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हर जिले में बनाए जाएंगे कैंसर जांच सेंटर, हेल्थ मिनिस्टर ने सदन में बताया

बदलती जीवन शैली से बढ़े मरीज, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सावंत ने विधानसभा में बताया

Danik Bhaskar | Mar 27, 2018, 02:18 AM IST
बदलती जीवन शैली से बढ़े मरीज, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सावंत ने विधानसभा में बताया बदलती जीवन शैली से बढ़े मरीज, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सावंत ने विधानसभा में बताया

मुंबई. राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों में कैंसर जांच केंद्र बनाएगी। सोमवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत ने विधानसभा में यह जानकारी देेते हुए बताया कि राज्य के ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में कैंसर के मरीज अधिक संख्या में हैं। महानगरों में प्रति एक लाख व्यक्तियों में से 90 से 100 लोग कैंसर से ग्रस्त हैं, जबकि छोटे शहरों में यह आंकड़ा प्रति लाख 60 से 70 है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति थोड़ी ठीक है।

- सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उल्हास पाटील ने कोल्हापुर जिले में कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या का सवाल उठाया था। इसके जवाब में डॉ. सावंत ने कहा कि राज्य के हर जिला अस्पताल में चरणबद्ध तरीके से कैंसर जांच केंद्र बनाए जाएंगे। मुंबई के मालवणी (मालाड) में मुफ्त कैंसर जांच केंद्र शुरू किया जा चुका है।

-vस्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में कैंसर के मरीजों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में कैंसर मरीजों की संख्या प्रति लाख पर 40 से 50 है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इंग्लैंड जैसे विकसित देश में एक लाख लोगों पर कैंसर के मरीजों की संख्या 300 से 400 है।

- चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने महिलाओं के सरवाइकल और स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता प्रकट की और महात्मा फुले जीवन आरोग्य योजना के तहत तीसरी और चौथी कीमो थैरेपी को शामिल करने की मांग की। फिलहाल इस योजना के अंतर्गत पहली और दूसरी कीमो थैरेपी की ही सुविधा मिलती है। सावंत ने कहा कि सरकार इस विषय पर विचार करेगी।

मोटापे से बढ़ रहा स्तन कैंसर
सावंत कहा कि महिलाओं में स्तन कैंसर मोटापे की वजह से बढ़ रहा है, जबकि साफ सफाई के अभाव में सरवाइकल कैंसर होता है। उन्होंने कहा कि गोवंडी में 300 फ्लैट की दो इमारतों में कैंसर के मरीजों के रहने की व्यवस्था करने पर सरकार विचार कर रही है। यहां सस्ती दरों पर मरीजों को अनाज उपलब्ध कराया जाएगा तथा बच्चों के लिए पालनाघर भी होंगे। इसके अलावा वहां डॉक्टर भी तैनात होंगे। फिलहाल इस मामले की फाइल शहरी विकास विभाग के पास है।

तीन लाख चूहे नहीं गोलियों की थी संख्या

- पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता एकनाथ खडसे द्वारा उठाया गया मंत्रालय का कथित चूहा घोटाला सरकार की गले की फांस बन गया है।

- सार्वजनिक निर्माणकार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील ने विधानसभा में सफाई दी कि 3,19,400 जहरीली गोलियों की संख्या थी, मारे गए चूहों की नहीं।

- सरकार ने दावा किया है कि चूहा मारने के लिए नहीं बल्कि चूहों को मंत्रालय से भगाने के लिए यह कदम उठाया गया था।

- मंत्री चंद्रकांत पाटील ने बताया कि मंत्रालय के अहम नेटवर्क का केबल व दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और बिजली के तारों को शार्टसर्किट से बचाने के लिए मंत्रालय की मुख्य इमारत, विस्तारित इमारत और परिसर से चूहे भगाने के लिए 1984 से जहरीली गोलियां रखने का काम किया जाता रहा है। काम का 33 फीसदी हिस्सा मजदूर संस्थाओं से कराया जाता है। इसीलिए यह काम विनायक मजदूर संस्था को दिया गया।


संस्था के पते पर

- सफाई देते हुए मंत्री पाटील ने कहा कि संबंधित रकम संस्था के चालू बैंक खाते में जमा कराई गई थी। बैंक ने संस्था से जुड़ी सभी जानकारियों की जांच की थी। इसके बावजूद सवाल उठने के बाद डीडीआर को संस्था से जुड़ी जानकारी लेने के लिए खत लिखा गया है।

- गौरतलब है कि भाजपा विधायक एकनाथ खडसे ने आरटीआई से मिली जानकारी के हवाले से सदन में कहा था कि मंत्रालय में एक सप्ताह के भीतर तीन लाख चूहे मार दिए गए। उन्होंने इसे घोटाला बताया।


2.40 लाख की रकम को दी गई थी मंजूरी
इसके लिए दो लाख 40 हजार रुपए की रकम को मंजूरी दी गई। चूहे भगाने के लिए 3,19,400 गोलियां उपलब्ध कराई गईं थीं। काम के लिए दो महीने की समयावधि थी लेकिन इसे सिर्फ सात दिनों में पूरा कर लिया गया।