वर्ग की नाराजगी उस पर भारी पड़ रही है।

बता दें कि नाना पटोले ने किसानों के प्रति भाजपा सरकार की बेरुखी का हवाला देते हुए लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया है। इस सीट पर भाजपा की हार हुई तो विपक्ष के साथ सहयोगी शिवसेना को भी उस पर आक्रमण का एक बढ़िया मौका मिल जाएगा। भाजपा इस बात से भी आशंकित है कि यदि इस सीट पर उसकी जीत मामूली अंतर से हुई, तब भी इसे भाजपा की असफलता के रूप में पेश किया जाएगा। लिहाजा सत्ताधारी दल इस सीट पर उपचुनाव कराने में हीलाहवाली कर रहा है।

भाजपा संभावित हार से डर गई है। भाजपा को पता है कि लोकसभा के तहत आने वाली सभी छह विधानसभा सीटों पर उसकी हालत खराब है। यदि अभी चुनाव हुए तो उसे उसकी हैसियत पता चल जाएगी।

-नाना पटोले, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस