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फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की रिलीज का रास्ता साफ, हाईकोर्ट पहुंचे सेंसर बोर्ड को झटका

उपन्यासकार डॉ. काशीनाथ सिंह के सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘काशी का अस्सी’ पर आधारित है ये फिल्म।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 06, 2018, 07:48 AM IST

फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की रिलीज का रास्ता साफ, हाईकोर्ट पहुंचे सेंसर बोर्ड को झटका

मुंबई. दिल्ली हाईकोर्ट ने लंबे समय से प्रदर्शन के लिए सेंसर सर्टिफिकेट का इंतजार कर रही फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ के रिलीज की राह में रोड़ा बन रहे सेंसर बोर्ड को तगड़ा झटका दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2017 को सेंसर बोर्ड को एक कट के साथ फिल्म को प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत के इस आदेश के खिलाफ सेंसर बोर्ड ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसी के साथ अब फिल्म के प्रदर्शन का रास्ता करीब-करीब साफ हो गया है। अब यदि बोर्ड फिल्म के प्रदर्शन के लिए जरुरी प्रमाणपत्र जारी नहीं करता है तो उसे न्यायालय की अवमानना का भी सामना करना पड़ सकता है। बशर्ते बोर्ड हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती न दे।

क्या है मामला

- उपन्यासकार डॉ. काशीनाथ सिंह के सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘काशी का अस्सी’ पर आधारित फिल्म मोहल्ला अस्सी में धार्मिक कुरीतियों को उजागर किया गया है। साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आध्यात्मिक शहर काशी के बढ़ते व्यावसायीकरण को दिखाया गया है। फिल्म के निर्माता व सेंसर बोर्ड के बीच उस समय से तनातनी शुरू हो गई थी जब सेंसर बोर्ड की कमेटी ने फिल्म को सर्टीफिकेट देने से इनकार कर दिया था।

-यह तल्खी और बढ़ गई जब सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी ने भी प्रमाणपत्र जारी करने में बेरुखी दिखाई। मामला फिल्म सर्टिफिकेट ट्रिब्यूल में गया। वहां पर भी फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं मिला।

-ट्रिब्यूनल के आदेश को फिल्म निर्माता ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौैती दी। हाईकोर्ट ने एक कट के साथ सेंसर बोर्ड को इस फिल्म के लिए ए (केवल वयस्कों के लिए) सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सेंसर बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।

तो दायर करेंगे अवमानना याचिका

हाईकोर्ट के इस फैसले से खुश इस फिल्म के निर्माता विनय तिवारी ने कहा- फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। सेंसर बोर्ड इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना रहा है। इसलिए वह अदालत के निर्देश के तहत सर्टिफिकेट नहीं जारी कर रहा है। अब यदि 12 जनवरी तक प्रमाणपत्र नहीं जारी किया जाता तो हम न्यायालय की अवमानना की याचिका दायर करेंगे।

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