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6 महीने ISIS का लड़ाका बन रहा था ये इंडियन, बताई थी दहशत की दास्तां

ISIS द्वारा किडनैप किए 39 भारतीयों की मोसुल में मौत। उसी साल आतंकी बनने निकले थे मुंबई के ये 4 दोस्त।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 20, 2018, 05:32 PM IST

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    मुंबई.इराक के मोसुल से चार साल पहले अगवा हुए 39 भारतीय नागरिकों को आतंकी संगठन ISIS ने मौत के घाट उतार दिया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसे कन्फर्म कर दिया। 2014 में ही मुंबई निवासी चार दोस्त हज यात्रा के नाम पर इराक के लिए रवाना हुए थे। चारों ने वहां जाकर ISIS ज्वाइन किया था। इन चारों में से भारत जिंदा लौटे अरीब मजीद ने वहां का पूरा एक्सपीरिएंस शेयर किया था।

    तीन दिन दर्द से तड़पा, मांगी रहम की भीख.. तब छोड़ा आतंकी बनने का इरादा

    - 23 मई 2014 को मुंबई के कल्याण निवासी अरीब मजीद अपने तीन दोस्त फहाद शेख, शहीम टनकी और अमन तंदेल हज यात्रा का कहकर बगदाद के लिए रवाना हुए थे।
    - वहां पहुंचकर मजीद और टनकी ने घरवालों को फोन करके कहा- हमने ISIS ज्वाइन कर ली है। हमारे इस कदम से पूरे परिवार को जन्नत नसीब होगी।
    - 6 महीने बाद मजीद ने दोबारा घर पर फोन लगाया और कहा- यहां बहुत खतरा है। मुझे बचा लो। NIA ने उसे वहां से रेस्क्यू किया।
    - पुलिस से पूछताछ के दौरान मजीद ने ISIS द्वारा किए सलूक की डीटेल्स दीं।
    - उसने बताया, "एक लड़ाई के दौरान मैं जख्मी हो गया। मुझे एक गोली लगी थी। मैं दर्द से तड़पता रहा, लेकिन ISIS वालों ने मेरा इलाज नहीं करवाया। तीन दिन तड़पने के बाद मैंने उनसे इलाज करवाने की भीख मांगी, तब जाकर मुझे दवाई नसीब हुई। उन तीन दिनों में मुझे समझ आया कि यह कोई धर्म की लड़ाई नहीं है।"

    टॉयलेट धुलवाते थे आतंकी

    - मजीद ने बताया था, "उन लोगों ने मुझे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था। वो लोग मुझे मोर्चे पर लड़ाई के लिए भेजने की जगह सिर्फ टॉयलेट धुलवाते थे। कहते थे जो लोग लड़ रहे हैं, उनके लिए पानी लेकर जाओ।"
    - "जिस शख्स ने मुझे आईएसआईएस में भर्ती करवाया था, उसके कहने का भी उनके हाईकमान पर कोई असर नहीं हुआ। मुझे कभी वॉर में शामिल होने ही नहीं दिया गया।"

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, इंजीनियरिंग स्टूडेंट से आतंकी कैंप तक कैसे पहुंचा था मजीद...

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    मिली थी AK-47 और रॉकेट लॉन्चर की ट्रेनिंग

    - अरीब ने पूछताछ में बताया था कि उसे और तीनों दोस्तों को ISIS कैंप में एके-47 और रॉकेट लॉन्चर चलाने की ट्रेनिंग दी गई।
    - "उन लोगों का मानना था कि इंडियन्स फिजिकली कमजोर होते हैं। इसलिए उन्हें हलके हथियार ही चलाने के लिए दिए जाते थे।"
    - "ISIS कैंपों में कोई धर्म की लड़ाई नहीं होती, ना ही कुरान में लिखी बातों को फॉलो किया जाता है। उसके लड़ाके बड़ी बेरहमी से वहां की औरतों का रेप कर देते हैं।"

    इंजीनियरिंग स्टूडेंट था अरीब

    - अरीब मजीद एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता एजाज मजीद डॉक्टर हैं और कल्याण के अंसारी चौक में क्लीनिक चलाते हैं।
    - इसकी बड़ी बहन भी डॉक्टर है।
    - खुद अरीब मजीद नवी मुंबई में सिविल इंजीनियरिंग का स्टूडेंट था।

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    कट्टरवादी था अरीब, तभी ज्वाइन की थी ISIS

    - अरीब मजीद एक कट्टरवादी इंसान था। बगदाद जाने से एक महीने पहले उसने अपनी जींस और शर्ट दान कर दी थीं और अपना सेलफोन बंद कर दिया था।
    - वो अपनी बहन को जॉब करने और मूवी देखने जाने से रोकता था। उसका मानना था कि मूवी और टीवी सीरियल सिर्फ न्यूडिटी दिखाने का एक प्रॉफेशनल जरिया हैं।
    - उसका कहना था कि अपने परिवार को एशोआराम की जिंदगी जीता देख उसे रोना आता था। उसे लगता था कि ऐसी लाइफ जीना पाप है।

    पहले शादी, फिर मौत की आई थी खबर

    - 26 अगस्त 2014 को चारों दोस्तों में से एक ने मजीद के घरवालों को फोन करके बताया कि मोसुल में एक बॉम्ब ब्लास्ट में उसकी मौत हो गई है।
    - दो दिन बाद एक वेबसाइट पर पब्लिश हुआ कि मजीद ने शादी कर ली है और उसे शहादत मिल गई है।
    - वेबसाइट पर मजीद को अबू अली अल-हिंद के नाम से दिखाया गया। उसके हाथ में एक बंदूक भी थी।
    - वेबसाइट के मुताबिक मजीद ने ISIS के कई ऑपरेशन्स में हिस्सा लिया, एक फिलिस्तीनी लड़की से रक्का में शादी की और फिर मोसुल में उसकी मौत हो गई।

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    कैसे हुई वापसी

    - मौत की खबर वायरल होने के बाद मजीद ने अपने पिता को फोन कर जिंदा होने की बात कही। उसने बताया कि घायल अवस्था में वो तुर्की भागकर आया है।
    - साथ ही उसने पिता से घर वापस लाने की गुहार लगाई।
    - मजीद के पिता ने NIA से बात की और नवंबर में उसे मुंबई वापस लाया गया।

    ऐसी थी तीनों दोस्तों की प्रोफाइल

    अमन तंदेल - इंजीनियरिंग स्टूडेंट। पिता रेलवे में इंजीनियर।

    फहाद शेख - मेकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट। पिता कल्याण में डॉक्टर।

    शहीम टनकी - हाई स्कूल ड्रॉपआउट। कॉल सेंटर में काम करता था। पिता लोकल बिजनेसमैन।

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