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12 राज्यों में फसल पर कीटों का हमला, 20 फीसदी तक नुकसान

कपास, गेंहू, टमाटर, प्याज, सोयाबीन सहित कई फसलें प्रभावित

Danik Bhaskar

Jan 07, 2018, 12:59 AM IST
कपास पर सफेद मक्खी के हमले से प कपास पर सफेद मक्खी के हमले से प

औरंगाबाद. जून से सितंबर 2017 में मानसून की बारिश रेगुलर न होने और मौसम में बदलाव के कारण 12 राज्यों में फसल पर कीटों और बीमारियों का हमला हुआ है। इस कारण सोयाबीन, गन्ने और कपास जैसी अहम फसलों में 20 से 25 फीसदी तक की कमी आने का खतरा है। कैश क्राॅप पर कीटों के इस हमले से किसानों को ज्यादा नुकसान सहना पड़ रहा है।

इस साल बारिश का अलग पैटर्न रहा जिम्मेदार

इस बारे में इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च काउंसिल के ऑल इंडिया नेटवर्क प्रोजेक्ट आॅन व्हाइट ग्रब के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. पांडुरंग मोहिते बताते हैं "इस साल जून से सितंबर तक बारिश हुई, लेकिन बारिश का पैटर्न कुछ अलग था। जून के पहले आधे भाग में अच्छी बारिश हुई, लेकिन दूसरे हिस्से में मानसून ने ब्रेक ले लिया। जुलाई में भी यह लंबा ब्रेक जारी रहा। फिर अगस्त में कम पीरियड में धुअांधार बारिश हुई। फिर ब्रेक आ गया। सितंबर में भी मानसून का यही पैटर्न देखने को मिला। इस वजह से कीट और बीमारियों के लिए पोषक वातावरण बना रहा। फिर अक्टूबर गर्म रहा। नवंबर और दिसंबर में कड़ाके की ठंड ज्यादा नहीं पड़ी। यही कारण है कि फसलों पर कीट और बीमारी का असर बढ़ता गया।"

मौसम में बदलाव ही नहीं दूसरे भी कई कारण भी अहम

महाराष्ट्र के परभणी स्थित वसंतराव नाईक मराठवाड़ा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. बी वेंकटेश्वरलू कहते हैं- "भारत और दुनियाभर की रिसर्च यही बताती हैं कि क्लाइमेट चेंज से फसलों पर बीमारियां और कीट का हमला बढ़ता है। उमस और तापमान में अचानक बदलाव के कारण कीटों की संख्या काफी बढ़ती है। इन्हें खत्म करना मुश्किल होता है। कपास पर लगने वाले व्हाइट फ्लाई और बाल वार्म्स कीट और सोयाबीन के पत्ते खाने वाली सुंडी कीट मौसम में बदलाव के प्रति काफी सेंसेटिव होते हैं। यानी इनरेगुलर, बेमौसम बारिश में यह कीट तेजी से फैलता है।"

इस बात से एग्रीकल्चर एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा भी इत्तेफाक रखते हैं। वे कहते हैं "कीट से किसानों का नुकसान हुआ है, यह सच है, लेकिन कीटों के हमले के लिए केवल मौसम में बदलाव ही नहीं दूसरे भी कई कारण जिम्मेदार हैं। इसके दूसरे फैक्ट भी जानना चाहिए।"

राज्यों में ऐसे रहे हालात

- मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब में फसलों पर होमनी इल्ली कीड़े का हमला हुआ है। इस हमले के कारण गन्ने की खरीफ उपज भी 20 फीसदी घटी है। सोयाबीन, टमाटर, मिर्च की उपज में भी 25 फीसदी तक कमी आ रही है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सोयाबीन पर पत्तों से रस चूसने वाला कीट नजर आया। इससे इसकी प्रति एकड़ उपज में 25 फीसदी से 30 फीसदी की कमी देखी जा रही है।

- महाराष्ट्र में कपास पर पिंक बाल वर्म का हमला देखा गया है। कपास का उत्पादन 20 से 40 प्रतिशत तक कम रहा। वहीं गन्ना, सोयाबीन, प्याज, धान, मूंगफली की फसल पर वाइट ग्रब (होमनी इल्ली कीड़े) के हमले से इन फसलों की पैदावार 25% घटेगी।
- महाराष्ट्र, गुजरात, तामिलनाडु में टमाटर, बैंगन, मिर्च पर पत्ता खाने वाले सूंडी कीट से नुकसान हुआ है। उपज 20 से 25% घटी है।
- छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में गन्ने को होमनी कीड़ा लग गया। गन्ने की पैदावार 20 फीसदी घट सकती है। दोनों राज्य की कम उपजाऊ जमीन (लो फर्टाइल) पर टर्माइट कीट देखने में आ रहे हैं।
- राजस्थान में सोयाबीन पर टोबैको कैटरपिलर और बाजरा पर एअर हेड कैटरपिलर का हमला है। पैदावार 15 से 20% कम हुई।
- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में कपास पिंक बाल वर्म और धान ब्राउन प्लान्ट हॉपर की चपेट में। पैदावार में 30 से 35% की कमी आई है।
- वेस्ट बंगाल में गेंहू की फसल पर व्हीट रस्ट का हमला हुआ। इससे फसल को 15 से 20 फीसदी का नुकसान हो सकता है।

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