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महिलाओं को पत्थर तोड़ते देखा तो छोड़ी नौकरी, 3 लाख का जीवन बदल चुकी हैं

यह पहली बार है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 50 साल के इतिहास में सभी को- प्रेसिडेंट महिलाएं हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 21, 2018, 04:54 AM IST
चेतना  ने प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर लोगों की मदद करने की ठानी। वे पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं। चेतना ने प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर लोगों की मदद करने की ठानी। वे पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं।

मुंबई। यह पहली बार है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 50 साल के इतिहास में सभी को- प्रेसिडेंट महिलाएं हैं। ये दुनिया में बेस्ट काम करने वाली पांच महिलाएं हैं। इनमें से भारत की ओर से मानदेशी फाउंडेशन चलाने वाली चेतना गाला सिन्हा भी हैं। इनके साथ क्रिस्टीन लेगार्डे (आईएमएफ), नार्वे की प्रधानमंत्री एरना सोलबर्ग, आईबीएम की चीफ जिनी रोमेटी जैसी महिलाएं हैं। यह सम्मेलन दावोस में 23 से 26 जनवरी तक चलेगा। चेतना प्रोफेसर थीं लेकिन महिलाओं की स्थिति ने उन्हें ऐसा झकझोरा कि उन्हें नौकरी छोड़ गरीबों के लिए फाउंडेशन चलाना शुरू किया।

मुंबई यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स ली डिग्री

- मुंबई में कच्छी गुजराती गाला परिवार में पांच भाई थे। ज्वाइंट परिवार था। पांचों भाई नल बाजार में किराने की दुकान चलाते थे। इन्हीं में से एक भाई मगनलाल गाला की बेटी चेतना हैं, जिनकी चार बहनें, दो भाई हैं।

- भास्कर से बात करते हुए चेतना ने बताया कि मेरी इकोनॉमिक्स में रुचि थी, लिहाजा मुंबई यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स डिग्री ले ली।

- उन दिनों जयप्रकाश नारायण का आंदोलन चल रहा था तो इकोनॉमिक्स की स्टूडेंट होने के कारण मेरी रुचि इस समाजवादी आंदोलन में भी थी। फिर नौकरी मिल गई तो प्रोफेसर बन गई।
- वे बताती हैं बात 1981 की है। मैं और विजय सिन्हा जेपी आंदोलन से जुड़े हुए थे। दोनों सतारा जिले के अकालग्रस्त इलाकों में लोगों की स्थितियां देखने गए। तब भी रोजगार गारंटी योजना हुआ करती थी। रोजगार के नाम पर महिलाओं से पत्थर तोड़ने का काम कराया जाता था।

- उन्हें देख मेरे मन में ये भाव आया कि ये काम तो उम्रकैद भुगतने वाले कैदियों को दिया जाता है। सम्मान अपनी रोटी जुटाने वाली महिला को ये काम क्यों दिया जाता है?

- सवालों ने मुझे घेर लिया और मन विकल्प भी सुझाता जा रहा था कि क्या कोई इस तरह का काम नहीं दे सकते, जो महिलाओं और पुरुषों के लिए ठीक हो और जिससे समाज का भला भी हो।

बदल चुकी हैं 3 लाख का जीवन

- उन्हीं दिनों सतारा जिले में ही एक घटना और घटी, एक महिला जो रोड पर चाकुओं की धार करती थीं, वह बैंक में पैसे जमा कराना चाहती थी, लेकिन किसी ने उसे तवज्जो नहीं थी। वह महिला मिन्नतें करती रहीं कि मुझे एक टपरी खरीदना है, इसलिए बचत करना चाहती हूं, लेकिन बैंक अफसर टस से मस नहीं हुए।

- दरअसल, उन दिनों बहुत गर्मी थी औा मैंने महिला से बात की तो कहने लगी कि इस इलाके में 49 डिग्री तक तापमान रहता है और इतनी गर्मी में बच्चों को चक्कर आ जाते हैं और वे बेहोश हो जाते हैं, इसलिए मैं एक झोपड़ी में उन्हें सुरक्षित रखना चाहती हूं।

- ये सुनकर मैं सिहर उठी, मेरे जेहन में ये घटना हमेशा रहीं। मैंने 1986 में जब विजय से शादी की तो उसके बाद अपनी इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर लोगों की मदद करने की ठानी।

- चेतना बताती हैं कि उन्होंने सबसे पहले इन महिलाओं की मदद के लिए 1996 में सहकारी बैंक बनाने का फैसला किया, लेकिन रिजर्व बैंक की ओर से लाइसेंस सिर्फ इसलिए नहीं मिला, क्योंकि प्रमोटर के रूप में शामिल महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं थीं।

- बता दें कि तब चेतना ने सतारा के अकालग्रस्त इलाकों में जाकर पढ़ाना शुरू किया और पांच ही महीने के बाद फिर से लाइसेंस के लिए अप्लाई किया। रही बात पत्थर तोड़ने की तो चेतना के कोशिशों से ही बीते समय में में इसी अकालग्रस्त इलाके में बांध बनाने का काम मिलने लगा और जो इलाका अकालग्रस्त था, वह हरा-भरा हो गया।

- छोटी बचत और छोटे कर्ज महिलाओं को देने के लिए ही वे काम करती हैं। अभी मानदेशी बैंक के 90 हजार क्लाइंट्स हैं और 3 लाख 10 हजार महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

पूरी तरह वेजिटेरियन हैं चेतना

- पति विजय अभी खेती ही करते हैं। चेतना पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं। विदेश में सलाद और फलों पर ही निर्भर रहती हैं। तीन बच्चे हैं।

- प्रभात सबसे बड़े हैं, जो मानदेशी में ही स्पोर्ट्स प्रोग्राम देखते हैं। इसके बाद जुड़वा हैं, करण इसके बाद जुड़वा हैं, करण ने राजनीति की पढ़ाई की है। पार्थ लंदन में म्यूजिक में मास्टर्स डिग्री ले रहे हैं।
- करीब तीन करोड़ सीमांत और छोटे किसानों के लिए कर्ज की पूर्ण माफी होगी। अन्य एक करोड़ किसानों के संबंध में सभी कर्जों के लिए एक बारगी निपटान योजना की घोषणा।

- कर्ज माफी के लिए कुल मूल्य 50 हजार करोड़ रु और एक बारगी निपटान लोन के लिए 10 हजार करोड़ रु के ओवरड्यू लोन को राहत का अनुमान है।


पब्लिग डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम

- पीडीएस और अन्य कल्याण कार्यक्रमों के तहत फूड सब्सिडी के लिए 32,667 करोड़ रुपए का प्रावधान।

- प्रायोगिक आधार पर स्मार्टकार्ड आधारित वितरण प्रणाली, हरियाणा और चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र में आरंभ किया जाना।

चेतना पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं। चेतना पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं।
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चेतना  ने प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर लोगों की मदद करने की ठानी। वे पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं।चेतना ने प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर लोगों की मदद करने की ठानी। वे पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं।
चेतना पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं।चेतना पूरी तरह से वेजिटेरियन हैं।
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