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मुकेश अंबानी के पिता ने की थी 8 साल नौकरी, जानिए क्यों सस्पेंड हो गए थे धीरूभाई

पढ़ें, मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई की जिंदगी के 8 रोचक किस्से।

Danik Bhaskar

Mar 27, 2018, 12:15 AM IST

मुंबई. मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश और श्लोका मेहता की गोवा में 24 मार्च को प्री-एंगेजमेंट सेरेमनी हुई। बताया जा रहा है कि अब आकाश-श्लोका की सगाई मुंबई में होगी। शादी इस साल दिसंबर में हो सकती है। 26 साल के आकाश मुकेश और नीता अंबानी के तीन बच्चों में सबसे बड़े बेटे हैं। ईशा उनकी जुड़वां बहन हैं। जबकि अनंत इनसे छोटे हैं। सबसे बड़ी बात है, आकाश और श्लोका ने धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में एक साथ पढ़े हैं।

इस मौके पर DainikBhaskar.com मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई की जिंदगी के 8 रोचक किस्से बता रहा है। धीरूभाई मई 1950 में नौकरी के लिए यमन गए थे और दिसंबर 1958 में रिलायंस कंपनी खोलने के लिए वापस इंडिया आए। जब दोस्त ने बचाई थी धीरूभाई की जॉब...

- शाम 4:30 बजे तक धीरूभाई बेसे एंड कंपनी में काम करते थे। बचे हुए समय में वो वहां की अरब और इंडियन कम्युनिटी के लोगों के साथ बैठकर बिजनेस और ट्रेडिंग सीखते थे।

- ट्रेडिंग और हिसाब-किताब का काम सीखने के लिए धीरूभाई ने कुछ महीने ऑफिस के बाद फ्री में भी काम किया था। इसके चलते एक बार धीरूभाई की जॉब जाते-जाते बची थी।
- धीरूभाई के साथ काम करने वाले हिम्मत भाई जगानी के मुताबिक, 'धीरू दादा और जमनादास दोनों बेसे कंपनी में साथ काम करते थे।

- कंपनी को जब यह पता चला तो मैनेजमेंट ने दोनों को बुलाया और सस्पेंड कर दिया। बाद में जमनादास ने सारी गलती की जिम्मेदारी खुद लेकर कंपनी से इस्तीफा दे दिया और धीरूभाई की नौकरी बच गई।

जब धीरूभाई ने खरीदी थी- अपने काले रंग जैसी कार...


- 1955 में शादी के बाद जब पहली बार कोकिलाबेन यमन पहुंची तो धीरूभाई उन्हें अपनी ब्लैक कार से लेने पहुंचे। जबकि इससे पहले उन्होंने कार देखी तक नहीं थी।
- इस किस्से के बारे में बताते हुए कोकिलाबेन ने कहा था कि यमन जाने से पहले धीरू ने उन्हें एक लेटर लिखा, जिसमें ये लिखा था कि ‘कोकिला मैंने एक कार ली है। इसी से तुम्हें लेने आऊंगा। तुम कार का कलर गेस करो..। लेटर में कार के कलर को लेकर हिंट देते हुए धीरूभाई ने लिखा था कि वो ब्लैक है.. बिल्कुल मेरी तरह। कोकिलाबेन से एक गुजराती मैगजीन को दिए इंटरव्यू में इस किस्से का जिक्र किया था।

धीरूभाई ने दोस्त से उधार लिया था रिलायंस का नाम


- धीरूभाई ने जिस रिलायंस नाम की कंपनी खोली थी, वो नाम उन्होंने अपने यमन के दोस्त प्रवीणभाई ठक्कर से उधार लिया था।
- 2002 में दिए एक इंटरव्यू में प्रवीण ने बताया था, 'रिलायंस नाम धीरूभाई ने मुझसे उधार लिया था। 1953 में मैंने रोलेक्स और कैनन की एजेंसी ली और रिलायंस स्टोर नाम रखा। स्टोर चल निकला और कुछ ही सालों में मेरे पास मर्सडीज थी।'
- 'ये देखकर धीरूभाई मेरे पास आए और बोले मुझे रिलायंस नाम पसंद है। ये नाम कस्टमर के भरोसे को दर्शाता है। इसी नाम के स्टोर के चलते मेरे सामने देखते ही देखते तुमने मर्सडीज जैसी महंगी कार ले ली। वाकई में रिलायंस लकी नाम है। मुझे ये नाम दे दो।'
- ठक्कर ने इंटरव्यू में बताया, कुछ महीनों बाद धीरूभाई ने शादी कर ली। बाद में इंडिया आकर रिलायंस नाम से कंपनी खोली।
- 1977 में राजकोट की रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक मीटिंग में धीरूभाई ने खुद ये बात कबूल की थी कि उन्होंने रिलायंस नाम अपने दोस्त से उधार लिया था।

जब धीरूभाई ने खरीदी थी- अपने काले रंग जैसी कार...


- 1955 में शादी के बाद जब पहली बार कोकिलाबेन यमन पहुंची तो धीरूभाई उन्हें अपनी ब्लैक कार से लेने पहुंचे। जबकि इससे पहले उन्होंने कार देखी तक नहीं थी।
- इस किस्से के बारे में बताते हुए कोकिलाबेन ने कहा था कि यमन जाने से पहले धीरू ने उन्हें एक लेटर लिखा, जिसमें ये लिखा था कि ‘कोकिला मैंने एक कार ली है। इसी से तुम्हें लेने आऊंगा। तुम कार का कलर गेस करो..। लेटर में कार के कलर को लेकर हिंट देते हुए धीरूभाई ने लिखा था कि वो ब्लैक है.. बिल्कुल मेरी तरह। कोकिलाबेन से एक गुजराती मैगजीन को दिए इंटरव्यू में इस किस्से का जिक्र किया था।

एक शर्त को पूरा करने जब समुद्र में कूद गए थे धीरूभाई


- धीरूभाई के साथ काम करने वाले हिम्मत भाई जगानी के बेटे परूभाई जगानी के मुताबिक, 'जब शुरुआत में धीरू दादा यमन आए तो उनकी बहुत खिंचाई होती थी। एक बार शाम को सबने धीरूभाई से समुद्र में कूदकर 2 मिनट नीचे रहने की शर्त लगाई।
- उन्होंने कहा- जीतने पर आइसक्रीम पार्टी लेंगे। इसके बाद वो समुद्र में कूदे और 2 मिनट नीचे रहकर वापस जहाज पर आ गए। ये देख सभी दंग रह गए। कारण समुद्र में शार्क आने की जानकारी के बावजूद उन्होंने शर्त जीता था।

दोस्त चाहते थे लंदन में चलकर बिजनेस करें धीरूभाई


- 1958 में जब यमन आजाद हो रहा था, तब वहां के हालात के चलते सभी कंपनियों से काम छोड़कर लोग जाने लगे थे। धीरूभाई के कई दोस्तों ने यमन से लंदन बसने का प्लान किया। धीरूभाई को भी वहां चलकर रिलायंस कंपनी स्टार्ट करने को कहा। लेकिन उन्होंने अपने देश में बिजनेस करने की बात कही।
- दिसंबर 1958 में धीरूभाई ने जब यमन की नौकरी छोड़ी थी, तब उनकी लास्ट सैलरी 1100 रुपए महीना था। उस समय उन्होंने 3000 डॉलर की सेविंग लेकर इंडिया आए थे।

जब चोरी से सारा दूध पी जाते थे धीरूभाई


- धीरूभाई के दोस्त भरतभाई शाह ने बताया, 'मैं और धीरू 1950 से 1958 तक 8 साल एक ही कंपनी 'ए. बेसे एंड कंपनी' में रहे। हमाने जूनियर क्लर्क पोस्ट से शुरूआत की थी। उस दौरान धीरू 28 लोगों में सबसे भीमकाय थे।'

- 'उन्हें हम गामा पहलवान कहते थे। मेस में धीरूभाई को 1 गिलास दूध मिलता था, लेकिन इससे उनका पेट नहीं भरता। 11 बजे के बाद वे चुपचाप उठते और सारा दूध पी जाते थे।'

जब यमन की करेंसी से 1 लाख रुपए कमा सबको कर दिया हैरान


- उन दिनों मेस में खाने की व्यवस्था देखने वाली टीम के मेंबर एलाद के मुताबिक, धीरूभाई बेहतरीन बिजनेस माइंड के थे। 1950 दशक के शुरुआत में रियाल लगातार मार्केट से गायब हो रहा था। उसे गलाकर उसमें से चांदी निकालकर लंदन मेटल एक्सचेंज में बेचने की बात सामने आई।
- इसको लेकर अरब की ट्रेजरी के ऑफिसर्स ने ट्रेस किया तो पता चला कि इंडिया से आया एक क्लर्क धीरूभाई ऐसा कर रहे हैं। अधिकारी नोटिस लेकर पहुंचे। हालांकि, इस मामले में आगे कुछ नहीं हुआ।
- एलाद के मुताबिक, धीरूभाई ने देखा कि यमन में रियाल की बाजार में जितनी वैल्यू है उससे ज्यादा उसके अंदर चांदी लगी है। इसके बाद वो 3 महीने तक रियाल खरीदते.. उसमें से चांदी निकालते और लंदन बुलियान में ज्यादा रेट पर बेच देते। इससे उन्होंने 1 लाख रुपए से ज्यादा कमाई की थी।

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