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इस जेल में बैन नोटों का हो रहा ऐसा इस्तेमाल, कैदी रोजाना कर रहे हैं कमाई

आरबीआई ने नोटबंदी में बैन हुए 500, 1,000 रुपए के 70 टन कटे नोट दिए हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2018, 12:20 AM IST
बंद हुए नोटों को चेन्नई की पुजल सेंट्रल जेल में रिसाइकिल किया जा रहा है। बंद हुए नोटों को चेन्नई की पुजल सेंट्रल जेल में रिसाइकिल किया जा रहा है।

चेन्नई. नोटबंदी में बैन हुए 500 और 1000 रुपए की करंसी को चेन्नई की पुजल सेंट्रल जेल में रिसाइकिल किया जा रहा है। इसके लिए रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया जेल एडमिनिस्ट्रेशन को करीब 70 टन नोट दिए जाएंगे। इसमें से 9 टन कतरन जेल में लाई जा चुकी है। इन नोटों को एक प्रॉसेस से गुजारने के बाद स्टेशनरी का रूप दे दिया जाता है। खास बात ये है कि इस काम को जेल के सजायाफ्ता कैदियों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है। उन्हें इस काम के एवज में मेहनताना भी दिया जा रहा है।

इस तरह की स्टेशनरी बनाने वाला ये देश का पहला सेंट्रल जेल

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20-25 कैदी रोजाना पुराने नोटों को रिसाइकिल कर स्टेशनरी जैसे- फाइल पैड बना रहे हैं। पुजल जेल के कैदियों को इसके लिए 160 से 200 रुपए रोजाना मेहनताना दिया जा रहा है और 8 घंटे काम लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पुराने नोटों से इस तरह की स्टेशनरी बनाने वाला ये देश का पहला सेंट्रल जेल है।

अब तक 1.5 टन पुराने नोट हो चुके हैं रिसाइकिल

- जेल डीआईजी ए. मुरुगेसन ने न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में बताया - "रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हमें चलन से बाहर हुए नोटों के टुकड़े देने की पेशकश की थी। जेल को दिए जाने वाले 70 टन में से अब तक नौ टन वजन के नोट मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि फाइल पैड बनाने में अब तक 1.5 टन पुराने नोटों को इस्तेमाल में लाया चुका है।"

बैन नोट रखने पर लग सकता है जुर्माना

- 8 नवंबर 2016 को भारत सरकार के नोटबंदी के एलान के बाद से ही 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट चलन से बाहर किए जा चुके हैं।

- बता दें कि नोटबंदी के बाद सरकार के जारी किए गए ऑर्डिनेंस के मुताबिक, नोटबंदी के बाद चलन से बाहर किए गए 500 और 1000 के नोट रखने पर जुर्माना लग सकता है और तो और जेल भी हो सकती है।

बैन हो चुके नोट की कतरन को जेल भेजा गया है। कुल 70 टन कतरन यहां लाई जाएगी। बैन हो चुके नोट की कतरन को जेल भेजा गया है। कुल 70 टन कतरन यहां लाई जाएगी।
जेल को दिए जाने वाले 70 टन में से अब तक नौ टन कतरन मिल चुकी है। जेल को दिए जाने वाले 70 टन में से अब तक नौ टन कतरन मिल चुकी है।
फाइल पैड बनाने में अब तक 1.5 टन पुराने नोटों को इस्तेमाल में लाया जा चुका है। फाइल पैड बनाने में अब तक 1.5 टन पुराने नोटों को इस्तेमाल में लाया जा चुका है।
पुजल जेल के कैदियों को इसके लिए 160 से 200 रुपए रोजाना मेहनताना दिया जा रहा है। पुजल जेल के कैदियों को इसके लिए 160 से 200 रुपए रोजाना मेहनताना दिया जा रहा है।
इन नोटों को एक प्रॉसेस से गुजारने के बाद स्टेशनरी का रूप दे दिया जाता है। इन नोटों को एक प्रॉसेस से गुजारने के बाद स्टेशनरी का रूप दे दिया जाता है।
बैन हुए नोटों को रिसाइकिल कर स्टेशनरी बनाने की प्रॉसेस में जुटे कैदी। बैन हुए नोटों को रिसाइकिल कर स्टेशनरी बनाने की प्रॉसेस में जुटे कैदी।
पुजल सेंट्रल जेल में कैदी ब्रेड बनाने का काम भी करते हैं। पुजल सेंट्रल जेल में कैदी ब्रेड बनाने का काम भी करते हैं।
पुराने नोटों से इस तरह की स्टेशनरी बनाने वाला ये देश का पहला सेंट्रल जेल है। पुराने नोटों से इस तरह की स्टेशनरी बनाने वाला ये देश का पहला सेंट्रल जेल है।
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बंद हुए नोटों को चेन्नई की पुजल सेंट्रल जेल में रिसाइकिल किया जा रहा है।बंद हुए नोटों को चेन्नई की पुजल सेंट्रल जेल में रिसाइकिल किया जा रहा है।
बैन हो चुके नोट की कतरन को जेल भेजा गया है। कुल 70 टन कतरन यहां लाई जाएगी।बैन हो चुके नोट की कतरन को जेल भेजा गया है। कुल 70 टन कतरन यहां लाई जाएगी।
जेल को दिए जाने वाले 70 टन में से अब तक नौ टन कतरन मिल चुकी है।जेल को दिए जाने वाले 70 टन में से अब तक नौ टन कतरन मिल चुकी है।
फाइल पैड बनाने में अब तक 1.5 टन पुराने नोटों को इस्तेमाल में लाया जा चुका है।फाइल पैड बनाने में अब तक 1.5 टन पुराने नोटों को इस्तेमाल में लाया जा चुका है।
पुजल जेल के कैदियों को इसके लिए 160 से 200 रुपए रोजाना मेहनताना दिया जा रहा है।पुजल जेल के कैदियों को इसके लिए 160 से 200 रुपए रोजाना मेहनताना दिया जा रहा है।
इन नोटों को एक प्रॉसेस से गुजारने के बाद स्टेशनरी का रूप दे दिया जाता है।इन नोटों को एक प्रॉसेस से गुजारने के बाद स्टेशनरी का रूप दे दिया जाता है।
बैन हुए नोटों को रिसाइकिल कर स्टेशनरी बनाने की प्रॉसेस में जुटे कैदी।बैन हुए नोटों को रिसाइकिल कर स्टेशनरी बनाने की प्रॉसेस में जुटे कैदी।
पुजल सेंट्रल जेल में कैदी ब्रेड बनाने का काम भी करते हैं।पुजल सेंट्रल जेल में कैदी ब्रेड बनाने का काम भी करते हैं।
पुराने नोटों से इस तरह की स्टेशनरी बनाने वाला ये देश का पहला सेंट्रल जेल है।पुराने नोटों से इस तरह की स्टेशनरी बनाने वाला ये देश का पहला सेंट्रल जेल है।
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