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डिमांड में है इस जेल में तैयार रोटी-बिरयानी, महीने का टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा

केरल की कनूर जेल में कैदियों का बनाया खाना बाजार में सप्लाई होता है, सालभर में हो रही 3 करोड़ रुपए की कमाई

Dainik Bhaskar

Jan 29, 2018, 03:44 AM IST
यहां की रोटी, बिरयानी, बेकरी आइटम, लड्‌डू, चिप्स समेत दूसरे प्रोडक्ट की भी मार्केट में अच्छी मांग है। यहां की रोटी, बिरयानी, बेकरी आइटम, लड्‌डू, चिप्स समेत दूसरे प्रोडक्ट की भी मार्केट में अच्छी मांग है।

तिरुअनंतपुरम. जेल का खाना आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता है। इस धारणा को केरल की कनूर सेंट्रल जेल बदल रही है। वहां सजा काट रहे लोगों को उनका हुनर निखारकर सुधारा जा रहा है। जेल में 1200 कैदी हैं। यहां की रोटी, बिरयानी, बेकरी आयटम, लड्‌डू, चिप्स समेत अन्य प्रोडक्ट की भी अच्छी मांग है। जेल के आउटलेट्स से महीने का टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा का है। कनूर के अलावा विजयुर और पूजापुरा जेल में कारोबार चल रहा है। कनूर और पूजापुरा के कैदियों को 200 रु. रोज मिलते हैं। कनूर जेल की राज्य में सबसे ज्यादा कमाई है।

2012 में शुरू हुआ था जेल की रोटी को बाजार में बेचने का प्रोजेक्ट

- 2009 में जेल में कैदियों के अवैध गतिविधियों के बाद छापा मारा गया था। इसके बाद जेल प्रशासन ने छवि बदलने की मुहिम शुरू की। जो कैदी खाना बनाना जानते थे, उन्हें रसोई में लगाया गया। बेकरी का काम जानने वालों से बिस्किट से लेकर ब्रेड तक बनवाना शुरू किया।

- 2012 तक जेल में बनी चीजें जेलों और जेल प्रशासन के लिए उपयोग की गई। 2012 में पहली बार जेल की रोटी को बाजार में बेचने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। धीरे-धीरे मांग बढ़ी, तो रोटी की मशीन भी मंगवाई गई।

- जेल में बने खाने की चीजों को फ्रीडम फूड ब्रांड नेम के साथ बेचा जाने लगा। सस्ते होने से जेल में बनी रोटी, बिरयानी से लेकर एग करी तक की बाजार में खासी मांग है। बीते छह साल में जेल उत्पादों से सरकार को 8.5 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। तीन करोड़ रुपए तो बीते साल कमाए हैं।

श्रीलंकाई कैदियों के साथ क्रिकेट

जेल प्रशासन कैदियों के मनोरंजन का खयाल रखता है। उन्हें क्रिकेट खेलने से लेकर अन्य गतिविधियों में लगाया जाता है। नए साल पर श्रीलंका के कैदियों की टीम को टी 20 क्रिकेट खेलने बुलाया था। क्रिकेट टीम में राज्य की पांच जेलों के खिलाड़ियों को मिलाकर एक टीम बनाई गई। उसका बाद स्टेडियम में एक मैच 21 जनवरी को खेला गया।

कमाई में तिहाड़ जेल आगे
जेल में कमाई के मामले में सबसे आगे दिल्ली की तिहाड़ जेल है। उसके उत्पाद टीजे ब्रांड नेम से बिकते हैं। सालाना करीब 40 करोड़ का टर्नओवर और 15 करोड़ रुपए कमाई है।

2012 में पहली बार जेल की रोटी को बाजार में बेचने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 2012 में पहली बार जेल की रोटी को बाजार में बेचने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया।
इस जेल के कैदियों की बनाई बिरयानी काफी फेमस है। इस जेल के कैदियों की बनाई बिरयानी काफी फेमस है।
जो कैदी खाना बनाना जानते थे, उन्हें रसोई में लगाया गया है। जो कैदी खाना बनाना जानते थे, उन्हें रसोई में लगाया गया है।
बीते छह साल में जेल उत्पादों से सरकार को 8.5 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। बीते छह साल में जेल उत्पादों से सरकार को 8.5 करोड़ रुपए की कमाई हुई है।
स्ते होने से जेल में बनी रोटी, बिरयानी से लेकर एग करी तक की बाजार में खासी मांग है। स्ते होने से जेल में बनी रोटी, बिरयानी से लेकर एग करी तक की बाजार में खासी मांग है।
जेल में बने खाने की चीजों को फ्रीडम फूड ब्रांड नेम के साथ बेचा जाता है। जेल में बने खाने की चीजों को फ्रीडम फूड ब्रांड नेम के साथ बेचा जाता है।
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यहां की रोटी, बिरयानी, बेकरी आइटम, लड्‌डू, चिप्स समेत दूसरे प्रोडक्ट की भी मार्केट में अच्छी मांग है।यहां की रोटी, बिरयानी, बेकरी आइटम, लड्‌डू, चिप्स समेत दूसरे प्रोडक्ट की भी मार्केट में अच्छी मांग है।
2012 में पहली बार जेल की रोटी को बाजार में बेचने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया।2012 में पहली बार जेल की रोटी को बाजार में बेचने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया।
इस जेल के कैदियों की बनाई बिरयानी काफी फेमस है।इस जेल के कैदियों की बनाई बिरयानी काफी फेमस है।
जो कैदी खाना बनाना जानते थे, उन्हें रसोई में लगाया गया है।जो कैदी खाना बनाना जानते थे, उन्हें रसोई में लगाया गया है।
बीते छह साल में जेल उत्पादों से सरकार को 8.5 करोड़ रुपए की कमाई हुई है।बीते छह साल में जेल उत्पादों से सरकार को 8.5 करोड़ रुपए की कमाई हुई है।
स्ते होने से जेल में बनी रोटी, बिरयानी से लेकर एग करी तक की बाजार में खासी मांग है।स्ते होने से जेल में बनी रोटी, बिरयानी से लेकर एग करी तक की बाजार में खासी मांग है।
जेल में बने खाने की चीजों को फ्रीडम फूड ब्रांड नेम के साथ बेचा जाता है।जेल में बने खाने की चीजों को फ्रीडम फूड ब्रांड नेम के साथ बेचा जाता है।
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